वाराणसी में कल के मतदान के लिए वोटरों में प्रचंड उत्साह

वाराणसी तय करेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में सांसद के रूप में वापसी करते हैं या नहीं हालांकि इस सवाल का जवाब सभी को पता है

0
57
वाराणसी

वाराणसी | देश में अंतिम चरण के मतदान की तैयारी हो चुकी है, पिछली बार भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी को जितवाने वाले वाराणसी में मतदाताओं के बीच उत्साह है और लोग भारी संख्या में वोट डालने के असंख्य कारण बता रहे हैं।

प्रथम वर्ष के छात्र और पहली बार के मतदाता राहुल “एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते” और “देश का भविष्य तय करने में एक भूमिका” तलाशते हुए चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए लालायित हैं।

इस हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र में रविवार को होने वाले मतदान को न केवल देश में बल्कि दुनिया भर में भी देखा जाएगा क्योंकि यह तय करेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में सांसद के रूप में वापसी करते हैं या नहीं हालांकि इस सवाल का जवाब सभी को पता है।

युवा और पहली बार के मतदाता निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक उत्साहित हैं। इन्होंने 2014 में मोदी को 56.37% वोट शेयर के साथ जिताया था। सन 2009 की तुलना में भाजपा के पक्ष में 25.85% अधिक वोट पड़े थे। दस साल पहले पार्टी के मुरली मनोहर जोशी 30.5% के वोट शेयर के साथ जीते थे।

25 साल की सीमा कहती हैं, “हम एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते अपने वोट डालने के लिए एक साथ जाएंगे।” सीमा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट कर रही हैं। 2014 में उन्होंने अपना पहला वोट डाला था और तब से सभी चुनावों में भाग ले चुकी हैं, जैसा कि उनके दोस्तों ने किया है।

10 मार्च को चुनावों की घोषणा की गई थी और अब तक देश में छह चरणों के मतदान हो चुके हैं। हर चरण में युवाओं ने केवल वोट ही नहीं दिया बल्कि बड़े उत्साह के साथ सोशल मीडिया स्याही लगी अपनी अंगुलियों को प्रदर्शित करते हुए सेल्फियाँ पोस्ट कीं।

पहली बार के मतदाता सौरभ को बाहर जाने और मतदान करने के लिए प्रेरित किया गया है। “एक महीने से अधिक समय से मैं अपने दोस्तों को दूसरे राज्यों से देख रहा हूं, अपने फिंगर पर स्याही के साथ अपनी सेल्फी पोस्ट करते हैं। अब मेरी बारी है, मैं इस अवसर को गंवाना नहीं चाहता,” उन्होंने कहा।

निर्वाचन क्षेत्र में पिछले एक महीने में एक असाधारण अभियान देखा गया है, जिसमें सेलिब्रिटी और हाई-प्रोफाइल नेताओं ने भाग लिया और जिसमें मोदी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी-वाड्रा शामिल हुए।

मोदी के अलावा 25 अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं, लेकिन उनकी मुख्य चुनौती के रूप में कांग्रेस के अजय राय और सपा-बसपा के महागठबंधन की उम्मीदवार शालिनी यादव विद्यमान हैं।

इस हाई-प्रोफाइल सीट से प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की अटकलें भी थीं पर कथित तौर पर पार्टी ने उनकी यह इच्छा पूरी नहीं होने दी।

कांग्रेस ने राय पर फिर से विश्वास ज़ाहिर किया है, जिनकी 2014 के आम चुनाव में ज़मानत ज़ब्त हो गई थी।

भूमिहार समुदाय से आने वाले राय के ब्राह्मण समर्थक भी बहुत हैं। उन्होंने एबीवीपी, आरएसएस की छात्र शाखा के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की, और 1996 और 2007 के बीच लगातार तीन बार कोलासाला से भाजपा उम्मीदवार के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। 2009 में भाजपा द्वारा लोकसभा टिकट से वंचित किए जाने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया और 17,000 वोटों के अंतर से भाजपा के उम्मीदवार मुरली मनोहर जोशी से चुनाव हार गए।

शालिनी यादव 1984 में वाराणसी से सांसद के रूप में चुने गए श्यामलाल यादव की बहू हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी ने वाराणसी में आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को 3.37 लाख वोटों से हराया था। 2014 में AAP के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले केजरीवाल 2 लाख वोट पाने में सफल रहे जबकि कांग्रेस केवल 7.3% मतों का प्रबंधन कर सकी थी और 2014 में सपा-बसपा का संयुक्त वोट प्रतिशत केवल 10.7% था।

वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र में 18.54 लाख मतदाता हैं जो रविवार को 1,819 मतदान केंद्रों पर अपने वोट डालेंगे, जिनमें से 273 केन्द्रों को संवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

मतदान प्रक्रिया के बारे में विवरण साझा करते हुए स्थानीय जिला मजिस्ट्रेट व रिटर्निंग अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने कहा, “प्रशासन ने 145 मॉडल बूथ और एक गुलाबी बूथ स्थापित किया है जो केवल महिलाओं द्वारा संचालित किया जाएगा।”

सिंह ने मतदाताओं से वाराणसी में वोट डालने के लिए बड़ी संख्या में आने की अपील की। 2014 में 58.35% वोटरों ने मतदान किया था।

वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं — रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी छावनी और सेवापुरी।

पिछली बार मोदी को कुल 56.37% वोट मिले थे जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का संयुक्त वोट शेयर 46.6% था।

पर 2009 में सपा और बसपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था और उनका संयुक्त वोट प्रतिशत 46.6 प्रतिशत था जो कि भाजपा के 30.5 से अधिक था जो भाजपा के जोशी को मिले थे।