Sunday 25 October 2020
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एक ग़ज़ल ایک غزل

मुझ पे इल्ज़ामे-मैपरस्ती है क्या करूँ अब जो दिल में खिंचती है आतिशें चांदनी बरसती हैं इश्क़ नौहागिरों1 की बसती है क्या सुकूँ को क़रार आएगा बेक़रारी जो दिल...

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