Monday 24 January 2022
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यूएस की धमकी – नाटो के रडार पर है चीन

हचिसन ने कहा, यूएस इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि वह चीन को वैश्विक व्यवस्था में साझीदार बनाना चाहता है और चीन ने बौद्धिक संपदा की चोरी की है

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन में यूएस की एक शीर्ष दूत ने कहा है कि चीन नाटो सेनाओं के रडार पर है और उसके हर कदम पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। नाटो में यूएस की स्थायी प्रतिनिधि के बैली हचिसन ने कहा कि चीन अपने आक्रामक रवैये के चलते नाटो के रडार पर आया है और इससे पहले संगठन ने कभी उसे इतना बड़ा खतरा नहीं माना था। एक प्रभावशाली अमेरिकी थिंक-टैंक ने चेतावनी दी है कि चीन का आगला निशाना भारत-यूएस के बीच संबंधों को बिगाड़ना है, इसे लेकर दोनों देशों को सतर्क रहना होगा।

बैली हचिसन ने कहा, ‘चीन एक शांतिपूर्ण साझीदार, एक अच्छा व्यापार सहयोगी हो सकता था, लेकिन वह इस समय ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है। मुझे लगता है कि नाटो सहयोगी इस पर नजर रख रहे हैं और इस बात का आकलन कर रहे हैं कि चीन क्या कर रहा है।’ हचिसन ने ताइवान, जापान और भारत के खिलाफ चीन के आक्रामक एवं उकसाने वाले कदमों पर कहा, ‘वह हमारी रडार पर है और मुझे लगता है कि ऐसा होना चाहिए क्योंकि हमें जोखिम का आकलन करना चाहिए। हमें सबसे अच्छा होने की उम्मीद करनी चाहिए, लेकिन सबसे खराब के लिए तैयार रहना चाहिए।’ सैन्य संघर्ष का खतरा निकट है, उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि नाटो इस मामले में अब पूर्व की ओर देख रहा है।’

हचिसन ने कहा कि नाटो इस बात को लेकर चिंतित है कि चीन का इरादा क्या है। उन्होंने कहा कि यूएस इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि वह चीन को वैश्विक व्यवस्था में साझीदार बनाना चाहता है और चीन ने बौद्धिक संपदा की चोरी की है और विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं विश्व की अदालतों द्वारा तय शुल्कों एवं सब्सिडी का उल्लंघन किया है। उन्होंने 5 जी नेटवर्क के बारे में कहा, ‘हम हमारे संचार को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं और देख रहे हैं कि हमारे कुछ चीनी प्रतिद्वंद्वी संचार प्रदाताओं द्वारा तैयार किए गए संविदात्मक दायित्वों को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं हैं।

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लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के बीच एक प्रभावशाली अमेरिकी थिंक-टैंक ने कहा है कि चीन का ‘तत्काल लक्ष्य’ दक्षिण एशिया में भारत की हर प्रकार की ‘चुनौती’ को सीमित करना और यूएस के साथ उसके तेजी से मजबूत होते संबंधों को बाधित करना है। हडसन इंस्टीट्यूट की ‘कोरोनावायरस काल में यूएस और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता का वैश्विक सर्वेक्षण’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की पाकिस्तान के साथ मजबूत साझीदारी और श्रीलंका के साथ मजबूत संबंध क्षेत्र में प्रभुत्व की चीन की योजनाओं के लिए अहम है।

‘भारत परम्परागत रूप से चीन को अपने से उच्च समझने के बजाए समान समझता है और वह बीजिंग के लक्ष्यों को लेकर सचेत है एवं अपने क्षेत्र में चीन के घुसने की कोशिशों को संदेह से देखता है। चीन के साथ क्षेत्र को लेकर विवाद के कारण संबंधों में तनाव पैदा हुआ है। इससे सहयोगात्मक माहौल के बजाए प्रतिद्वंद्वी माहौल पैदा होता है।’ भारत को अमेरिका और जापान जैसे सहयोगियों की मदद की आवश्यकता है। इसमें कहा गया है कि यदि यूएस चाहता है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता के तौर पर भूमिका निभाए और यदि वह चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है, तो भारत की आर्थिक एवं सैन्य क्षमताएं विकसित करना अहम होगा।

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जापान और भारत के खिलाफ चीन के आक्रामक व्यवहार और उकसावे वाली हरकतों पर कहा, “यह हमारे रडार पर बहुत अधिक है और मुझे लगता है कि हमें जोखिम का आंकलन करना चाहिए. सबसे अच्छे के लिए उम्मीद करनी चाहिए लेकिन सबसे बुरे के लिए तैयार भी रहना चाहिए।” क्या वास्तविक सैन्य टकराव का खतरा आगे दिख रहा है, इस पर हचिसन ने कहा, “मुझे लगता है कि नाटो अब पूर्व की ओर देख रहा है।”

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