निश्चित रूप से अभी एक बेहद खतरनाक और विषाक्त दौर चल रहा है। कुछ शक्तियां धर्म और साम्प्रदायिकता की आड़ में देश में नफरत की फसल बोने में लगी हुई हैं। यह स्थिति वस्तुतः भयावह है। इस नफरत का ताजा शिकार हुई है देश की चोटी की मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी भारती एयरटेल लिमिटेड। उस पर मुसलमानों के प्रति घृणा रखने के आरोप लगाये जा रहे हैं। यह सब लखनऊ की एक कन्या के ट्वीट के बाद शुरू हुआ। फिर तो सोशल मीडिया हाथ धोकर पीछे ही पड़ गया भारती एयरटेल के। कुछ अधिक ही उत्साही लगने वाले लोग सोशल मीडिया पर भारती एयरटेल लिमिटेड के संस्थापक अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल को भी भिगो-भिगो कर जूते मार रहे हैं। ये मित्तल से माफी मांगने की मांग कर रहे हैं। कह रहे हैं कि वे एयरटेल का मोबाइल कन्केशन कटवा लेंगे। कइयों ने कटवाने का दावा भी किया है। यानी एक ट्वीट ने भारत समेत एक दर्जन से अधिक अफ्रीकी देशों और पड़ोसी बांग्लादेश में मोबाइल सेवाएं दे रही भारती एयरटेल लिमिटेड को एंटी मुस्लिम होने का प्रमाणपत्र बांट दिया।

 

दरअसल हुआ यह था कि उपर्युक्त युवती ने एयरटेल को ट्वीट किया कि वह उसके घर पर हिंदू कस्टमर केयर प्रतिनिधि भेजें क्योंकि वह मुस्लिम प्रतिनिधि से सेवा नहीं ले सकती। दरअसल लखनऊ की पूजा सिंह के घर एयरटेल डिजिटल टीवी का कनेक्शन है। कनेक्शन में कुछ दिक्कत होने पर उसने कंपनी के कस्टमर केयर सर्विस में शिकायत की। इस पर पूजा के घर जाने के लिए कंपनी ने शोएब नामक सर्विस इंजीनियर का चयन किया। इसकी जानकारी होते ही पूजा ने विवादित ट्वीट कर दिया। उसने कहा कि चूंकि शोएब मुस्लिम हैं और मुझे मुस्लिमों के कामकाज की नैतिकता पर भरोसा नहीं हैं, क्योंकि कुरान में कस्टमर सर्विस के अलग मायने हो सकते हैं। इसलिए मेरे घर हिंदू प्रतिनिधि ही भेजें। जब पूजा के ट्वीट पर सोशल मीडिया पर बवाल कट रहा था, उसके बाद एयरटेल ने सफाई दी कि हम अपने कस्टमर्स और कर्मचारियों के साथ जाति-धर्म के नाम पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करते। कॉल के समय जो भी प्रतिनिधि उपलब्ध होता है, उसे ही तत्काल मौके पर भेजा जाता है।

देखा जाए तो एयरटेल की इस सफाई के बाद सारा विवाद बंद होना चाहिए था, पर यह नहीं हुआ। क्या इतने छोटे से मसले के लिए सुनील भारती मित्तल को कठघरे में खड़ा करना चाहिए था? वे सामान्य उद्यमी नहीं हैं। वे जब किसी सवाल पर अपनी राय रखते हैं तो उसकी कोई अनदेखी नहीं कर सकता। वे पहली पीढ़ी के सच्चे उद्यमी हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि मैंने जीवन के शुरुआती दौर में ही बिजनेस करने का निर्णय ले लिया था। जब पढ़ाई में मन लगता नहीं था तो दो ही विकल्प बचते थे। एक राजनीति में जाने का और दूसरा बिजनेस करने का। पंजाब के लुधियाना शहर में व्यापार करने का अच्छा माहौल था। मैंने भी कम उम्र में व्यापार करना शुरू किया। सबसे पहले हीरो समूह की हीरो साइकिल कंपनी के लिए साइकिल के पार्ट्स बनाने शुरू किए। उसके बाद तो वे आगे बढ़ते ही गए।

भारती के लिए साल 1982 खास था। उनका तब जापान से आयातित पोर्टेबल जेनरेटरों की बिक्री का शानदार काम था। इसमें उन्हें मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग के गुर भी जाने। जब सब कुछ सही लाइन पर चल रहा था, तब ही सरकार ने जेनरेटर के आयात पर रोक लगा दी, क्योंकि दो भारतीय कंपनियों को देश में ही जेनरेटर बनाने का लाइसेंस दे दिया गया था। तब उन्होंने तय किया कि आगे जब भी इस तरह का अवसर आएगा, वे उसे लपकने के लिए तैयार रहेंगे। सुनील भारती मित्तल के लिए 1992 खास रहा। तब सरकार पहली बार मोबाइल फोन सेवा के लिए लाइसेंस बांट रही थी। इस मौके को भारती ने जाने नहीं दिया। उसके बाद जो उन्होंने करके दिखाया उसकी दूसरी मिसाल मिलना कठिन है। उनके समूह की कंपनियों में लाखों पेशेवर कार्यरत हैं। वे भारतीय उद्योग संगठन (सीआईआई) के साल 2008 में अध्यक्ष थे। वे इस शिखर तक नीचे से गए हैं।

सुनील भारती मित्तल और एयरटेल पर कम्युनल होने के आरोप लगाने वालों को नहीं मालूम कि उनकी कंपनी इस्लामिक राष्ट्र बांग्लादेश में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं। भारती एयरटेल अफ्रीका में भी अपनी दस्तक दे चुकी है। नाइजीरिया, घाना, केन्या, तंजानिया, युगांडा आदि देशों में भारती एयरटेल है। ये भारत की बहुराष्ट्रीय कंपनी है। इतने विशाल समूह को उन्होंने अपने कौशल, समझदारी और मेहनत से खड़ा किया है। इसीलिए उन्हें देश के कॉरपोरेट संसार के सबसे आदरणीय हस्तियों में से एक माना जाता है। मंत्री से प्रधानमंत्री भी सुनील भारती मित्तल से कारोबार संबंधी मसलों पर सलाह करते हैं। पर उसी शख्स को दो मिनट में सांप्रदायिक कहने वाले पैदा हो गए। उन्होंने एक बार सही था कि सफलता आसानी से प्राप्त नहीं होती। क्योंकि आसान सफलता जैसी कोई चीज़ नहीं होती। कड़ी मेहनत से हासिल सफलता और प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगने चालू हो गए।

सुनील भारती मित्तल युवाओं को एक सलाह अवश्य देते हैं। कहते हैं, अगर मौका मिले तो जो आप ज़िंदगी में करना चाहते हैं, वही करिए। अगर ऐसा नहीं हो पाता तो कोई औसत ज़िंदगी तो जी सकता है, लेकिन बड़ी सफलता नहीं पा सकता। बड़ी सफलता तो तभी मिलेगी, जब आर्किटेक्ट की चाह रखने वाला आर्किटेक्ट बने, इंजीनियर बनने की चाह रखने वाला इंजीनियर बने और कारोबारी बनने की चाहत रखने वाला आदमी कारोबारी बने।  सुनील भारती मित्तल पर लांछन लगाने वाले याद रखें कि वे एक आदर्श परिवार से संबंध रखते हैं। उन्होंने एक बार बताया था कि मेरे पिता जी ने अपनी मर्ज़ी से जाति से बाहर प्रेम विवाह किया था। उन्होंने ही तय किया कि उनके बच्चों के नाम के पीछे मित्तल नहीं भारती लगेगा।

भारती किसी बिजनेस स्कूल में नहीं गये, बल्कि सड़कों पर उन्होंने सबक सीखे और प्रत्येक अवसर पर उन चीजों को इकट्ठा करने, आत्मसात करने और अपनाने की कोशिश की, जो एक बिजनेस को स्थापित करने के लिए जरूरी होते हैं। वे मानते हैं कि बड़े सपने देखने चाहिए। हर चीज की शुरुआत एक छोटे से कदम से होती है, लेकिन लंबी छलांग लगाने के लिए आपको बड़े सपने देखने होंगे। सुनील भारती मित्तल सिर्फ पैसा बनाने की मशीन बन चुके कारोबारियों से अलग हैं। वे राष्ट्र निर्माण में अपनी ठोस भूमिका निभा रहे है। उन्होंने कुछ समय पहले समाजसेवी कामों के लिए भारती फाउंडेशन को अपनी संपत्ति का 10 फीसदी हिस्सा यानी करीब सात हजार करोड़ रुपए दान दिए। मित्तल देश में शिक्षा के विस्तार और विकास के कार्यों को गति प्रदान कर रहे हैं। वे एक विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना भी कर रहे हैं। इस तरह के शख्स और उनकी कंपनी पर सांप्रदायिक होने के आरोप लगाने वाले हो सके तो अपना किसी मनोचिकित्सक से इलाज करवा लें।