वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ लड़ने को जगह-जगह से आए तरह-तरह के नमूने

वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ लड़ने को तत्पर कोई यह चाहता है कि ज़िन्दगी में कुछ कर गुज़रे तो कोई यह चाहता है कि लोगों को एक संदेश मिले

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वाराणसी

वाराणसी | कुछ दिनों तक सुर्ख़ियों में रहने के लिए हो या फिर सचमुच के विरोध के लिए, वाराणसी ने नरेंद्र मोदी से दो-दो हाथ करने के इच्छुक उम्मीदवारों की एक दिलचस्प लाइन लगी हुई है — तमिलनाडु के किसानों के एक समूह से लेकर अदालत की अवमानना ​​के लिए दोषी ठहराए गए एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और यहां तक ​​कि एक बर्खास्त बीएसएफ सिपाही कतार में खड़े हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज सीएस कर्णन हाल ही में इस लाइन में जुड़े हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा अवमानना ​​के लिए दोषी पाए जाने वाले पहले न्यायाधीश कर्णन भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ना चाहते हैं। उन्हें जून 2017 में छह महीने की जेल की सजा हुई थी।

तमिलनाडु के 63 वर्षीय पूर्व न्यायाधीश के लिए वाराणसी उनका दूसरा युद्ध का मैदान है। उन्होंने पहले ही मध्य चेन्नई लोकसभा सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। वह 2018 में उनके द्वारा बनाई गई एंटी-करप्शन डायनामिक पार्टी के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

वाराणसी ही क्यों?

वाराणसी को चुनने के लिए कर्णन के कारण बहुत स्पष्ट नहीं हैं। यहाँ उनकी कोई उपस्थिति नहीं है, कोई नेटवर्क या संगठन शक्ति नहीं है।

पीएम से मुलाकात करने का कारण पूछने पर उन्होंने कहा, “वाराणसी एक हाई-प्रोफाइल सीट है। मैं इसका जवानों के मुद्दों को उजागर करने के लिए एक मंच के रूप में उपयोग कर सकता हूं। मैं जीत नहीं सकता, लेकिन मैं एक संदेश भेजना चाहता हूं।”

वाराणसीइसके अलावा मोदी को चुनौती देने के लिए तमिलनाडु के किसानों का एक समूह है, जिन्होंने 2017 में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया था। तमिलनाडु के 111 किसानों के एक समूह और फ्लोरोसिस पीड़ित अंसला स्वामी वाराणसी में मोदी से लोहा लेने के लिए तैयार हैं। इस समूह का नेतृत्व पी अय्याकन्नू कर रहे हैं और महँगी गाड़ियों में घूमने वाले ये ‘ग़रीब किसान’ भी वाराणसी से लड़ेंगे।

कुछ और भी हैं, जैसे कि नलगोंडा (तेलंगाना) और प्रकाशम (आंध्र प्रदेश) के फ्लोरोसिस के शिकार जिनका नेतृत्व एक्टिविस्ट वड्डे श्रीनिवास और जलागम सुधीर कर रहे हैं। भूजल का फ्लोराइड संदूषण दो राज्यों में एक गंभीर मुद्दा है और उनका उद्देश्य है एक ऐसे मंच से इस बारे में बात करना जो देशवासियों के ध्यान का केंद्रबिंदु होगा।

कुछ वाराणसी से इसलिए खड़े हैं कि किसी उपेक्षित मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान जाए, कोई यह चाहता है कि ज़िन्दगी में कुछ कर गुज़रे तो कोई यह चाहता है कि लोगों को एक संदेश मिले — जैसे कि बीएसएफ के पूर्व कॉन्स्टेबल तेज बहादुर यादव चाहते हैं। यादव एक निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ना चाहते हैं।

वाराणसीवे पिछले साल तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने जवानों को परोसे गए “घटिया भोजन” की आलोचना करते हुए एक वीडियो अपलोड किया। जांच अदालत द्वारा उनके आरोपों को झूठा घोषित किए जाने के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

और अधिक हाई प्रोफाइल दावेदारों में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद हैं। 30 मार्च को वाराणसी में एक रोड शो का मंचन करने वाले आजाद ने घोषणा की कि “मोदी की हार की उलटी गिनती शुरू हो गई है”। उन्होंने अपने उग्र भाषणों के कारण दलित युवाओं को आकर्षित किया। उन्होंने तब भी ध्यान आकर्षित किया जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनसे मुलाकात की।

अन्य दिलचस्प उम्मीदवार विश्वंभर नाथ मिश्र हैं जो बीएचयू के प्रोफेसर हैं और वाराणसी में संकट मोचन मंदिर के महंत हैं, जो गंगा को साफ करने के लिए अभियान चला रहे हैं। हालांकि स्थानीय ख़बरों की मानें तो ये कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं, आधिकारिक तौर पर कुछ भी पुष्टि नहीं की गई है।

वाराणसी में 19 मई को मतदान होगा।