19.3 C
New Delhi
Wednesday 29 January 2020

शौकत कैफ़ी हुईं सुपुर्द-ए-ख़ाक (फ़ोटो गैलरी)

93 वर्ष की आयु में इप्टा और इवा की एक्टिविस्ट, नाटक व फिल्मों की अदाकारा, मरहूम कैफ़ी आज़मी के बेवा और शबाना व बाबा की अम्मा शौकत का इंतक़ाल हुआ

भारतीय थिएटर और फिल्म अभिनेत्री शौकत कैफ़ी (जन्म 1927), जिन्हें शौकत आज़मी के नाम से भी जाना जाता था, का कल निधन हो गया। उनके पति उर्दू कवि और फ़िल्म गीतकार कैफ़ी आज़मी थे। कैफ़ी आज़मी और वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांस्कृतिक मंच इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) और प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन (IWA) के प्रमुख स्तम्भ थे।

शौकत कैफ़ी के दामाद, लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने थिएटर और फिल्म अभिनेत्री की मौत की ख़बर की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि शौकत 93 वर्ष की थीं और एक के बाद एक समस्या आ रही थीं। उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों के लिए वह आईसीयू में थीं। उम्र के सबब ही उनकी सेहत नासाज़ रहती थी।

अख्तर ने अमेरिका से फ़ोन पर कहा, “आखिरकार परिवार वाले उन्हें घर ले आए। वेअपने कमरे में वापस आना चाहती थी, जहां वे एक या दो दिन के लिए रहीं और फिर उनका इंतक़ाल हो गया। शबाना मुंबई में है।”

आज शनिवार शौकत कैफ़ी के पार्थिव शरीर को दफनाया गया। मातम में शरीक होने फ़िल्म जगत की कई हस्तियाँ शौकत की बेटी व मशहूर अदाकारा शबाना आज़मी से मिलने आईं।

शौकत कैफ़ी का जन्म उत्तर प्रदेश से आए एक शिया परिवार में हैदराबाद राज्य में हुआ था। वे भारत के औरंगाबाद में पली-बढ़ीं। छोटी उम्र में उनकी शादी उर्दू कवि कैफ़ी आज़मी से हुई। उनके बेटे बाबा आज़मी एक प्रसिद्ध कैमरामैन और छायाकार हैं। उन्होंने तन्वी आज़मी से शादी की है, जो जन्म से हिंदू हैं और उषा किरण की बेटी हैं, जो एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं।

शौकत और कैफ़ी की बेटी शबाना आज़मी भारतीय सिनेमा की एक अभिनेत्री हैं जिन्होंने जाने-माने कवि और फ़िल्म गीतकार जावेद अख्तर से शादी की।

शौकत और कैफ़ी शादी के तुरंत बाद मुंबई में बस गए। उन्होंने एक साथ जीवन में कई उतार-चढ़ाव सहे। कैफ़ी कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिबद्ध सदस्य थे। पार्टी की विचारधारा के प्रति कैफ़ी इतने निष्ठावान थे कि अपने रोज़गार से केवल रु० 40 अपने पास परिवार के गुज़ारे के लिए रखते थे और बाक़ी रक़म पार्टी फंड में जमा करवा देते थे। इतना ही नहीं, उनके अनुरोध पर मरणोपरांत उनकी पार्टी के सदस्यता कार्ड को उनके साथ दफन कर दिया गया।

obituary

उन्होंने अपना सारा जीवन IPTA और PWA के लिए काम किया और दंपति अपने दो बच्चों के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा दिए गए आवास में रहते थे, जो एक अपार्टमेंट में एक बेडरूम था जिसे तीन अन्य परिवारों के साथ साझा किया जाता था। चूँकि अन्य सभी परिवार भी कम्युनिस्ट थे और रंगमंच या सिनेमा से जुड़े हुए थे, शौकत का रंगमंच से जुड़ाव बना रहा। और फिर अभिनय से जो पैसे मिलते थे उससे बच्चों के स्कूल की फ़ीस भरी जाती थी।

आख़िरकार 1950 के दशक के मध्य में कैफ़ी ने एक लेखक और गीतकार के रूप में मुंबई फिल्म उद्योग में काम करना शुरू कर दिया। वह एक गीतकार के रूप में सफल हुए और परिवार की क़िस्मत ने एक नया मोड़ लिया।

कुछ वर्षों के भीतर जुहू के टॉनी मुंबई पड़ोस में उन्होंने एक अपार्टमेंट ख़रीदा। फ़िल्म उद्योग में उनके पति के सहयोग ने शौकत को फिल्मों में भी भूमिका निभाने में मदद की।

शौकत लगभग एक दर्जन फ़िल्मों में दिखाई दीं, जिनमें प्रमुख फ़िल्मों गरम हवा और उमराव जान में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ थीं। थिएटर में वह 12 नाटकों में दिखाई दीं।

2002 में कैफ़ी आज़मी के निधन के बाद शौकत आज़मी ने एक आत्मकथा लिखी, कैफ़ी एंड आइ जिसे एक नाटक कैफ़ी और मैं में रूपांतरित किया गया। कैफ़ी आजमी की 4 वीं पुण्यतिथि पर 2006 में मुंबई में इसका प्रीमियर हुआ।

Stay on top - Get daily news in your email inbox

Sirf Views

Soros Loves To Play Messiah To The Miserable

The opportunity to throw breadcrumbs massages the ego of NGOs supremacists run; the megalomaniac Soros is a personification of that ego

Pandits: 30 Years Since Being Ripped Apart

Pandits say, and rightly so, that their return to Kashmir cannot be pushed without ensuring a homeland for the Islam-ravaged community for conservation of their culture

Fear-Mongering In The Times Of CAA

No one lived in this country with so much fear before,” asserted a friend while dealing with India's newly amended citizenship...

CAA: Never Let A Good Crisis Go To Waste

So said Winston Churchill, a lesson for sure for Prime Miniter Narendra Modi who will use the opposition's calumny over CAA to his advantage

Archbishop Of Bangalore Spreading Canards About CAA

The letter of Archbishop Peter Machado to Prime Minister Narendra Modi, published in The Indian Express, is ridden with factual inaccuracies

Related Stories

Leave a Reply

For fearless journalism

%d bloggers like this: