Tuesday 11 May 2021
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पाकिस्तान में महिलाओं का मानवाधिकार के लिए प्रदर्शन

विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ख़ानापूर्ति के लिए कहा कि पाकिस्तान इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के विषय का पूरा समर्थन करता है

पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में महिलाओं ने 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन आयोजित की। Women’s March नाम से आयोजित इन रैलियों का आयोजन कराची, लाहौर, इस्लामाबाद और कई अन्य शहरों में किया गया।

कराची शहर में विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। इसमें शामिल महिलाओं ने ‘कम उम्र की शादियां रोकें’, ‘‘समानता महत्वपूर्ण है, प्रताड़ना नहीं” जैसे संदेशों के साथ तख्तियां ले रखी थीं। इन महिलाओं ने अपने अधिकारों के समर्थन में नारे लगाए।

लाहौर में आयोजित मार्च में महिलाओं ने यौन हिंसा और दुर्व्यवहार के अपने अनुभव साझा किए। महिलाओं ने अधिकारों की मांग करते हुए इस्लामाबाद में गीत गाए और कविता पाठ किया।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने विदेश कार्यालय द्वारा जारी अपने संदेश में कहा कि पाकिस्तान इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के विषय का पूरा समर्थन करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज, हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ शामिल हैं। यह महिलाओं को सशक्त बनाने में की गई प्रगति का जश्न मनाने का अवसर है और महिलाओं के अधिकारों के प्रति सम्मान बढ़ाने के प्रयासों के लिए हमारे सामूहिक संकल्प की पुष्टि भी करता है।’’

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अपने संदेश में देश की शान के लिए पाकिस्तानी महिलाओं के योगदान पर प्रकाश डाला।

सूचना मंत्री शिबली फ़राज़ ने कहा कि संविधान महिलाओं के अधिकारों का गारंटीकर्ता है और उन्होंने देश के निर्माण और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज नेता मरियम नवाज ने कहा कि महिला सशक्तीकरण देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।

पाकिस्तान के मुल्तान में इस साल हुए औरत मार्च में पितृसत्ता और कोरोनावायरस से एक साथ लड़ने का लक्ष्य रखा गया। शहर के नवा शेहर चौक से शुरू हुई इस रैली में महिलाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। पाकिस्तान में महिलाओं ने खासा बंदिशें हैं। देश की कई यूनिवर्सिटिज ने महिला छात्रों के लिए ड्रेस कोड लागू किए हुए हैं। पश्चिमी पोशाकों पर बंदिशें लगाना पड़ोसी मुल्क में आम बात है।

पाकिस्तान में महिला मानवाधिकार का सच

नेताओं के बयानों से परे पाकिस्तान में महिलाओं एवं बच्चों के मानवाधिकार की वस्तुस्थिति दयनीय है। Human Rights Watch की World Report 2021 के अनुसार महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध हिंसा — बलात्कार, तथाकथित सम्मान के लिए हत्याएँ (honour killings), acid हमले, घरेलू हिंसा और जबरन शादी — एक गंभीर समस्या बनी हुई है। पाकिस्तानी activists का अनुमान है कि हर साल लगभग 1,000 honour killings होती हैं।

जून में पाकिस्तानी पंजाब के फ़ैसलाबाद ज़िले में 19 वर्षीय महविश अरशद की शादी के प्रस्ताव को अस्वीकार करने के कारण हत्या ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार साल 2018 के पहले छह महीनों में फ़ैसलाबाद ज़िले में कम से कम 66 महिलाओं की हत्या कर दी गई — बहुसंख्यक समुदाय अर्थात मुसलमान के “सम्मान” के नाम पर।

न्यायमूर्ति ताहिरा सफ़दर को बलूचिस्तान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। जो पाकिस्तान में एक उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुईं जब कि भारत जैसे लोकतान्त्रिक देशों में महिलाओं की उच्च पदों पर नियुक्ति अब आम बात हो गई है।

धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाएँ — ख़ास कर हिन्दू व ईसाई — विशेष रूप से दुर्व्यवहार की शिकार होती हैं। Movement for Solidarity and Peace in Pakistan की एक रिपोर्ट में पाया गया कि हर साल कम से कम 1,000 ईसाई और हिंदू समुदायों की लड़कियों को मुस्लिम पुरुषों से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है। सरकार ने ऐसे जबरन विवाह रोकने के लिए कोई ख़ास काम नहीं किया है।

बाल विवाह पाकिस्तान में एक गंभीर समस्या बनी हुई है। पाकिस्तान में 21 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले, और 3 प्रतिशत की शादी 15 साल की उम्र से पहले हो जाती है।

Publishing partner: Uprising

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