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चीनी वॉर का तीसरा चरण — क्यों ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा ‘CriminalKejriwal’

क्या है यह चीनी षड्यंत्र? सोशल मीडिया पर कल से एक सन्देश वायरल हो रहा है जिसमें तथ्य और तर्क के साथ बीजिंग की घटिया चाल को समझाया गया है

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क्या भारत के सार्वभौम और आर्थिक मजबूती को तोड़ने के लिए चीनी सरकार यहाँ के वामपंथियों के साथ मिल किसी साज़िश को अंजाम दे रही है? मेसेज app WhatsApp पर कल से एक सन्देश घूम रहा है, अब तक वायरल हो चूका है। कहते हैं ‘अब कोरोनावायरस नहीं, वामपंथी स्लीपर सेल सक्रिय हो चुका है।इन्होंने ही अफवाह फैलाई कि लोकडाउन 3 से 6 माह चल सकता है।’ साथ ही ट्विटर पर लोग hashtag लगाकर लगातार ट्वीट डालते हुए “CriminalKejriwal” trend करवा रहे हैं। साधारणतः ट्विटर पर कोई ट्रेंड कुछेक घंटे में समाप्त हो जाता है, पर यह सिलसिला जो कल शुरू हुआ, अब तक जारी है!

क्या है यह चीनी षड्यंत्र? मेसेज app WhatsApp पर कल से एक सन्देश घूम रहा है, अब तक वायरल हो चूका है। कहते हैं ‘अब कोरोनावायरस नहीं, वामपंथी स्लीपर सेल सक्रिय हो चुका है।इन्होंने ही अफवाह फैलाई कि लोकडाउन 3 से 6 माह चल सकता है।’ साथ ही ट्विटर पर लोग hashtag लगाकर “CriminalKejriwal” trend कर रहे हैं। साधारणतः ट्विटर पर कोई ट्रेंड कुछेक घंटे में समाप्त हो जाता है, पर यह सिलसिला जो कल शुरू हुआ, अब तक जारी है!

कल की ‘मजदूरों का पलायन’ वाली घटना को उद्धृत करते हुए सन्देश के शीर्षक में लिखा है, ‘मजदूरों का पलायन और उस पर टीवी चैनल्स के समाचार, गरीबों की चिंता, भूख का व्यापार।’ आगे लिखा है ‘केजरीवाल ने दिल्ली दंगों की ही तरह लम्बी ओढ़ ली है। पर्दे के पीछे टुकड़े गैंग सक्रिय हैं।’

सन्देश लेखक का कहना है कि ‘छः हफ्ते गुजर गए, 800 के आस-पास कोरोनावायरस संक्रमित लगभग 20 की मौत उसमें भी 80% की मुख्य वजह कोरोना नहीं, ऊपर से 135 करोड़ की आबादी का देश!’

WhatsApp सन्देश की मानें तो ‘ये तो चीन निर्मित “बायलोजिकल हथियार” की घोर बेइज्जती थी देवभूमि भारत में!’ जहाँ एक तरफ कुछ दिनों तक चीनी वायरस चीनी वायरस चिल्लाने वाला सुपर पावर अमेरिका सरेंडर कर शैतान जिंगपिंग की तारीफ़ पर उतर आया तो वहीं दूसरी तरफ कोरोना के कहर के कराह रहा पूरा यूरोप भारी खरीददारी कर रहा था चीन से।

‘परंतु ये क्या,’ चौंकाने वाली बात यह है कि ‘दुनिया की सबसे बड़ी मार्केट घांस नहीं डाल रही थी, शैतान चीन के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखने लगीं, उसे लगा कि उसका मिशन सिंहासन (कोरोना) तो फेल ही हो जायेगा यदि भारत उसकी शरण में नहीं आया तो।’

साथ ही यह मीम भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है

चीनी साज़िश को समझाते हुए सन्देश में आगे लिखा है ‘वहीं दूसरे ही स्टेज में एक दिन का जनता कर्फ्यू फिर 21 दिनों का लाकडाऊन कर पूरा देश अपने नायक के पीछे चल रहा था। अतंत: चालाक चीन ने अपना आखिरी पासा फेंका और भारत की सबसे कमजोर नस को दबा दिया।’

‘जी हां, उसने खोला अपने खजाने का मुंह और खरीद लिया देश के कुछ बड़े देशद्रोही पत्रकारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुछ चैनलों को। जगा दिया वामपंथ के स्लीपर सेल्स को।’

‘पहले 21 दिनों तक गरीब दिहाड़ी मजदूर कैसे रहेंगे?’ का रोना रोया जाना शुरू किया गया फिर एक-दो परिवारों की पैदल यात्रा का 24 घंटे एैसे कवरेज किया जाने लगा कि जैसे पूरा देश ही पैदल चल पड़ा।

‘फिर धर्म के नाम पर एक संप्रदाय विशेष को मोर्चे पर लगा दिया गया। अब ये चाल सफल होती दिख रही है। कुछ झूठे नक्सली नेता आम मजदूरों को भड़का कर कि छः महीने का कर्फ्यू लगने वाला है, बसों से दूसरे प्रदेश की सीमाओं तक लाखों मजदूरों को छोड़ने लगे और सफल कर दिया शैतान की चालों को!’

‘देश को बैठा दिया जाग्रित ज्वालामुखी के मुहाने पर, वहीं पैदल मार्च करने वालों के लिए कुछ लोगों की छाती में दूध उतर आया जो सोशल मीडिया पर सिर्फ विरोध के नाम पर विरोध करते रहते हैं।’

सन्देश में प्रश्न पूछा गया है — ‘जब देश युद्ध या किसी बड़े संकट में फंसता है तो हर नागरिक युद्ध का हिस्सा होता है?’ जवाब में लिखा है ‘हर नागरिक को परेशानी उठानी पड़ती है, हर नागरिक को त्याग करना पड़ता है, युद्ध सिर्फ सेनायें ही नहीं लड़ती हैं परंतु गद्दारों और बिकाऊ लोगों की प्रचुर उत्पादकता से गमगीन ये देश एैसी परिस्थिति का हर समय से ही सामना करता आया है।’

अंत में देश के रणबाँकुरों के नाम सन्देश है — ‘सुनो, हम फिर भी जीत जायेंगे! हमने विश्व विजेता सिकंदर को उल्टे पांव वापस किया है। हम शैतान चीन की हर चाल का जबाब देंगे वो भी भरपूर। परंतु देश के अंदर ही कुछ लोग और संस्थायें एक बार फिर सड़कों पर नंगी हो रही हैं जिन्हें देखना और सुनना बहुत कष्टदायक है!

‘चीनी मोहरों, चीन के गुर्गों की पोल खोलिए’

कल सिर्फ़ न्यूज़ को दिए इंटरव्यू का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अमिताभ सिन्हा ने वेबसाइट को बताया, ‘केजरीवाल ने क्या ग़ज़ब गेम किया है! कल तो मैंने तारीफ़ की थी उसकी!’

क्या माजरा है पूछे जाने पर अमिताभ सिन्हा ने बताया ‘एक तरफ उन्होंने अपनी व्यवस्था बना ली। दूसरी तरफ़ उसका प्रचार न करके लोगों को भड़काने की और बरगलाने की अपनी मशीनरी चालू कर दी!’

आंम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्डा के ख़िलाफ़ हुए एफ़आइआर का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने बताया कि चड्डा तो इस पूरे खेल में एक मोहरा मात्र है बल्कि साथ ही साथ सच्चाई का एक विकृत रूप प्रस्तुत करने के लिए कम्युनिस्टों की और चीन की मशीनरी सक्रिय हो गई है।’

चीनी षड्यंत्र पर रौशनी डालते हुए सिन्हा ने कहा कि 21 दिनों में लॉकडाउन के समाप्त होने पर और कोरोनावायरस के क़ाबू में आ जाने पर ताकि सरकार को इसका श्रेय न मिले और चीन देश का सिरमौर बन जाए, इन्होंने ग़रीब मजदूरों को बताया कि वे भुखमरी का शिकार हो जाएंगे।

दिल्ली और अन्य शहरों से पलायन की स्थिति में भीड़ के कारण कोरोनावायरस के फैलने का ख़तरा बढ़ गया है। इससे भारत के गाँवों में भयंकर महामारी फैलने का ख़तरा है. साथ ही शहरों की अर्थव्यवस्था अस्त व्यस्त हो जाने की सम्भावना है क्योंकि बिहार और उत्तर प्रदेश से आए कामगारों के मज़बूत कंधों पर ही यह तंत्र टिका हुआ है।

सिन्हा ने बताया कि ऐसे में चीन से मंगवाए गए सस्ते सामान की बाज़ार में बाढ़ सी आ जाएगी भले ही हमेशा की तरह चीनी माल घटिया क्वालिटी का हो। उन्होंने ग़रीब लोगों को सडकों पर उतारने वालों की जाँच की मांग को दोहराते हुए सिर्फ़ न्यूज़ और पत्रकारिता के पेशे में कार्यरत अन्य मीडिया से अपील की कि ‘चीन के साथ यहाँ के कोम्मुनिस्टों की मिलीभगत’ के ख़िलाफ़ कैंपेन चलाएं।

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