नई दिल्ली — केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यार्पण को लेकर सरकारी एजेंसियों द्वारा दस्तावेज़ उपलब्ध कराने में 6 महीने का विलम्ब किये जाने संबंधी मीडिया में प्रकाशित ख़बरों पर विस्तृत स्पष्टीकरण देते हुए दावा किया है कि इस मामले कोई देर नहीं की गई है।

सीबीआई की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति में यह दावा किया गया है। ग़ौरतलब है कि विजय माल्या पर 17 भारतीय बैंकों से रु० 9,000 करोड़ से ज़्यादा का क़र्ज लेने का आरोप है। क़र्ज न लौटाने पर भारत सरकार ने उसे भगोड़ा घोषित किया है, जो मार्च 2016 से लंदन में है।

सीबीआई के अनुसार विजय माल्या के विरुद्ध मुंबई स्थित सीबीआई के विशेष जज की अदालत में 24 जनवरी 2017 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था जिस पर अदालत ने 31 जनवरी को गैर ज़मानती वारंट जारी कर दिया था। पर विजय माल्या मार्च 2016 से लंदन में है। अतः 9 फरवरी को उसके प्रत्यार्पण के लिए राजनयिक चैनलों के माध्यम से इंग्लैंड के प्रशासन तंत्र से आग्रह किया गया।

भारत ने विदेशी अदालत से माल्या के प्रत्यार्पण का आग्रह किया जिस पर कार्यवाही करते हुए माल्या की गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर दिया गया। इस पर माल्या 18 अप्रैल को अदालत में पेश हुआ जहां से उसे सशर्त ज़मानत दे दी गई। उसके लंदन से बाहर जाने पर रोक भी लगा दी गई है।

सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी लंदन गए। उन्होंने 2 और 3 मई को अतिरिक्त दस्तावेज़ सौंपे जिनकी मांग की गई थी। इस मुआमले में अब अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।