महाराष्ट्र में संत भी नहीं हैं सुरक्षित, पालघर में 2 की हत्या

पुलिस वालों के सामने, डंडे और पत्थरों से मार-मार कर दोनों सन्तों और ड्राइवर की भी हत्या कर दी गई

0
महाराष्ट्र में संत भी नहीं हैं सुरक्षित

शुक्रवार को पंच दशनाम जूना आखाडा के ब्रह्मलीन संत की समाधि क्रिया से लौट रहे दो संत समेत उनके ड्राईवर को पालघर में कुछ असामाजिकतत्वों ने पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस की उपस्थिति में हुए इस कृत्य के दौरान पुलिस मूक दर्शक बनी रही। महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्य में पुलिस की मौजूदगी में हुए इस कृत्य की जितनी भी निंदा की जाये, कम है। मुंबई बीजेपी के महामंत्री अमरजीत मिश्र ने महाराष्ट्र में ध्वस्त होती कानून व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

अमरजीत ने मांग की है कि इस मामले में शामिल दोषी लोगों को सख्त सजा दी जानी चाहिये व इसके पीछे की साजिश का भी पर्दाफाश होना चाहिये, और मामले की गंभीरता को न समझने वाले पुलिसकर्मियों को भी बर्खास्त करना चाहिये। यह अफसोसजनक है कि पुलिस वालों के सामने, डंडे और पत्थरों से मार-मार कर दोनों सन्तों और ड्राइवर की भी हत्या कर दी गई। विडियो देखने के बाद ऐसा लगता है कि संतों को निर्ममता से पीट रहे गुंडों के सामने पुलिस ने घुटने टेंक दिए थे। भाजपा नेता ने कहा कि अभी कुछ दिनों पहले ही लॉकडाउन व कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए हजारों लोग बांद्रा में जुट गए थे। तब भी सरकार मूकदर्शक बनी रही।

इस मामले से मचे हडकम्प के बाद अब तक पुलिस ने कुल 110 दोषियों पर अभियोग पंजीकृत कर केकार्यवाही की है। जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के पालघर स्थित तलासरी गाव में अहमदाबाद नेशनल हाईवे से गुजरात की तरफ भगवान का भजन करते हुए गुजर रहे साधु-महात्माओं के वाहन को रोक कर उन पर घात लगा कर जानलेवा हमला किया गया है। इस जानलेवा हमले की चपेट में आ कर अब तक दो संत और एक ड्राइवर की मौत हो चुकी है और कुछ घायल हुए हैं जिनका इलाज़ करवाया जा रहा है। महाराष्ट्र में इस से पहले संतो को निशाना बनाने की ऐसी घटना बहुत कम देखने को मिली थी।

दो दिन पहले मुंबई के दहिसर से दो संत जो आपने गुरुभाई संत रामगिरी महाराज जी का सूरत मेउनके आश्रम में निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उनके श्री सुशील गिरी व उनके ज्येष्ठ गुरु चिकना बाबा अपने ड्राइवर के साथ अहमदाबाद नेशनलहाईवे इलाके से गुज़र रहे थे कि आगे पालघर स्थित तलासरी कासा गांव में गाड़ी रुकवा करकुछ गुंडे चोरी छिनैती के इरादे से चोर – चोर चिल्लाकर उन संतो को धारदार हथियार,लकड़ी तलवार से हमला करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उनके पास जो भी नकदी थीउसको भी छीन लिया गया। लाक डाउन में पुलिस की गश्त की पोल भी यहाँ खुलती दिखाई दी क्योकि इस पूरे हंगामे में काफी देर तक पुलिस का कोई नामोनिशान तक नहीं था।

जब शोर ज्यादा मचा तो घटना स्थल परपहुंच कर पुलिस ने उन संतो को कुछ देर तक स्थानीय पुलिस चौकी में रखा फिर अपनी जीपमें बिठाया। फिर भी हमलावरों ने पोलिस से हाथापाई कर सभी संतो को हथियारों से तबतक मारा जब तक उनके प्राण पखेरू नहीं उड़ गये ..बताया ये भी जा रहा है कि पुलिस अगरउन दोनों संतो को और कुछ समय तक पुलिस चौकी के अंदर बैठा कर रखती और कंट्रोल रूम से अतिरिक्त पुलिस बल की मदद मांगती तो उन सभी संतो की जान बच सकती थी। इसी के चलते कहीं न कहीं इस घटना मे महाराष्ट्र पुलिस की भूमिका के ऊपर भी एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।

पुलिस द्वारा बताया गया कि अभी तक 110 लोगों के ऊपर मामलादर्ज किया गया है लेकिन गुंडों पर मामला दर्ज करके थोड़ी ना वापिस इन संतों की जान चलीआएगी इन संतों के शव को देने के लिए भी पुलिस ने बहुत ही सवाल जवाब साधु संतों सेकरवाने की भी खबर सामने आ रही है लेकिन 2 दिन बाद इन साधु संतों का सेव आजत्रंबकेश्वर अखाड़े के संतों को सौंपा गया है। आज इन दोनों संतो के ऊपरत्रंबकेश्वर में समाधि दी गई। हमने पुलिस से इस घटना के बारे में पूछताछ की तोपुलिस द्वारा कोई जानकारी देने से इंकार कर दिया गया।

SOURCEमुंबई
Previous articleJohn Abraham recites poem Mera Bharat Mahaan for medical workers
Next articleरंगोली और बबीता के समर्थन में सामने आईं कंगना
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments