कायम रहेगा रजनीकांत का जलवा?

हिंदी, तमिल, तेलुगू और मलयालम के अलावा वे बांग्ला फिल्म 'भाग्य देबता' में भी काम कर चुके हैं

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चार दशकों से अधिक समय से अभिनेता रजनीकांत अपने अभिनय और विशेष अदाओं से दर्शकों को प्रभावित करते आ रहे हैं। उनकी नयी फिल्म ‘काला करिकालन’ सात जून को हिंदी, तमिल और तेलुगू में प्रदर्शित हो रही है। इसमें वे भारतीय सिनेमा के अन्य चर्चित चेहरे नाना पाटेकर और ममूट्टी के साथ नजर आयेंगे। साथ में हुमा कुरैशी, अंजली पाटिल, समुथिरकानी, सुकन्या, एश्वरी राव आदि कलाकार भी हैं। इसका निर्देशन पीए रंजीत ने किया है, जो 2016 में आयी रजनीकांत की मशहूर फिल्म ‘कबाली’ के निर्देशक भी थे। फिल्म का ट्रेलर देख कर कहा जा सकता है कि रजनीकांत अपने चिर-परिचित अंदाज में परदे पर होंगे। जलवा जानलेवा होने की उम्मीद इसलिए भी है कि फिल्म का शीर्षक मृत्यु के देवता यम से जुड़ा हुआ है। सत्तर के दशक में बेंगलुरु में पले-बढ़े मराठी मूल के शिवाजी राव गायकवाड़ को तमिल सिनेमा में रजनीकांत के रूप में पेश करने वाले महान फिल्मकार के बालाचंदर ने जब सिनेमा में काम करने के लिए इस बेचैन युवा का ऑडिशन किया था, तभी अपने सहयोगियों को कह दिया था- ‘देखते रहो।

इस लड़के की आंखों में आग है। एक दिन यह खास मुकाम हासिल करेगा।’ यह भविष्यवाणी बहुत जल्दी ही सच्चाई में बदल गयी। 1975 में प्रदर्शित उनकी पहली फिल्म ‘अपूर्व रागंगल’ जोरदार हिट रही थी। आज उम्र के सातवें दशक में भी रजनीकांत एशिया के सबसे महंगे अभिनेताओं में शुमार हैं। अब तक वे 160 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं। भारत में उनकी फीस सबसे ज्यादा तो है ही, एशिया में इस मामले में सिर्फ जैकी चांग ही उनसे आगे हैं। दर्शकों में उनकी लोकप्रियता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारी-भरकम बजट की फिल्मों को वे अपने कांधे पर ढो लेते हैं। 2010 में आयी ‘रोबोट’ उस समय तक भारत की सबसे अधिक बजट की फिल्म थी। इस फिल्म की लागत 132 करोड़ थी। ‘रोबोट’ की कहानी को आगे बढ़ाती ‘2.0’ का बजट 400 करोड़ है। यह फिल्म तैयार होने के बावजूद किन्हीं कारणों से रिलीज नहीं हो सकी है। वैसे इसे इसी साल आना था, पर ‘काला करिकालन’ के कारण इसे फिलहाल टाल दिया गया है। ‘काला करिकालन’ का निर्माण उनके दामाद अभिनेता धनुष ने किया है। रजनीकांत की एक उपलब्धि यह भी है कि वे अकेले ऐसे भारतीय अभिनेता हैं जिसने सिनेमा के चार रूपों- ब्लैक एंड व्हाइट, रंगीन, थ्री डी और मोशन कैप्चर तकनीक- में काम भी किया है और कामयाब भी हुए हैं। भारत समेत अन्य कई देशों में भी उनके प्रशंसक हैं और एक आकलन के मुताबिक उनके फैन क्लबों की तादाद 50 हजार के आसपास है। बेंगलुरु में बस कंडक्टर के रूप में 750 रुपये मासिक कमाने वाले युवा की यह उपलब्धि किसी दंतकथा से कम नहीं है। लंबे समय से चल रही कयासों को विराम देते हुए अब वे राजनीति में भी आ चुके हैं। अब देखना यह है कि परदे का यह चमत्कारी अभिनेता सियासत की बिसात पर क्या गुल खिलाता है।

बहरहाल, इस महानायक की बीती दास्तान भी बेहद दिलचस्प है। जीजाबाई और रामोजी राव गायकवाड़ की चार में से इस सबसे छोटी संतान ने बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की शिक्षा की जगह नाटकों में अभिनय करना चुना था। उनके बड़े भाई की कोशिशों से मिली बस कंडक्टरी की स्थायी नौकरी से पहले वे ऑफिस कर्मचारी, कुली और बढ़ई का काम भी कर चुके थे। उनके एक दोस्त ने रजनीकांत को फिल्मों में काम करने का सपना दिखाया और चेन्नई के फिल्म संस्थान में दाखिले में आर्थिक मदद भी की। इसी संस्थान में एक कन्नड़ नाटक में उनकी भूमिका से निर्देशक के. बालाचंदर प्रभावित हुए थे और उन्हें तमिल सीखने को कहा था। हालांकि हिंदी फिल्मों में उनका प्रवेश देर से हुआ, पर 1980 में आयी हिट फिल्म ‘बिल्ला’ 1978 में प्रदर्शित अभिताभ बच्चन की कामयाब फिल्म ‘डॉन’ का रीमेक थी। 1983 में हिंदी में उनकी पहली फिल्म ‘अंधा कानून’ आयी, जिसे टी. रामाराव ने निर्देशित किया था। इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन भी थे। उन्होंने 1993 में बनी ‘वल्ली’ का स्क्रीनप्ले भी लिखा था। हिंदी, तमिल, तेलुगू और मलयालम के अलावा वे बांग्ला फिल्म ‘भाग्य देबता’ में भी काम कर चुके हैं।

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SOURCEहिन्दुस्थान समाचार/प्रकाश के रे
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