बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून 1988 में संशोधन हुए डेढ़ साल का समय बीत चुका है। उम्मीद की जा रही थी कि सरकार इस कानून के तहत शीघ्र ही कड़े कदमों की घोषणा करेगी, जिससे देश में बेनामी संपत्ति बनाकर बेईमानी करने वाले लोगों पर शिकंजा कसा जा सके। लेकिन, डेढ़ साल बीतने के बाद भी जब केंद्र सरकार की ओर से जुडिशल अथॉरिटी के गठन का ऐलान नहीं हुआ, तो लगने लगा था कि एनडीए सरकार भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की तरह ही बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून को ठंडे बस्ते में ही रखना चाहती है। लेकिन, अब बेनामी संपत्ति की जानकारी देने पर 5 करोड़ रुपये तक का इनाम देने की घोषणा करके सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बेईमानों को नहीं छोड़ेगी। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है यदि कोई व्यक्ति बेनामी प्रोहिबिशन यूनिट्स में किसी बेनामी संपत्ति के बारे में ठोस जानकारी देता है तो उसे 5 करोड़ रुपये तक का इनाम दिया जाएगा। यह राशि उसे बेनामी ट्रांजैक्शन इंफॉर्मेंट्स रिवार्ड स्कीम-2018 के तहत दी जाएगी। साथ ही सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को गुप्त रखा जाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बेनामी संपत्ति की जानकारी देने वालों को इनाम देने की घोषणा करने के साथ ही टैक्स चोरी की जानकारी देने वालों को भी इनाम देने का घोषणा किया है। अब टैक्स चोरी के मामलों को उजागर करने के लिए भी 50 लाख रुपये तक की इनामी राशि दी जाएगी। साफ है कि केंद्र सरकार अब काला धन रखने वालों के प्रति और सख्त कदम उठाने जा रही है। केंद्र की ओर से किया गया यह ऐलान भले ही देर से आया है, लेकिन इससे उम्मीद की एक किरण भी बंधी है। लेकिन, इसके साथ ही केंद्र सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून 1988 में जो संशोधन किया गया है उसके तहत तीन सदस्यीय जुडिशल अथॉरिटी का तत्काल गठन किया जाना जरूरी है। इस अथॉरिटी का गठन नहीं हो पाने की वजह से ही करोड़ों रुपये मूल्य की 780 से अधिक परिसंपत्तियों के कुर्की की कार्रवाई से मुक्त हो जाने की आशंका बन गयी हथॉरिटी आयकर विभाग द्वारा इस कानून के तहत की जाने वाली कुर्की की वैधता का फैसला करेगी। विभाग अभी तक करोड़ों रुपये की परिसंपत्तियों को कुर्की की कार्रवाई के तहत जब्त कर चुका है, लेकिन उसकी ये कार्रवाई वैध है या नहीं, इसका फैसला करने के लिए अभी तक कानून सम्मत अथॉरिटी का गठन नहीं हुआ है।

फौरी तौर पर अभी इस काम की जिम्मेदारी मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून की निर्णायक अथॉरिटी को दिया गया है, लेकिन ये अथॉरिटी खुद ही काम के बोझ से दबी पड़ी है और उसके लिए बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून के तहत हुई जब्ती की कार्रवाई की वैधता पर फैसला देने के लिए समय निकाल पाना कठिन हो रहा है। इसके साथ ही एक बड़ी परेशानी ये भी है कि बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून में जिस जुडिशल अथॉरिटी का गठन करने की बात कही गयी है, वो अथॉरिटी मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून की निर्णायक अथॉरिटी से अलग शक्तियों वाली होगी। ऐसे में यदि मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून की निर्णायक अथॉरिटी कुर्की की कार्रवाई के तहत जब्त की गई परिसंपत्तियों के बारे में कोई फैसला ले भी लेती है, तो उसे कानूनी तौर पर ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है। आयकर विभाग अभी तक 860 से अधिक मामलों को निर्णायक अथॉरिटी के पास भेज चुका है, लेकिन पहले ही काम के बोझ से परेशान निर्णायक अथॉरिटी महज 80 मामलों पर ही फैसला दे सकी है। शेष 780 से अधिक मामले अभी भी लंबित पड़े हुए हैं। इन मामलों में कई वीआईपी मामले भी हैं और उनसे कुछ बड़े नेताओं और कुछ आला अधिकारियों की संपत्तियां जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही एक परेशानी ये भी है कि मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून की निर्णायक अथॉरिटी काम के बोझ के साथ ही कर्मचारियों के रिक्त पदों की वजह से भी परेशान है। ऐसे में इस अथॉरिटी को 780 से अधिक मामलों पर फैसला लेने में कितना समय लगेगा, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। बड़ी बात तो ये भी है कि अगर बेनामी संपत्ति के मामले में सरकार जल्द ही कुर्की की कार्रवाई की वैधता को लेकर फैसला नहीं करा पाती है, तो ये बात खुद सरकार के लिए भी शर्मिंदगी का की एक वजह बन सकती है। मौजूदा सरकार काले धन के समाप्ति पर शुरू से ही जोर देती रही है। सरकार ने समय-समय पर लगातार काले धन पर काबू पाने के इरादे से कई कड़े कदमों का ऐलान भी किया है और उनपर काम भी हो रहा है। निश्चित रूप से सरकार को कई मामलों में सफलता भी मिली है। ऐसे में अगर बेनामी संपत्तियों की कुर्की की वैधता पर समय से फैसला नहीं हो पाता है तो इससे सरकार की ही आलोचना होगी और बेईमानों के खिलाफ उठाए जाने वाले उसके कदमों को करारा झटका लगेगा।

1 नवंबर 2016 को जब केंद्र सरकार ने बेनामी संपत्ति कानून 1988 में संशोधन कर उसे और सख्त बनाया था, तो माना जा रहा था कि सरकार का यह कदम काला धन रखने वालों के खिलाफ एक सख्त कदम साबित होगा। इस कानून में संशोधन होने के एक हफ्ते बाद ही केंद्र सरकार ने नोटबंदी का ऐलान किया था। नोटबंदी से आम जनता को थोड़ी परेशानी तो जरूर हुई, लेकिन काला धन रखने वालों की तिजोरी में फंसा पैसा सर्कुलेशन में आ गया। इससे बाजार में नगदी की उपलब्धता तो बढ़ी ही, टैक्स के रूप में सरकार को भी अच्छी आमदनी हुई। अब काले धन के खिलाफ अपने अभियान में सरकार बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून के तहत जुडिशल अथॉरिटी का गठन कर बेनामी संपत्ति रखने वालों के खिलाफ कड़ा कदम उठा सकती है। यदि सरकार इस दिशा में जल्द ही ठोस कार्रवाई करने में सफल रही, तो देश के बेईमानों के लिए यह कदम एक बड़ा झटका साबित होगा। अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार ने देर से ही सही, लेकिन बेनामी संपत्ति रखने वालों की पहचान हासिल करने के लिए इनामी रकम का ऐलान कर दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब सक्षम अधिकारियों तक बेनामी संपत्तियों के बारे में अधिक ठोस जानकारी पहुंच सकेगी, ताकि उन संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की जा सके। लेकिन इस क्रम में इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि बात सिर्फ संपत्तियों को जब्त करने से ही नहीं बनने वाली है, उन संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई की वैधता पर भी समय रहते सक्षम प्राधिकार द्वारा फैसला किया जाना जरूरी है। ऐसा करके ही देश के बेईमानों पर कड़ा प्रहार किया जा सकता है। ऐसा करने से यहां देश के खजाने में बढ़ोतरी होगी, वही बेईमानी करने वालों के हौसले भी टूटेंगे।