Saturday 16 January 2021
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मुसलमानों ने श्रीलंकाई तमिलों को दी धर्मांतरण की धमकी

पहले उन्होंने गाँव में अपनी संख्या बढ़ाई, फिर उसका नाम बदल कर इस्लामियापुरम रख दिया; फिर तमिलों से कहा या तो मुसलमान बन जाओ या गाँव छोड़ दो

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Politics India मुसलमानों ने श्रीलंकाई तमिलों को दी धर्मांतरण की धमकी

कोलंबो | कल्पना कीजिए कि किसी देश से मुसलमानों को अपनी भूमि से बाहर निकलने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया जाए तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना हंगामा होगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और मीडिया इस बात से अनजान बन रहे हैं कि ईसाई संस्था बरनबास फंड ने 11 जुलाई को एक सनसनीखेज़ ख़बर जारी की कि श्रीलंका के अम्पारा जिले के मुसलमानों ने तमिलों को धर्मांतरित करने या देश छोड़ने की धमकी दी। इन श्रीलंकाई तमिल भाषियों में अधिकांश ईसाई हैं पर अल्पसंख्यक हिन्दू भी हैं।

श्रीलंका में कई तमिल ईसाइयों और हिंदुओं को मुसलमानों द्वारा इस्लाम में परिवर्तित होने या गांव छोड़ने का आदेश दिया जा रहा है जहां उनके परिवार पीढ़ियों से रहते आए हैं।

हिंदू तमिल रिक्शा चालक ज्योतिनाथन चंद्रशेखर, उनकी पत्नी, विनोजिनी और उनके तीन महीने का बच्चा जिहादियों द्वारा उनके घर को जलाने के बाद अपने जीवन के लिए भाग गए जब उन्होंने धर्मपरिवर्तन से इनकार कर दिया। 31 अगस्त 2018 को एक विस्फोट की घटना में उसका रिक्शा भी नष्ट हो गया। परिवार पूर्वी प्रांत के अंपारा जिले के वालथापट्टी गांव में रहता था, जो हजारों वर्षों से जातीय तमिलों का पारंपरिक घर रहा है। यहाँ के तमिलों में अधिकांश हिंदू हैं, जबकि लगभग 20% ईसाई हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार 2004 के बॉक्सिंग डे सुनामी के पीड़ितों के लिए बनाए गए नए घरों में स्थानांतरित होने पर मुसलमान उस क्षेत्र पर हावी हो गए। नए-नए बसे मुसलमानों ने गाँव का नाम बदलकर इस्लामियापुरम कर दिया और दावा करने लगा कि यह गाँव उसी कौम के लिए है।

अपना गाँव व अम्पारा जिला छोड़ कर पलायन कर चुके ज्योतिनाथन और विनोजिनी ने बताया कि उनके नौ रिश्तेदारों को जबरन जिहादियों द्वारा इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया है।

बरनबास फंड इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स में कोवेंट्री में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय, इंटरडिनोमिनेशनल क्रिश्चियन सहायता एजेंसी है जो उन ईसाइयों का समर्थन करता है जो उनकी मज़हबी आस्था की वजह से भेदभाव या उत्पीड़न का सामना करते हैं। संस्था को 1993 में स्थापित किया गया था। यह 50 से अधिक देशों में राष्ट्रीय ईसाइयों द्वारा संचालित परियोजनाओं को सहायता प्रदान करता है। यह विशेष रूप से इस्लामी धर्मत्यागी कानून के उन्मूलन के लिए भी अभियान चलाता है।

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