क्रिप्टो करंसी की राह पर भारतीय रिजर्व बैंक

आरबीआई से संबद्ध ऐसी संस्थाओं को एक निश्चित समय सीमा में वर्चुअल करंसी में डील करने वाले प्रतिष्ठानों से रिश्ता तोड़ना होगा

0
93

अपनी कीमत में आए जबरदस्त उछाल की वजह से बिटकॉइन और इसके जैसी तमाम क्रिप्टो या वर्चुअल करंसी भारत समेत पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गयी हैं। कुछ महीने पहले तक भारत में कुछ चुनिंदा लोगों को ही बिटकॉइन या इसके जैसी अन्य क्रिप्टो करंसी के बारे में कोई जानकारी थी, लेकिन बिटकॉइन को लेकर पिछले दिनों इतनी हलचल मची कि समाचार पढ़ने वाले अधिकांश लोगों को इनके बारे में पता चल गया। दरअसल, मौजूदा समय में डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में वर्चुअल करंसी के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। पेमेंट पैटर्न में आए इस बदलाव के साथ ही प्राइवेट डिजिटल टोकन्स के उभार तथा नोट व सिक्के की बढ़ती लागत जैसे कारणों ने दुनियाभर के बैंकों को डिजिटल करंसी लाने के विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक भी डिजिटल करंसी के महत्व से अनजान नहीं है। इसीलिए इसके साथ ही शीर्ष बैंक खुद अपनी क्रिप्टो करंसी लानत पर भी विचार कर रहा है। जिससे न केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम लाभ उठाया जा सके, बल्कि पेमेंट मॉडल के रूप में देशवासियों को एक वैकल्पिक सुविधा भी मिल सके।

भारतीय रिजर्व बैंक में डिजिटल करंसी जारी करने की संभावना तलाशने के लिए एक अंतरविभागीय समूह का गठन किया है, जो इस मुद्दे पर रिजर्व बैंक को सलाह देगा। विभागीय अधिकारियों का यह समूह डिजिटल करंसी लाने की जरूरत, उसकी संभावनाएं और उसके संभावित खतरों के बारे में अध्ययन करेगा और इसी साल जून के अंत तक अपनी रिपोर्ट बैंक को सौंप देगा। हालांकि इसके पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्चुअल करंसी के उपयोग को लेकर चिंता भी जताई थी। शीर्ष बैंक की ओर से जारी जारी एक बयान में कहा गया था कि ‘वर्चुअल करंसी, जिसे क्रिप्टो करंसी या क्रिप्टो ऐसेट के रूप में जाना जाता है कि वह फाइनेंशियल सिस्टम को ज्यादा एफिशियंट और इन्क्लूसिव बना सकता है, लेकिन इससे कंजूमर प्रोटेक्शन, मार्केट इंटीग्रिटी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे विभिन्न प्रकार की चिंताएं भी पैदा होती हैं।’ बयान जारी करने के बाद शीर्ष बैंक ने वित्तीय संस्थानों को यह हिदायत भी दी थी कि वे बिटकॉइन समेत किसी भी तरह की वर्चुअल करंसी में डील करने वाले व्यक्ति अथवा संस्थाओं से दूरी बनाकर रखें। बैंक के पॉलिसी स्टेटमेंट में कहा गया था कि रिजर्व बैंक ने बिटकॉइन समेत तमाम वर्चुअल करंसी के यूजर्स, होल्डर्स और ट्रेडर्स को इनकी डीलिंग से जुड़े विभिन्न जोखिमों के प्रति लगातार सचेत किया है। इन डिजिटल करंसी से जुड़े जोखिमों को देखते हुए तत्काल प्रभाव से फैसला किया गया है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम से संबंधित कोई भी संस्था ऐसे किसी भी कारोबारी प्रतिष्ठान के साथ कोई सौदा-समझौता नहीं करेगी और उन्हें कोई सर्विस नहीं देगी, जो वर्चुअल करंसी में डील करती है।

आरबीआई से संबद्ध ऐसी संस्थाओं को एक निश्चित समय सीमा में वर्चुअल करंसी में डील करने वाले प्रतिष्ठानों से रिश्ता तोड़ना होगा। आरबीआई ने इस संबंध में अलग से भी एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें क्रिप्टो करंसी में निवेश करने वाले तमाम निवेशकों को इस निवेश से जून तक निकल जाने की बाध्यात्मक सलाह दी गयी थी। इस सर्कुलर के मुताबिक जून के बाद जिस किसी भी व्यक्ति के पास क्रिप्टो करंसी पायी जायेगी, उसे अवैध माना जायेगा और उसके खिलाफ केंद्रीय बैंक मार्केट इंटीग्रिटी और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। इन तमाम बयानों और के बाद अब खुद आरबीआई क्रिप्टो करंसी जारी कर भारतीय नागरिकों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म देने के विकल्प पर विचार कर रही है। यह बात आश्चर्यजनक जरूर है लेकिन वित्तीय मामलों के जानकार इसे समय की जरूरत बताते हैं। जानकारों का कहना है कि बाजार में मौजूद तमाम क्रिप्टो करंसी पर किसी भी देश की सरकार या किसी भी केंद्रीय बैंक का नियंत्रण नहीं है। इसलिए न तो उनकी कीमतों पर किसी प्रकार का नियंत्रण किया जा सकता है और ना ही उनके भविष्य को लेकर कोई निश्चित राय बनायी जा सकती है। लेकिन, यदि कोई केंद्रीय बैंक अपनी क्रिप्टो करंसी जारी करेगा, तो ये काम उस देश के मुद्रा अधिनियम के तहत किया जाएगा। साथ ही उसके एवज में सुरक्षित स्वर्ण भंडार या अन्य किसी सुरक्षित संपत्ति की गारंटी होगी, ताकि उस क्रिप्टो करंसी में निवेश करने वाले या उसके मार्फत लेनदेन करने वाले व्यक्ति के आर्थिक हित सुनिश्चित रहें। जहां तक आरबीआई की बात है, तो वह एक संप्रभु देश का केंद्रीय बैंक है और उसके लिए इस तरह की व्यवस्था करना संभव भी है।

साथ ही आरबीआई की क्रिप्टो करंसी को दुनिया के तमाम देशों से मान्यता मिलने की संभावना भी अधिक होगी, क्योंकि यह एक संप्रभु देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई एक विश्वसनीय और सुरक्षित स्वर्ण या अन्य प्रकार की संपत्ति के भंडार की गारंटी वाली क्रिप्टो करंसी होगी। जबकि अभी प्रचलन में जितनी भी क्रिप्टो करंसीज हैं, उन्हें दुनिया के किसी भी केंद्रीय बैंक ने जारी नहीं किया है और ना ही उनकी गारंटी के रूप में कोई सुरक्षित स्वर्ण या अन्य मुद्रा भंडार की व्यवस्था की गयी है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि आरबीआई द्वारा जारी होने वाली क्रिप्टो करंसी की गारंटी खुद भारत सरकार होगी, जबकि अन्य प्रचलित क्रिप्टो करंसी की गारंटी लेना तो दूर उसे मान्यता देने वाला भी कोई देश नहीं है। बहरहाल, इतना तो तय है कि तमाम कयासों के बावजूद क्रिप्टो करंसी बाजार का धंधा बंद होने वाला नहीं है। डिजिटल पेमेंट मॉड्यूल की दुनिया भर में बढ़ती मांग को देखते हुए अभी कई अन्य देश भी इस तरह की डिजिटल या क्रिप्टो करंसी लाने की बात पर विचार कर सकते हैं। रूस ने तो पिछले साल ही क्रिप्टो रूबल के नाम से अपनी वर्चुअल करंसी लाने का बात कही थी। वहां का केंद्रीय बैंक भी फिलहाल इसकी संभावनाओं और संभावित खतरों का अध्ययन कर रहा है। जल्द ही इस तरह की घोषणा अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से भी सुनने को मिल सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार/योगिता पाठक

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.