Wednesday 20 January 2021
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‘Dadhichi Of Bollywood’ Sushant Singh Rajput

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Views Article 'Dadhichi Of Bollywood' Sushant Singh Rajput

आलेख का हिन्दी भावांतरण अंत में

The Central Bureau of Investigation will now investigate the mysterious death of Sushant Singh Rajput, thanks to the Supreme Court order dated 19 August. While this development is welcome, we cannot move our focus from the essence that the story of Sushant is not his story alone. The Hindi film industry was exploited to demoralise Indians, especially the youth. The Bollywood jihadi mafia had been at it for a long time. Under their hegemonistic scheme of things, whoever comes in the way of execution of their agenda must be eliminated. They would kill anybody who does not serve their purpose, and they have indeed killed many. Their latest victim is Sushant. By sacrificing his life, the actor has played the role of Dadhichi (click here for the story of the saint). CBI is the Vajra in the hands of powers entrusted with the task of cleansing the nation, the Indra of this story. This power is a fruit of renaissance of Indianness. The snake demon Vritrasura — that manifests here in the form of the Bollywood jihadi gang — must now be slain.

'Dadhichi Of Bollywood' Sushant Singh Rajput
This postage stamp of Dadhichi was issued in 1988

This opportunity to cleanse the industry of the malcontents will not arrive again. The slap on the face of Mumbai Police, a hitherto formidable force reduced to being a lapdog by Maharashtra Chief Minister Uddhav Thackeray and his son and state minister Aaditya, has come by way of the additional decision that the vulnerable witnesses in the case will be protected by the Central Reserve Police Force. Uddhav was as such a nincompoop; the whims, fancies, the misdemeanour of his son and wife, who are the de facto rulers of the state, have destroyed the credibility of the state police in general and city police in particular. While Aaditya hobnobs with the jihadi mafia of Bollywood, a pliant Commissioner of Police Param Bir Singh visits the chief minister at a juncture that is wholly inappropriate, suggesting that the integrity of the cops has been compromised.

The CBI inquiry — Mumbai Police was carrying out an inquest in the name of investigation — should help expose the loopholes that were deliberately left in order to shield the mafia. The probe by the central agency would surely go into the incidents leading to Sushant’s death and those that followed at the stage of his autopsy. It will bring forth the game of the mafia that handled pawns like Rhea Chakraborty, Sandeep Ssingh, Siddharth Pithani, etc. And the CBI will indeed justify the salaries of its sleuths when they reach up to the kingpins of the jihadi mafia and make them pay for their sins. May Sushant ‘Dadhichi’ Rajput’s sacrifice bear this fruit.

The article above is a follow-up of the following interview of the author with Sirf News:

यह आलेख लेखक से सिर्फ़ न्यूज़ के निम्न साक्षात्कार के आगे की कड़ी है:

‘बॉलीवुड के दधीचि’ सुशांत सिंह राजपूत

जैसे दधीचि की हड्डियों से वज्र बनाकर वृत्रासुर का संहार हुआ था, उसी तरह सुशांत की मौत से भारत को इंद्र बनकर सीबीआइ रूपी वज्र के प्रहार से बॉलीवुड को माफिया से मुक्त करना होगा

सुप्रीम कोर्ट के 19 अगस्त के फैसले के बाद सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमय मौत की जांच का जिम्मा अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) के पास है. हालांकि यह स्वागत योग्य कदम है, फिर भी हम अपना ध्यान इस बात से नहीं हटा सकते कि सुशांत के साथ जो कुछ भी हुआ, वह अकेली उनकी कहानी नहीं है. हिंदी फिल्म उद्योग का इस्तेमाल भारतीयों, खासकर युवाओं, को हतोत्साहित करने के लिए ही किया जाता रहा है. बॉलीवुड का जिहादी माफिया लंबे समय से इस काम में जुटा है. जो कोई भी उनकी इस साजिश में रोड़ा बना है, उसे मिटा दिया गया है. जो भी उनके मंसूबों के आड़े आएगा, उनकी मदद नहीं करेगा, वे उसे जिंदा नहीं छोड़ते और वास्तव में उन्होंने बहुतों को मार डाला है. सुशांत, उनके ताजा शिकार हैं. अपने जीवन का बलिदान देकर, अभिनेता ने दधीचि की भूमिका निभाई है (ऋषि दधीचि की कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें). जिन शक्तियों ने देश की सफाई का बीड़ा उठाया है वे इस कहानी के इंद्र हैं और सीबीआइ उनके हाथ में सुशोभित वज्र. यह शक्ति भारतीयता के पुनर्जागरण का एक फल है. बॉलीवुड के जिहादी गिरोह रूपी वृत्रासुर के संहार का समय आ गया है.

फिल्म उद्योग की गंदगी को साफ करने का ऐसा अवसर फिर नहीं मिलेगा. एक अतिरिक्त फैसले ने यह व्यवस्था दी है कि इस मामले के अहम गवाहों की सुरक्षा अब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल करेगा. यह उस मुंबई पुलिस के चेहरे पर जोरदार थप्पड़ है जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे तथा राज्य के मंत्री आदित्य के हाथों की कथपुतली बनी हुई है. उद्धव यहां एक ऐसे नासमझ मुख्यमंत्री के रूप में नजर आते हैं जिसने अपने बेटे और पत्नी, जो वास्तव में राज्य को चला रहे हैं, की सनक और कुकृत्यों से आँख मूंद रखा है और जिसके परिणामस्वरूप राज्य की पुलिस, विशेष तौर पर मुंबई पुलिस, की विश्वसनीयता खत्म हो गई है. आदित्य की बॉलीवुड के जिहादी माफिया के साथ छनती है. पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह का ऐसे मौके पर मुख्यमंत्री से जाकर मिलना पूरी तरह से अनुचित है और इससे पुलिस की साख पर बट्टा लगता है.

उम्मीद की जानी चाहिए कि सीबीआइ जांच में वे सारी चीजें उजागर होंगी जिसे मुंबई पुलिस माफिया को बचाने के लिए जानबूझकर अनदेखा कर रही थी. मुंबई पुलिस तो जांच के नाम पर बस पूछताछ की रस्मअदायगी कर रही थी. केंद्रीय एजेंसी द्वारा की गई जांच में निश्चित रूप से सुशांत की मौत की वजहों और उसके बाद पोस्टमार्टम तक के हर पहलू को गहराई से खंगाला जाएगा. यह माफिया के उस खेल का पर्दाफाश करेगा जो रिया चक्रवर्ती, संदीप सिंह, सिद्धार्थ पिठानी जैसे मोहरों की मदद से खेला जाता है. और अगर सीबीआइ जिहादी माफियाओं के सरगना का गिरेबान पकड़ लेती है और उसके पापों की सजा सुनिश्चित करा पाती है, तो ऐसा लगेगा कि एजेंसी के अधिकारी उस मोटे वेतन के वाकई हकदार हैं जो उन्हें मिलता है. सुशांत ‘दधीचि’ राजपूत का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए.

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Amitabh Sinha
Amitabh Sinhahttp://www.sirfnews.com
Lawyer at the Supreme Court of India, educationist heading colleges of different universities

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