Tuesday 19 October 2021
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नरेंद्र गिरि के सूइसाइड नोट में शिष्य पर फ़र्ज़ी तस्वीर के सहारे ब्लैकमेल करने का आरोप

महंत महेंद्र गिरि ने सूइसाइड नोट में लिखा कि उनके शिष्य स्वामी आनंद गिरि ने उनकी फ़ोटो एक लड़की की तस्वीर के साथ मॉर्फ़ कर वायरल करने की धमकी दी थी

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सूइसाइड नोट से यह संकेत मिल रहा है कि उन्होंने आत्महत्या जैसा क़दम उठाया क्योंकि उनके शिष्य स्वामी आनंद गिरि उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था ― एक तस्वीर के सााथ छेड़छाड़ कर एक लड़की के साथ जोड़कर।

महंत नरेंद्र गिरि ने सूइसाइड नोट में लिखा है कि “मैंने पूरा जीवन सम्मान से जिया है। अगर यह तस्वीर बाहर आ जाएगी तो मैं समाज में सम्मान से जी नहीं पाऊंगा। इससे बेहतर मर जाना है।” सूइसाइड नोट में यह भी लिखा है कि उन्होंने 13 सितंबर को भी आत्महत्या करने की कोशिश की थी।

पुलिस के पास मौजूद सूइसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है क‍ि आनंद गिरि के कारण वे विचलित हो गए। हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ उनकी फ़ोटो जोड़कर ग़लत काम करते हुए तस्वीर वायरल करने वाला है।

महंत नरेंद्र गिरि को बदनाम करने की कोशिश का वर्णन है सूइसाइड नोट में। लिखा है, “मैंने सोचा कि एक बार बदनाम हो गया तो कहाँ-कहाँ सफाई दूंगा? बदनाम हो गया तो जिस पद पर हूँ उसकी गरिमा चली जाएगी। इससे अच्छा तो मर जाना ठीक है। मेरे मरने के बाद सच्चाई तो सामने आ ही जाएगी।” आगे नरेंद्र गिरि ने लिखा, “मैं जिस सम्मान से जी रहा हूँ, अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज मैं कैसे रहूंगा? इससे अच्छा मर जाना ठीक रहेगा।”

महंत नरेंद्र गिरि ने सूइसाइड नोट में लिखा है कि वे 13 सितंबर को ही आत्महत्या करने वाले थे। लेकिन हिम्मत नहीं कर पाए। आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है तो उन्हें लगा कि बदनामी से अच्छा मर जाना है। “मेरी आत्महत्या का ज़िम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है।” तीनों संदिग्धों के नाम के साथ लिखा है ― “मैं पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से प्रार्थना करता हूँ कि इन तीनों के साथ कानूनी कार्रवाई की जाए जिससे मेरी आत्मा को शांति मिल सके।”

महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सूइसाइड नोट में शिष्य बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाया है। महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा ― “प्रिय बलवीर ‌गिरि, मठ मंदिर की व्यवस्‍था का प्रयास करना, जिस तरह से मैं किया करता था।” साथ ही उन्होंने अपने कुछ शिष्यों का ध्यान रखने की भी बात कही। इसके साथ उन्होंने महंत हरी गोविंद पुरी के लिए लिखा ― “आप से निवेदन है कि मढ़ी का महंत बलवीर गिरि को ही बनाना।” साथ ही महंत रविन्द्र पुरी जी के लिए उन्होंने लिखा कि “आप ने हमेशा साथ दिया है, मेरे मरने के बाद भी मठ की गरिमा को बनाए रखना।”

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