Thursday 21 January 2021
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त्राहिमाम करते टेलिकॉम उद्योग ने बढ़ाया शुल्क, भाग गए ग्राहक

सबसे ज़्यादा नुकसान वोडाफ़ोन-आइडिया को हुआ जिसने टेलिकॉम बाज़ार में ३६ लाख से अधिक ग्राहक खो दिए; एयरटेल और यहाँ तक कि जिओ को भी क्षति पहुँची है

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Economy Business त्राहिमाम करते टेलिकॉम उद्योग ने बढ़ाया शुल्क, भाग गए ग्राहक

AGR सरीखे टैक्स से बदहाल टेलिकॉम कंपनियों ने जैसे ही अपनी सेवाओं के दाम बढाए, उन्हें पता चल गया कि उनके ग्राहक सेवा दरों के मामले में कितने संवेदनशील हैं हालांकि दिसंबर में टैरिफ बढ़ोतरी ने दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए बेहतर वित्तीय प्रदर्शन किया था। साल 2016 के लॉन्च के बाद पहली बार रिलायंस जियो ने अपने हर महीने 8 मिलियन ग्राहकों के औसत जोड़ की तुलना में 82,308 ग्राहकों की शुद्ध वृद्धि दर्ज की। भारती एयरटेल ने 11,050 ग्राहक खो दिए जबकि वोडाफोन-आइडिया 36 लाख उपभोक्ताओं से हाथ दो बैठा।

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में वायरलेस टेलीकॉम सब्सक्राइबर बेस 28.8 मिलियन घट गया। इस नुकसान में सबसे आगे वोडाफोन आइडिया रहा, जिसे नवंबर के दौरान 36 लाख से कहीं अधिक ग्राहक खोना पड़ा।

टेलिकॉम बाज़ार के वायरलेस सेगमेंट में सभी श्रेणियों के सर्कल ने दिसंबर के महीने के दौरान अपने ग्राहकों में मासिक गिरावट दर दिखाई। सालाना आधार पर केवल मेट्रो सर्कलों ने अपने वायरलेस ग्राहकों की संख्या में वृद्धि दर्ज की।

अक्टूबर के महीने के दौरान Jio ने नेटवर्क के बाहर कॉल के लिए शुल्क बढाया। Reliance Jio मोबाइल फोन ग्राहकों को एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे किसी भी गैर-Jio मोबाइल नंबर पर आउटगोइंग वॉयस कॉल करने के लिए टॉप-अप वाउचर खरीदने की आवश्यकता थी।

वोडाफोन आइडिया के सूत्रों ने पुष्टि की कि अचानक डुबकी लगी थी क्योंकि कंपनी ने सक्रिय ग्राहक की रिकॉर्डिंग की समय अवधि को 120 दिन से घटाकर 90 दिन कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि अगर यह समान अवधि होती तो दिसंबर के अंत में कम संख्या आ जाती। इसलिए नए रिपोर्टिंग प्रारूप के बाद 3.6 मिलियन की हानि संख्या का विस्तार है।

दिसंबर 2019 के अंत तक भारत में टेलीफोन उपभोक्ताओं की संख्या 11,758.8 लाख से घटकर नवम्बर 2019 से 11,724.4 लाख हो गई, यानी 0.29% मासिक गिरावट दर देखी गई।

दिसंबर 2019 के अंत में कुल टेलीफोन उपभोक्ताओं में ग्रामीण और शहरी ग्राहकों की हिस्सेदारी क्रमशः 43.50% और 56.50% थी। दिसंबर के अंत में शहरी क्षेत्रों में वायरलेस टेलिकॉम सदस्यता में 33.6 लाख की गिरावट आई हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस सदस्यता कम दर से बढ़ी।

जम्मू और कश्मीर सेवा क्षेत्र ने महीने के दौरान अपने वायरलेस सब्सक्राइबर में 4.99% की अधिकतम वृद्धि दर्ज की क्योंकि क्षेत्र में दूरसंचार सेवाएं बंद होने के कुछ महीनों के बाद सामान्य स्थिति में आ गईं थी।

रिलायंस जियो अभी भी भारत में अग्रणी टेलिकॉम ऑपरेटर है, जिसके बाद वोडाफोन-आइडिया 28.89% और भारती-एयरटेल के पास 28.43% ग्राहक हैं। बीएसएनएल भारत की चौथी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी है जिसकी बाजार हिस्सेदारी 10.26% है।

टेलिकॉम उद्योग को सरकारी राहत?

भारी नुकसान झेलते टेलिकॉम कंपनियों से एजीआर मामले में सेल्फ एसेसमेंट की पुष्टि करने वाले दस्तावेज जमा करने को कहा गया है। इधर टेलिकॉम विभाग ने ऑइल और गैस सेक्टर की सरकारी कंपनी GAIL इंडिया से 2017-18 के लिए 7,608 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने को कहा है पर टेलिकॉम विभाग फिलहाल एजीआर मामले में पुरानी देनदारी को चुकाने के लिए दबाव नहीं डाल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक़ भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज से उनके एजीआर के सेल्फ एसेसमेंट के दावों की पुष्टि के एवज में दस्तावेज जमा करने के लिए कहा गया है। इन कंपनियों का कहना है कि AGR के मामले में टेलिकॉम विभाग ने जो आँकलन किया है वह सही नहीं है। उनके आँकलन के अनुसार उन पर AGR की देनदारी कम बनती है।

GAIL से अब जो बकाया चुकाने को कहा गया है उसमें विलंब से भुगतान का जुर्माना भी शामिल है।

विभाग के अनुसार AGR के मामले भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों पर बकाया लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम प्रयोग शुल्क के रूप में 1.47 लाख करोड़ रुपये की देनदारी बनती है। गेल के संदर्भ में टेलिकॉम ‌विभाग ने कहा है कि आईपी-दो लाइसेंस के सालाना शुल्क के रूप में 1,83,076 करोड़ रुपये का बकाया बनता है। मगर इस मामले में गेल और अन्य गैर टेलिकॉम कंपनियों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का अक्टूबर, 2019 का फैसला उनपर लागू नहीं होता।

इस बारे में इन कंपनियों ने स्थिति साफ करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी को टेलिकॉम कंपनियों की भुगतान में छूट की याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने गैर दूरसंचार कंपनियों से कहा था कि वह इस बारे में उपयुक्त मंच के पास जाएं। अब इस मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय, कानून मंत्रालय के साथ आईटी मंत्रालय से बातचीत कर रहा है।

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