Wednesday 21 October 2020

मूर्तियों की जंगल में पुनर्स्थापना की मांग, आदिवासियों का प्रार्थना-स्वरूप विरोध प्रदर्शन

मूर्तियों की पुनर्स्थापना और डीएफ़ओ, रेंजर और अन्य वन कर्मियों के विरुद्ध एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामले दर्ज करके कार्रवाई शुरू करने की मांग करते हुए यहाँ के पूर्व विधायक ने भी प्रार्थना की

हसनूर में अरापालयम जंक्शन में पिसिल मरियम्मन मंदिर से मूर्तियों को हटाने के विरुद्ध वन विभाग की निंदा करते हुए तमिलनाडु ट्राइबल पीपल एसोसिएशन के सदस्यों ने 19 अक्टूबर को मंदिर परिसर में प्रार्थना करने का निर्णय लिया है। यहाँ आदिवासियों के इष्ट देव शिव हैं और उन्होंने महादेव की पूजा हेतु इस स्थान पर एक लिंग की स्थापना की थी जिसे वन विभाग के कर्मचारियों ने कल ट्रक से खिंचवाकर हटा दिया था। वैसे वामपंथियों की मानें तो देश के आदिवासी हिन्दू नहीं है बल्कि उनके देवी-देवता हिन्दू देवी-देवताओं से पृथक हैं और इसलिए हटाई गई प्रमुख मूर्ति को शिवलिंग नहीं कह सकते!

मंदिर सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व (एसटीआर) के हसनूर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्र के अंदर स्थित है। 13 अक्टूबर को वन कर्मियों ने मंदिर से प्रत्येक मूर्ति को हटाने का प्रयास किया, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया हालांकि अधिकारियों ने अपने वाहनों में मूर्तियों को यह कहते हुए रख लिया कि वन क्षेत्रों में खुले में रखी गई मूर्तियों को हटा दिया जाएगा।

इससे स्थानीय समुदाय ने कड़ा विरोध जताया। एसोसिएशन के ज़िला संयोजक एस मोहन कुमार ने कहा कि एसटीआर और आदिवासी लोगों के वन क्षेत्रों के अंदर 268 मंदिर थे और ये कई शताब्दियों से यहीं प्रार्थना कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘इन मंदिरों में परिसर की दीवारें या टावर नहीं हैं और खुले में देवताओं या पत्थरों की मूर्तियों के साथ स्थित हैं।’

सत्यमंगलम वन क्षेत्रों को बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किए जाने के बाद विभाग आदिवासी लोगों के पारंपरिक अधिकारों से मना कर रहा था। ‘वन अधिकारियों ने विरोध के बावजूद एक रस्सी को लिंग से बांध दिया और एक वाहन की मदद से खींच लिया,’ मोहन कुमार ने कहा कि लोगों को वन क्षेत्रों में स्थित मंदिरों को स्थानांतरित करने के लिए कहा गया था।

वन अधिकार अधिनियम 2006 ने आदिवासी लोगों को वन क्षेत्रों के अंदर स्थित मंदिरों में प्रार्थना करने का अधिकार दिया। मोहन कुमार ने कहा, ‘लेकिन हसनूर वन प्रभाग के अधिकारियों ने कानून के खिलाफ काम किया है। उन्होंने बताया कि उनका अधिनियम अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम, 1989 के तहत एक अपराध है, इसलिए मूर्तियों की पुनर्स्थापना और हसनूर डीएफओ, हसनूर रेंजर और अन्य वन कर्मियों के विरुद्ध एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामले दर्ज करके कार्रवाई शुरू करने की मांग करते हुए पूर्व विधायक पीएल सुंदरम ने मंदिर में प्रार्थना की।

पूछे जाने पर मोहन कुमार ने आदिवासियों के बारे में वामपंथी मत को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि उनका समुदाय हिन्दू है और विस्थापित मूर्ति शिवलिंग ही है।

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