Sunday 28 February 2021
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बंगाल में अस्थाई मज़दूरों ने ममता सरकार के विरुद्ध खोला मोर्चा

गुसाए श्रमिकों ने स्टेडियम के बाहर लगे ममता की पोस्टर और बैनर को फाड़ डाला और बंगाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर प्रदर्शन किया

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Politics India बंगाल में अस्थाई मज़दूरों ने ममता सरकार के विरुद्ध खोला मोर्चा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ममता सरकार द्वारा लागू किया गया योजना सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत काम करने वाले अस्थाई श्रमिक अब उनके लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर सामने आ गए हैं। ममता सरकार द्वारा चलाई जा रही सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले हजारों अस्थाई श्रमिकों ने बकाया वेतन नही मिलने को लेकर 28 दिसंबर की शाम को कोलकाता के इंडोर स्टेडियम में जमकर बवाल किया। मज़दूरों का आरोप है किलॉकडाउन के समय से ही राज्य सरकार के अधीन कार्य कर रहे एसएलओ का वेतन बंद हो गया था। जिसकी वो लगातार मांग कर रहे थे।

उन्हीं मांगों को लेकर कोलकाता के इंडोर स्टेडियम में श्रम एंव कानून मंत्री मलय घटक, नगर विकाश मंत्री फ़िरहाद हकीम और साधन पाण्डेय के नेतृत्व में एक बैठक चल रही थी। इस बैठक में श्रमिकों के प्रति कोई फैसला नही होने से नाराज श्रमिकों ने कार्यक्रम के दौरान ही वबाल खड़ा कर दिया। कार्यक्रम में झमेला होता देख सभी मंत्रियों को कार्यक्रम से छोड़कर जाना पड़ा। क्रोधित श्रमिकों ने स्टेडियम के बाहर लगे ममता के पोस्टर्स और बैनर्स को फाड़ डाला और बंगाल सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलते हुए जमकर प्रदर्शन किया। घटना के बाद से तनावपूर्ण स्थिति बन गई। जिसको देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात की गई।

बंगाल में अस्थाई मज़दूरों ने ममता सरकार के विरुद्ध खोला मोर्चा

राज्य के वरिष्ठ मंत्री शोभन देव चट्टोपाध्याय ने कहा कि श्रम विभाग की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है जिसके लिए श्रम विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं; उनके कारण ही इनका डाटा मिट गया। जिसके कारण इन लोगों को महीनों से कमीशन का भुगतान नहीं हो रहा है, जिसके कारण का आक्रोश फूट पड़ा।

इस घटना के कारण घटनास्थल पर हालात बेक़ाबू हो गए जिसके मद्देनज़र भारी पुलिसबल तैनात कर दिया गया। फ़िलहाल अस्थाई श्रमिकों के वेतन के मुद्दे पर ममता सरकार कोई समाधान नहीं निकाल पाई है। राज्य के वरिष्ठ मंत्री शोभन देव चट्टोपाध्याय ने कहा कि श्रम विभाग की लापरवाही के कारण यह हालात बने हैं।

शोभन देव ने इसके लिए राज्य के श्रम विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के अधिकारियों के कारण ही इन अस्थाई श्रमिकों का डाटा मिट गया, जिस कारण इन लोगों को महीनों से कमीशन का भुगतान नहीं हो रहा है।

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