कच्चे तेल की आपूर्ति में वृद्धि के पश्चात् उसकी क़ीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर न्यूयॉर्क स्टाक मार्केट में तेज़ी आ गई। यूएस इंटरनेशनल बेंच मार्क क्रूड में 3.04 डति बैरल अर्थात् 4.6 प्रतिशत से 68.58 डालर प्रति बैरल हो गया है। जबकि इंटरनेशनल बेंच मार्क के अनुसार 2.5 डालर प्रति बैरल से 3.4 डालर प्रति बैरल बढ़ कर 75.55 डालर प्रति बैरल हो गया है। तेल विश्लेषकों की माने तो ओपेक देशों ने मार्केट में मांग और आपूर्ति के अनुसार आपूर्ति में उतनी वृद्धि नहीं की है। इससे मार्केट में तेल की आपूर्ति को ले कर तंगी बनी रहेगी और क़ीमतों पर अंकुश लगा पाना कैसे संभव होगा?

अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा बड़ा देश है, जहां तेल की सर्वाधिक खपत होती है। भारत के ऊर्जा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक महीने पहले अबू धाबी में और आज फिर ओपेक देशों से भी निवेदन किया था कि तेल की क़ीमतों में वृद्धि कचोट रही है और इसका आर्थिक वृद्धि पर कुप्रभाव पड़ रहा है। शुक्रवार की सुबह विएना में ओपेक देशों की बहुप्रतिक्षित बैठक में कच्चे तेल की आपूर्ति में जब एक प्रतिशत वृद्धि किए जाने का फ़ैसला किया गया था, तब चेयर पर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब आदि सदस्य देशों को यह भली-भांति मालूम था कि एक प्रतिशत वृद्धि का असर सही मायने में दस लाख बैरल प्रति दिन न होकर छह से सात लाख बैरल प्रतिदिन वृद्धि हो सकेगी। फिर बड़े तेल उत्पादक देशों में घरेलू संकट में फँसे लीबिया, आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेज़ुएला और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के दायरे में घिरे ईरान की ओर से तेल आपूर्ति के बारे में कहां तक अनुमान लगाया जा सकता है?

पिछले महीने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री ख़ालिद अल-फलीह जब रूस गए थे, तब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने भी कहा था कि इंटेरनेशनल बेंच मार्क के अनुसार कच्चे तेल की क़ीमत 65डालर प्रति बैरल से अधिक नहीं जानी चाहिए। यहां कठिनाई इस बात की है कि तेल उत्पादक देशों में सऊदी अरब और रूस के अलावा यूएई, कुवैत, अलजीरिया, ओमान, क़तर और इक्वेडर ही उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। जबकि इराक़, मेक्सिको, वेनेज़ुएला, अजरबेजान, ब्रूनई, मलेशिया और सुडान से तेल उत्पादन में वृद्धि की संभावना नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कच्चे तेल की क़ीमतों में कृत्रिम वृद्धि को लेकर ओपेक देशों की निंदा करते आए हैं। उन्होंने शुक्रवार की सुबह भी ट्विटर पर ओपेक देशों से क्रूड आयल के पर्याप्त उत्पादन पर ज़ोर दिया था। सऊदी अरब, जो अमेरिका का मित्र देश भी है, इस ट्विटर की अनदेखी नहीं कर सके लेकिन यह भी उतना ही सच्च है कि तेल उत्पादक देशों में ईरान के ऊर्जा मंत्री बिजान जंगनह ने तो मुंह पर ही कह दिया कि यह संभव नहीं है। इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा मंत्री सहेल अल-माजरुई ने कहा कि कौन देश कितना अधिक उत्पादन कर सकेंगे, इस पर कोई तय नहीं हुआ है।

कहने को कहा जा सकता है कि ईरान तो पहले ही अपनी क्षमता के अनुसार अधिकतम उत्पादन कर रहा है। फिर यह भी किसी से छिपा नहीं है कि साल के अंत में तेल की मांग सोलह से अठारह लाख डालर प्रति बैरल प्रति दिन बढ़ जाएगी। साऊदी अरब आर्मको एक आईपीओ लेकर आ रहा है। इस आईपीओ के माध्यम से एक खरब डालर की बड़ी धन राशि एकत्र किए जाने की योजना है। इस धन राशि से बुनियादी ढांचे में आमूल चूल रद्दों-बदल लिए जाने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में सऊदी अरब को ख़ुद एक बड़ी धन राशि की दरकार होगी। डोव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 119.19अंक चढ़ कर 24580 तक पहुंच गया तो एस एंड पी-500 5.12 अंकों के बढ़ने से 2754.88 हो गया। हालांकि नेशडेक 20.24 अंक गिरा।