34.3 C
New Delhi
Wednesday 8 July 2020

उत्तर प्रदेश — फिर हुआ साधु पर हमला, चुप रही पुलिस, नहीं हुआ एफआईआर दर्ज

पीड़ित परिवार का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस पैसे लेकर मामले को निपटाने की कोशिश कर रही है और मुख्य अभियुक्त का नाम केस से निकाला जा रहा है

देश में लगातार साधुओं पर हमले हो रहे हैं। चाहे बात महाराष्ट्र के पालघर में दो संतों की हत्या की हो या नांदेड़ में साधु की हत्या की। यूपी के बुलंदशहर में सोमवार देर रात दो साधुओं की मंदिर परिसर में ही धारधार हथियार से हत्या कर दी गई। आज फिर से उत्तर प्रदेश की एक घटना सामने आई है। इस बार भी एक हनुमान मंदिर के पुजारी पर जानलेवा हत्या किया गया।

यह मामला 3 जून को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ के चरहुवा गांव में घटी। पुजारी अखंड प्रताप सिंह (82) जब शाम को मंदिर से अपने घर कुछ काम से आए तब उन्हें पता चला कि उनके पड़ोसी से कुछ कहासुनी हो गई थी। पुजारी ने पड़ोसी के पास जाकर झगड़े की वजह पूछी तो सबसे पहले अंकुर सिंह ने कथित तौर पर ईंट से उनपर हमला कर दिया। पुजारी अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि इसके बाद विवेक सिंह, अलोक प्रताप सिंह, वीरेंद्र सिंह और विजय प्रताप सिंह उनपर टूट पड़े। बीच बचाव के लिए जब अखंड सिंह का परिवार आया तो उनपर भी लाठी से हमला किया गया। अखंड प्रताप का सर फट गया। उनके कंधे पर चोट लगी, उंगली टूट गई।

हमले की वजह आपसी रंजिश बताई जा रही है। जब सिर्फ़ न्यूज़ ने अखंड प्रताप के परिजनों से बात की तब पता चला कि 2 जून को उनके पटीदार के यहाँ कुछ लोग पैसे लेने आये थे पर उन लोगों ने पैसे देने से मना कर दिया। दोनों गुटों में झड़प हुई और उसी दैरान अखंड सिंह का परिवार झगड़ा छुड़ाने पहुँचे। पर उन्हें नहीं पता था कि अब उन्हीं पर मुसीबत आ जाएगी।

इसे भी पढ़े: योगी सरकार 11.50 लाख प्रवासी श्रमिकों को उपलब्ध कराएगी रोजगार

जब मामला दीदारगंज पुलिस चौकी में पहुंचा तो एसो धर्मेंद्र सिंह छुट्टी पर थे, उनकी जगह जावेद अख्तर चौकी की देख-रेख कर रहे थे। पीड़ित परिवार के अनुसार जावेद अख्तर ने एफ़आईआर दर्ज नहीं किया। उन्होंने अखंड प्रताप को सुलह करने के लिए कहा और जब अखंड प्रताप नहीं माने तब वहां के हेड क्लर्क महेश सिंह दिवान ने उन्हें अपने कमरे में ले जाकर मामले को रफ़ा-दफ़ा करने का सुझाव दिया। लेकिन अखंड प्रताप अपने बात पर अड़े रहे।

तब पुलिस ने उन्हें मेडिकल जाँच के लिए भेजा। पर मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी भी अखंड सिंह को नहीं मिली।

पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस आरोपियों से पैसे लेकर मामले को रफ़ा-दफ़ा करने की कोशिश कर रही है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी अंकुर सिंह का नाम केस से निकाला जा रहा है। उन्होंने सिर्फ़ न्यूज़ को बताया कि अंकुर सिंह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है और अगर उसके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हुआ तो उसका करियर ख़राब हो सकता है, इसलिए पुलिस को पैसे देकर उसका नाम हटवा रहे हैं।

इसे भी पढ़े: बुलंदशहर में मंदिर परिसर में सो रहे दो साधुओं की हत्या

सिर्फ़ न्यूज़ ने जब दीदारगंज के पुलिसकर्मी जावेद अख्तर से बात की तब पहले उन्होंने कहा ‘मुझे कुछ नहीं पता, आप एसओ साहब से बात करिए’। जावेद अख्तर ने हमारे संवादाता से बहुत ही बत्तमीजी से बात की। जब उन्हें बताया गया कि बात मीडिया में आएगी तब उन्होंने कहा कि अखंड प्रताप द्वारा उक्साने के कारण यह हमला हुआ। जब उनसे पूछा गया कि किसने अर्ज़ी दी तो जावेद अख्तर को नाम तक याद नहीं आया। अखंड प्रताप के वीडियो का उल्लेख करने पर जावेद अख्तर ने फ़ोन काट दिया।

जावेद अख्तर से बात-चीत

सवाल यह उठता है कि

बिना जांच पड़ताल किए जावेद अख्तर ने अखंड सिंह पर आरोप कैसे लगा दिया? जावेद अख्तर ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? पीड़ित परिवार को अखंड सिंह का मेडिकल रिपोर्ट क्यों नहीं दिया गया? कब तक साधुओं पर जानलेवा हमले होते रहेंगे? क्या यह सच है कि पुलिस ने पीड़ित परिवार पर केस वापस लेने के लिए दबाव डाला? दोषियों को बिना जांच-पड़ताल किये कैसे छोड़ दिया गया?
कब मिलेगा पुजारी अखंड प्रताप सिंह और समूचे साधु समाज को न्याय?

Follow Sirf News on social media:

For fearless journalism

%d bloggers like this: