Friday 30 July 2021
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रोहिंग्या उत्तर प्रदेश में बना रहे ठिकाना, चुनाव में ले सकते भाग

ADG ने बताया कि रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर पाना मुश्किल होता है क्योंकि इनके पास आधार कार्ड, वोटर कार्ड व अन्य राशन संबंधी कार्ड मौजूद रहते हैं

अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या को लेकर सुरक्षा एजेंसिया सतर्क हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश में कई रोहिंग्या पकड़े गए हैं। राज्य एटीएस ने ग़ाज़ियाबाद से रोहिंग्या नागरिक आमिर हुसैन और नूर आलम को गिरफ़्तार किया है। दोनों को लखनऊ में पाँच दिन की रिमांड पर लाया गया। इस दौरान पूछताछ में कई अहम बातें सामने आई हैं।

पूछताछ के दौरान पता चला है कि देश में आमिर हुसैन नामक वेंडर है जो अवैध उपायों से रोहिंग्या नागरिकों को भारत में प्रवेश करवाता है। वेंडर दिल्ली के खजूरी ख़ास से गुर्गों से समन्वय स्थापित करता है।

रोहिंग्या और बांग्लादेशी यूपी में बना रहे ठिकाना

ADG लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के अनुसार रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को यूपी में ठिकाना बनाने के लिए प्रेरित किया गया है। विधानसभा चुनाव से पहले इन सभी को राशन कार्ड और पैन कार्ड बनवा कर उनकी स्थाई सदस्यता भी दिलवाई जाती है जिससे यूपी में चुनाव में इनकी भागीदारी रहती है और एक बड़ा वोट बैंक भी तैयार होता है, जिसके लिए इनको अच्छी ख़ासी रक़म दी जाती है।

प्रशांत कुमार ने बताया कि रोहिंग्या इस समय हर विधानसभा क्षेत्र में रह रहे हैं, लेकिन इनकी पहचान कर पाना इस वजह से मुश्किल होता है क्योंकि इनके पास आधार कार्ड और वोटर कार्ड व अन्य राशन संबंधी कार्ड मौजूद रहते हैं जिससे वे आम जनता में घुल-मिल जाते हैं और चुनाव में वोटिंग भी कर सकते हैं।

एटीएस ने इसी साल 6 जनवरी को संत कबीर नगर ज़िले के समर्थन गाँव में बसे रोहिंग्या अज़ीज़उल्लाह को गिरफ़्तार किया था, जिसके बाद 28 फरवरी को अलीगढ़ के कमेला रोड पर रहे मुहम्मद फारुख़ और हसन को पकड़ा था। फिर फारुख़ के भाई शाहिद को 1 मार्च को उन्नाव से दबोचा गया। इसके साथ ही साथ अन्य तार जोड़ते हुए शाहिद के बहनोई जुबेर के बारे में भी जानकारी मिली, लेकिन वह एटीएस के हाथ नहीं लगा।

शाहिद के पास से रु० 5 लाख के साथ भारतीय नागरिकता से जुड़े कई दस्तावेज मिले थे, जो फ़र्ज़ी तरीक़े से बनाए गए थे। इन सब से पूछताछ में बांग्लादेशी रिश्तेदारों की बात सामने निकल कर आई थी और बताया गया था यहाँ वे अपने रिश्तेदारों की मदद से रहने आए थे जिसकी वजह से हज़ारों रोहिंग्या यहाँ आ गए हैं और स्थानीय निवासी बन गए हैं।

रोज़गार के लिए ये प्रदेश के बूचड़खाने में काम करते हैं। अलीगढ़, आगरा, उन्नाव में स्लॉटर हाउस मौजूद हैं, यहां पर ये मोटा पैसा कमाते हैं। इनसे पैसा कमाने के एवज़ में दलाल इनसे कमीशन लेते हैं और इनको इस काम के लिए लगातार लाते रहते हैं।

पीएफआई और रोहिंग्या के बीच साँठ-गाँठ

31 जनवरी 2019 में के विरोध में देशभर में प्रदर्शन और हिंसा हुई, जिसमें रोहिंग्या की भूमिका सामने आई थी। कानपुर में हिंसा भड़काने के आरोप में पीएफआई सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था जिसमें मुहम्मद उमर सैयद, अब्दुल हाशमी, फैजान मुमताज, मोहम्मद वासिम और सरवर आलम आदि रोहिंग्याओं के पीएफआई के संपर्क में होने का दावा किया गया।

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