कश्मीर मुद्दा — पाकिस्तान मुश्ताक़, संयुक्त राष्ट्र बेज़ार

कश्मीर के विषय पर होने वाली बन्द कमरे की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में शामिल होने से पहले रूसी प्रतिनिधि ने कहा 'आप हमारी राय से अवगत हैं और यह अनौपचारिक प्रक्रिया है जिसके अंत में कोई घोषणा नहीं होगी'

संयुक्त राष्ट्र | पाकिस्तान की काफ़ी मन्नतों के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक असामान्य बंद-दरवाजा बैठक शुरू तो कर दी, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है।यूएनएससी बैठक के परिणाम स्वरूप कोई औपचारिक घोषणा नहीं होगी क्योंकि यह परामर्श अनौपचारिक है। भारत और पाकिस्तान बैठक में भाग नहीं ले रहे हैं। बैठक केवल पांच स्थायी सदस्यों और 10 गैर-स्थायी सदस्यों के लिए खुला है।

UNSC के एक स्थायी सदस्य और पाकिस्तान के करीबी चीन ने परिषद में “बंद-दरवाज़ा परामर्श” के लिए कहा था, सो सुरक्षा परिषद परामर्श कक्ष में सुबह 10 बजे (7:30 बजे भारतीय समय) अपने विचार-विमर्श शुरू किए।

5 अगस्त को भारत ने जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जा को दरवाज़े का रास्ता दिखते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 को बेमानी कर दिया, और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। भारत के फैसले की प्रतिक्रिया में इस्लामाबाद ने नई दिल्ली के साथ राजनयिक संबंधों को डाउनग्रेड करने का फैसला करने के बाद भारतीय उच्चायुक्त को निष्कासित कर दिया।

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से कहा है कि जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने का उसका कदम एक आंतरिक मामला है। भारत ने साथ ही पाकिस्तान को वास्तविकता स्वीकार करने की सलाह दी है।

रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलांस्की ने बैठक कक्ष में प्रवेश करने से पहले संवाददाताओं से कहा कि मॉस्को का विचार है कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक “द्विपक्षीय मुद्दा” है।उन्होंने कहा कि यह समझने के लिए बैठक की जा रही है कि क्या हो रहा है।

“यही कारण है कि परामर्श के लिए गुप्त बैठक का मार्ग तय हुआ। रूस को क्या लगता है कि अगला कदम होना चाहिए कि हम भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता की पेशकश करें।  आप रूस की राय जानते हैं जो नहीं बदला है। आज बन्द कमरे के परामर्श मेें हम सिर्फ राय का आदान-प्रदान करेंगे। देखें कि हम क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते। यह एक सामान्य प्रक्रिया है,” पोलांस्की ने कहा।

यह पूछे जाने पर कि क्या रूस भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण स्थिति पर चिंतित है, पोलांस्की ने कहा, “हम बहुत चिंतित हैं। हम तनाव से बचने की उम्मीद करते हैं।”

यह पूछे जाने पर कि क्या परिषद एक उपयोगी भूमिका निभा सकती है, पोलांस्की ने जवाब दिया, “हमें पहले चर्चा करने की आवश्यकता है और फिर हम देखेंगे।” एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, “कभी-कभी इस तरह के मुद्दे को नहीं छेड़ना बेहतर होता है। यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है।”

यह महत्वपूर्ण है कि सुरक्षा परिषद के चेंबर में घोड़े की नाल के आकार की मेज़ के गिर्द सदस्य देशों के प्रतिनिधि नहीं बैठे हैं जैसा कि औपचारिक बैठक में होता है। कूटनीतिक सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान के इरादों को झटका देते हुए, परिषद को दिए गए अपने पत्र पर परामर्श बंद दरवाज़े के पीछे किया जा रहा है और यह एक आमूल अनौपचारिक प्रक्रिया है जिसके बाद औपचारिक घोषणा की संभावना नहीं है।

UNSC को लिखे पत्र में पाकिस्तान ने अनुरोध किया था कि उसके प्रतिनिधि को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के संबंधित प्रावधानों के अनुसार और सुरक्षा परिषद की प्रक्रिया के अनंतिम नियमों के 37 नियमों के अनुसार बैठक में भाग लेने की अनुमति दी जाए। लेकिन पाकिस्तान के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार पिछली बार “सुरक्षा परिषद ने जम्मू और कश्मीर के क्षेत्रों पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद को संबोधित किया था” जो एजेंडा आइटम ‘द इंडिया-पाकिस्तान प्रश्न’ के तहत 1965 में था। परिषद के कार्यक्रम में कहा गया, “सुरक्षा परिषद परामर्श (बंद) भारत/पाकिस्तान”, सुबह 10 बजे के लिए सूचिबद्ध।

सूत्रों ने बताया कि चूंकि यह एक परामर्श है, इसका कोई भी परिणाम आने वाला नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र के एक राजनयिक ने बताया कि चीन ने सुरक्षा परिषद के एजेंडा आइटम ‘इंडिया पाकिस्तान क्वेस्चन’ पर बंद परामर्श के लिए कहा था। राजनयिक ने कहा, “यह अनुरोध सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जोआना रोनक्का के पाकिस्तानी पत्र के संदर्भ में था।” अगस्त महीने के लिए पोलैंड सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है जो अलग से पाकिस्तान की गुहार को ठुकरा चुका है।

यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य हैं चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका। 10 अस्थायी सदस्य हैं बेल्जियम, कोटे डी आइवर, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत और पाकिस्तान से “अधिकतम संयम” बरतने और जम्मू-कश्मीर की स्थिति को प्रभावित करने वाले क़दम उठाने से परहेज़ करने का आग्रह किया है। उन्होंने शिमला समझौते पर प्रकाश डाला जो इस मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को ख़ारिज करता है।

विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से यूएनएससी की एक आपात बैठक बुलाकर भारत को जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जा देने पर चर्चा की। पिछले शुक्रवार को क़ुरैशी ने UNSC में कश्मीर मुद्दे को उठाने के मुद्दे पर चीनी नेतृत्व के साथ तत्काल विचार-विमर्श के लिए बीजिंग को हवा दी थी।

सोमवार को बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ अपनी बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के निर्णय के बारे में बताया जिसके अनुसार जम्मू, कश्मीर और लद्दाख भारत के आन्तरिक मामले हैं और पाकिस्तान को यदि इस पर भारत के साथ कोई चर्चा करने को इच्छुक हो तो उसे किसी मध्यस्थता करने की इच्छा रखने वाले देश को बीच में लाने की अनुमति नहीं है।

सिर्फ़ न्यूज़ के आंकलन के अनुसार चीन अभी हांग कांग के लोकतंत्रवादी जनता से त्रस्त है। भारत इस विषय को लोकतंत्र की खातिर अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर न उठाए इसके लिए चीन ऐक्टिविस्ट्स को आतंकवादी बता सकता है और फिर तियानानमेन स्क्वैयर की तरह एक बार फिर क़त्ल ए आम द्वारा आन्दोलन को कुचलने की कोशिश कर सकता है।

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