Wednesday 19 January 2022
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Tag: film review

अतरंगी रे अपनी ही भूलभुलैया में उलझी

ज़ीरो के बाद अब अतरंगी रे भी चमकते सितारे और बड़े मैदान की लड़खड़ाहट का उदाहरण है। क्यों इनसे शाहरुख़, अक्षय आदि के स्टारडम का बोझ नहीं उठाया जाता?

सरदार उधम सिंह — विक्की कौशल ने फिर जीता दिल

फिल्म की लोकेशंस, सैट डिजाइनिंग, कॉस्ट्यूम, कैमरा आदि सब अद्भुत हैं, 1940 के वक्त का लंदन कैसे रचा गया होगा, कितनी मेहनत लगी होगी, यह देखना दिलचस्प है

शिद्दत की खुमारी चढ़ती हौले-हौले

बावजूद कुछ कमियों के यह फिल्म खराब कत्तई नहीं है, यह न सिर्फ शिद्दत वाले प्यार को दिखाती है बल्कि उसे महसूस भी करवाती है

निर्मल आनंद की पपी कुछ ख़ास है

फिल्म की एक खासियत इसका कैमरावर्क भी है जो भव्य नहीं है लेकिन आपको बांधे रखता है, कुछ इस तरह से, कि कई जगह तो आप खुद को फिल्म का ही कोई किरदार समझने लगते हैं

चेहरे जो भीड़ में कुछ अलग दिखते हैं

अमिताभ बच्चन अपनी भारी आवाज़ और भव्य व्यक्तित्व के साथ हावी रहते हैं, उनकी संवाद अदायगी के उतार-चढ़ाव बेहद प्रभावशाली लगते हैं

भुज को देख कर प्राउड क्यों नहीं होता?

अजय देवगन, संजय दत्त, सोनाक्षी सिन्हा जैसे बड़े नाम लिए हैं तो इनसे बड़े-बड़े काम करवाने ही थे।एकदम सुपरमैन किस्म के किरदार हैं इनके। शेर से कम तो ये मारेंगे नहीं और कुछ भी हो जाए, ये मरेंगे नहीं
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