Thursday 21 October 2021
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सिम्म्बा: फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो

रोहित शेट्टी प्रख्यात खलनायक तथा फाइट मास्टर शेट्टी के लायक बेटे हैं और 15 साल के अनुभव के बाद अब आँख बन्द कर के भी कमाऊ मसाला एक्शन फ़िल्म बना सकते हैं

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[यह फ़िल्म समीक्षा नहीं है, ‘फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो’ देखने की लत रखने वाले एक औसत दर्शक का औसत अनुभव भर है. फ़िल्म समीक्षा के लिए मानक मीडिया स्रोतों का अवलोकन करें.]

‘सिम्म्बा’ के बारे में 9 बातें.

1. जैसा कि ट्रेलर से लग रहा था, सिम्म्बा सिर्फ़ दबंग, सिंघम और राउडी राठौड़ की कतरनें जोड़ कर कॉप फ़िल्म बनाने की कोशिश ही है, और इन तीनों से काफ़ी पीछे छूट जाती है. फिर भी औसत मसाला मनोरंजन दे ही देती है और ठीक-ठाक कमाई कर के सिनेमाई कचरात्मकता से तड़पते रहे वर्ष 2018 को जाते-जाते कुछ राहत देकर विदा करेगी.

2. रोहित शेट्टी प्रख्यात खलनायक तथा फाइट मास्टर शेट्टी के लायक बेटे हैं और 15 साल के अनुभव के बाद अब आँख बन्द कर के भी कमाऊ मसाला एक्शन फ़िल्म बना सकते हैं. यह भी उन्होंने आँख बन्द कर के ही बनाई है, क्यूँकि आँखें खोल कर वे अजय देवगन वगैरह के साथ ही बनाते हैं फ़िल्में. (अगली फ़िल्म कैनेडियन राष्ट्रवादी अक्षय कुमार जी के साथ बनाएँगे, उसका ज़िक्र आगे है.)

3. दक्षिण भारतीय फ़िल्म टैम्पर के इस ऑफ़िशियल रीमेक का पूर्वार्द्ध काफ़ी कमज़ोर है, चीज़ें काफ़ी देर तक आगे ही नहीं बढ़ती हैं. इंटरवल के बाद कथाप्रवाह में गति आती है और रुचि जगती है. कथानक इसका लेकिन बेहद घिसापिटा है 80 की फ़िल्मों जैसा ही, लोगों को अब नवीनता चाहिए कॉप फ़िल्म्स में भी.

4. 156 मिनट की लंबाई काफ़ी ज़्यादा है इसके लिए. संपादक महोदय आराम से आधा घंटा उड़ा कर अपनी मेहनत बचाते हुए मज़े कर सकते थे. ख़ैर, उनकी मेहनत, उनकी मर्ज़ी.

5. फ़िल्म अपने उत्तरार्द्ध में स्त्री सुरक्षा और विशेषतया बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के बारे में काफ़ी देर तक बात करती है. अच्छी बात यह है कि यह फ़िल्म ऐसे अपराधों के लिए अपराधियों के साथ-साथ उनकी माँओं व अन्य स्त्री संबंधियों को भी उन्हें उचित सीख न दिए जाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराती है.

6. सारा अली ख़ान की भूमिका और अभिनय उतने ही ज़ोरदार हैं जितने ‘सिंघम’ में काजल अग्रवाल और ‘राउडी राठौड़’ में सोनाक्षी सिन्हा के थे. उन्हें अलग से नहीं जानने वाले नोटिस भी नहीं कर पाएँगे वो इसमें हैं. रोहित शेट्टी की पारिवारिक एक्शन फ़िल्मों की तरह इसमें भी एक्सपोज़र या किसिंग सीन वगैरह नहीं हैं तो सारा के लिए अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए कुछ ख़ास मौक़े भी नहीं हैं. कोई नहीं, सारा निराश न हों. बेहतरीन मौक़े अभी बहुत आएँगे, फ़िलहाल हिट देना ज़रूरी है.

7. इस फ़िल्म में संगीत था या नहीं, मुझे अब बिल्कुल भी याद नहीं है. हालाँकि सालों पहले देखी गई ‘सिंघम’ में ‘बदमाश दिल’ नाम का एक ख़ूबसूरत नग़मा था ये मुझे आज तक बख़ूबी याद है. इस बारे में इतना ही कहना है.

8. जैसी उम्मीद थी, रणवीर सिंह जी के नाज़ुक नाटकीय लचकदार कन्धे एक टफ़ कॉप फ़िल्म का बोझ संभालने में बुरी तरह से पिचक गए, और फ़िल्म का आख़िरी आधा घंटा पहुँचते-पहुँचते तो दोहरे हो गए. रोहित शेट्टी चूँकि एक्शन फ़िल्मों के मंजे हुए फ़िल्म निर्देशक हैं, इसलिए अपने नायक की हड्डियों के साथ-साथ फ़िल्म का सुरमा बनते उन्होंने देख लिया, और अपने संकट मोचक परम इष्ट अजय देवगन रूपी ‘सिंघम सर’ का सच्चे मन से स्मरण किया और उनसे प्रकट होने का आह्वान किया. यक़ीन मानिए, सच में फ़िल्म में सिंघम सर की एंट्री दबंग वाले छेदी सिंह के अड्डे पर चूहे की तरह बंधे हुए और कुटाई खा रहे रणवीर सिंह जी (इंस्पेक्टर सिम्म्बा) को बचाने के दृश्य में ही होती है. उसके बाद से फ़िल्म सिंघम सर की ही है, सिम्म्बा जी एक ओर खड़े रह कर हमारी ही तरह फ़िल्म देखते हैं. ये है इस फ़िल्म के नायक महोदय की हालत! उफ़्फ़!!

9. और अंत में इतना ही नहीं, भ्रष्ट इंस्पेक्टर सिम्म्बा को सभी जाँच संबंधी संकटों से मुक्त करने के बाद सिंघम सर एटीएस चीफ़ बनने की बधाई देते हुए जिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी महोदय का फ़ोन रिसीव करते हैं, वे और कोई नहीं बल्कि कैनेडियन राष्ट्रवादी श्री अक्षय कुमार जी रूपी आईपीएस अधिकारी महोदय ही हैं, जिनके वर्ष 2019 में ‘सूर्यवंशी’ नाम से आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) प्रमुख का कार्यभार संभालने की फ़िल्म में बाक़ायदा औपचारिक घोषणा की गई है. बस तकनीकी एवं प्रक्रियागत कारणों से गृह मंत्रालय के लैटर पैड पर छपा नियुक्ति पत्र दिखाने की कसर भर छोड़ दी गई, चूँकि आगामी वर्ष में गृह मंत्रालय में व्यापक फ़ेरबदल की संभावना है. इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सिंघम सर 2020-2021 तक छुट्टी पर ही रहेंगे, और जब लौटेंगे तो कम से कम अतिरिक्त ज़िला पुलिस अधीक्षक अथवा एडिशनल एसपी के पद तक अवश्य पहुँच चुके होंगे. अकेले अपने दम पर ऐसे सभी कर्मठ, जाँबाज़, समर्पित एवं क़ाबिल पुलिस अधिकारियों की मार्वलनुमा फ़ौज खड़ी करने के लिए माननीय श्री रोहित शेट्टी जी का मैं तहेदिल से अभिनन्दन करता हूँ, तथा भविष्य में उन्हें किसी वीरता अलंकरण से विभूषित किए जाने की भारत सरकार से अनुशंसा करता हूँ! जय हिन्द, जय कोंकण, जय गोआ, जय महाराष्ट्र!!

Arvind Arora

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Arvind Arora
Filmmaker, critic and political commentator

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