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Tuesday 31 March 2020

कठुआ मामला— सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में चल रही सुनवाई पर लगाई रोक

बचाव पक्ष के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में असली गुनाहगार को पकड़ा जाना चाहिए। इसके लिए कैसे धन एकत्र किए जा रहे हैं, किस तरह जांच हुई, इन सबकी पड़ताल होनी चाहिए। नारको टेस्ट भी कराया जाना चाहिए

Editorials

In India

नई दिल्ली—कठुआ गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में चल रहे ट्रायल को अगले आदेश तक रोक दिया है। कल यानि 28 अप्रैल को कठुआ के ट्रायल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी थी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 7 मई को करेगा। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज इस मामले में आगे नहीं बढ़ेंगे। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों से ट्रायल ट्रांसफर करने के मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि कोर्ट ट्रायल कोर्ट को अपनी मर्जी से जहां ट्रांसफर करे लेकिन हमारी प्राथमिकता चंडीगढ़ कोर्ट है क्योंकि वहां पीड़ित और अभियुक्त पक्ष दोनों की पहुंच है। उन्होंने कहा कि चार्जशीट में कहा गया है कि धारा 178ए के तहत जांच होगी जो कि अभी बंद नहीं की गई है। लेकिन मुख्य जांच कर ली गई है।

बचाव पक्ष के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में असली गुनाहगार को पकड़ा जाना चाहिए। इसके लिए कैसे धन एकत्र किए जा रहे हैं, किस तरह जांच हुई, इन सबकी पड़ताल होनी चाहिए। नारको टेस्ट भी कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस केस में पुलिस भी एक पक्षकार है।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और इंदिरा जयसिंह के बीच जुबानी जंग हुई जिसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने बीच-बचाव किया।

इंदिरा जयसिंह ने राजकुमार गोयल के हलफनामे को पढ़ा। उन्होंने कहा कि इसमें अभियुक्त का कुछ कहना ही नहीं है। तब कोर्ट ने कहा कि याचिका में ट्रांसफर और मानिटरिंग की मांग की गई है| इसलिए दलीलें उसी पर सीमित रखी जाएं।

जम्मू-कश्मीर सरकार के वकील ने कहा कि अगर यह राज्य के बाहर ट्रांसफर होता है तो क्या उचित होगा। उस पर कोर्ट की क्या जिम्मेदारी होगी। तब इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अभियुक्त को कोर्ट को संबोधित करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ट्रांसफर पर सुनवाई करे दूसरे किसी भी मसले पर नहीं। उन्होंने कहा कि जजों की ओर से किसी भी गुंडागर्दी की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए| तभी फेयर ट्रायल हो सकता है। जब ट्रायल को बाधित किया गया तो उनका लक्ष्य साफ दिख रहा है। वे चाहते हैं कि अभियुक्त को जमानत मिले।

इंदिरा जयसिंह ने कहा कि ये देखा जाना चाहिए कि सीबीआई जांच की मांग क्यों की जा रही है। ये मांग इसलिए की जा रही है क्योंकि पुलिस ने अच्छा काम किया है। बार एसोसिएशन का भी व्यवहार देखा जाना चाहिए। पीड़िता के मां-बाप ने कभी भी सीबीआई जांच की मांग नहीं की है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम किसी भी जनहित याचिका को स्वीकार नहीं करने जा रहे हैं। तब बचाव पक्ष ने कहा कि कानून ऐसे काम नहीं करता है। फेयर ट्रायल के लिए सीबीआई जांच जरुरी है।

इस मामले में जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपने हलफनामे में ट्रायल को जम्मू-कश्मीर से बाहर ले जाने का विरोध किया गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह इस मामले की जांच और फेयर ट्रायल कराने में सक्षम है।

इस मामले के दो अभियुक्तों सांझी राम और विशाल जगोत्रा ने ट्रायल को कठुआ से बाहर ट्रांसफर करने की मांग का विरोध किया है ।

हिन्दुस्थान समाचार

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