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Monday 20 January 2020

मेरी सज़ा से ग़लत परंपरा की शुरुआत होगी — जस्टिस कर्णन

नई दिल्ली — कोलकाता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सीएस कर्णन ने अपनी सजा के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट की सात वरिष्ठतम जजों की बेंच ने उन्हें 9 मई को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए छह माह के कैद की सजा सुनाई थी। जस्टिस कर्णन 21 जून से कोलकाता के प्रेसिडेंसी जेल में बंद हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने उनको सजा देने का विस्तृत आदेश पांच जुलाई को जारी किया। अपनी याचिका में जस्टिस कर्णन ने जज और कोर्ट में फ़र्क बताते हुए कहा है कि जजों के ख़िलाफ़ आरोप लगाने का मतलब ये नहीं है कि उन्होंने कोर्ट की अवमानना की है। उन्होंने कहा है कि उनके द्वारा लगाये गए आरोपों की जांच किए बिना ही निष्कर्ष पर पहुंचना ग़लत था। आरोप लगाने वाला व्यक्ति भी संवैधानिक पद पर था और जिन पर आरोप लगाया गया वे भी संवैधानिक पद पर। इसलिए बिना जांच किए ही अवमानना की प्रक्रिया कैसे चलाई जा सकती है।

अपनी याचिका में कर्णन ने कहा है कि इस फैसले से एक ग़लत परंपरा की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट के ऊपर प्रशासनिक या न्यायिक पर्यवेक्षण का अधिकार नहीं है। जस्टिस कर्णन को कोलकाता पुलिस ने 20 जून को तमिलनाडु से गिरफ़्तार किया था।

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