बिजली बचत के साथ पर्यावरण की रक्षा

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि एसी का तापमान कम रखने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है

0

केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार को भी बिजली की बढ़ती खपत को लेकर आए दिन परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है। विशेषकर गर्मी के दिनों में गांवो से लेकर महानगरों तक बिजली की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध न होने से बिजली संकट का सामना करना पड़ता है। जबकि वर्तमान में भारत ने बिजली उत्पादन में जापान और रूस को पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान हासिल कर लिया है। इस मामले में चीन पहले स्थान और अमेरिका दूसरे स्थान पर है। पहली बार भारत ने वर्ष 2016-17 के दौरान नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को बिजली का निर्यात किया। अभी केंद्र, राज्य और प्राइवेट सेक्टर को मिलाकर देश में बिजली की कुल उत्पादन क्षमता 3,43,899 मेगावाट है।

इसके बावजूद केंद्र सरकार बिजली की समस्या के समाधान के लिए कई स्तर पर काम कर रही है। पीएम मोदी की पहल पर देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर शत-प्रतिशत एलईडी बल्ब लगाया जाना है। एयरपोर्ट और सरकारी दफ्तरों में हर जगह साधरण बल्ब को हटाकर एलईडी बल्ब लगाने का काम चल रहा है। साथ-साथ लोगों को भी अपने घरों में एलईडी बल्ब लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में सरकार एयर कंडीशनर (एसी) के लिए तापमान का सामान्य स्तर 24 डिग्री नियत करने की सोच रही है। ऐसा करने से बिजली की खपत में छह प्रतिशत तक की कमी लायी जा सकती है। इससे बिजली की बचत होने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा भी हो सकेगी।

आज ग्लोबल वार्मिग, ओजोन परत का क्षरण किसी एक देश की समस्या न होकर वैश्विक समस्या बन चुकी है। उपरोक्त समस्याओं में एसी में इस्तेमाल होने वाला सीएफसी यानी क्लोरो-फ्लोरो कार्बन या एचसीएफसी पर्यावरण के लिए विशेषकर विकासशील देशों के हितों के लिहाज से काफी विनाशकारी है। जाहिर है कि एसी का तापमान कम रखने से सीएफसी भी कम निकलेगी और बिजली की बचत भी होगी। इसीलिए पर्यावरण पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने भी सुझाव दिया है तो कि ग्लोबल वार्मिंग से निपटना है, तो भविष्य में इसके लिए सीएफसी गैसों का ऊत्सर्जन कम करना होगा। मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान 98.6° फॉरेनहाइट या 37° सेल्सियस होता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि एसी का तापमान कितना रखा जाना स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त होगा।

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि एसी का तापमान कम रखने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर 22 डिग्री से कम तापमान रखने से सांस संबंधी बीमीरियों एवं सीने में इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा हो जाता है। इसके अलावा सिर में दर्द, जोड़ों में दर्द और शरीर में ड्राइनेस जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। साथ ही कम उम्र के बच्चों के लिए एसी का कम तापमान खतरनाक होता है। इस तरह तापमान 24 डिग्री नियत कर ऊर्जा की बर्बादी को तो बचाया ही जा सकता है, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी बचा जा सकता है। इसी के मद्देनजर जापान जैसे कुछ देशों में तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रखने के लिये नियम बनाए गए हैं। एसी का तापमान कम रखने का स्वास्थ्य के अलावा दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है, बिजली की बचत का। जिसके चलते केंद्रीय बिजली मंत्रालय आने वाले समय में एयर कंडीशनर का तापमान 24 डिग्री नियत करने पर विचार कर रहा है।

इसके लिए बिजली मंत्रालय के अधीन आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने इसके संदर्भ में एक अध्ययन भी कराया है। यदि ऐसा हुआ तो देशभर में वार्षिक 20 अरब यूनिट बिजली की बचत होगी। एयर कंडीशन के क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने का अभियान शुरू करते हुए बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा है कि एयर कंडीशनर में तापामान ऊंचा रखने से बिजली खपत में छह फीसद की कमी आ जाती है। इसके लिए बिजली मंत्रालय एसी के तापमान नियत रखने के फायदे को लेकर लोगों को जागरूक करने की योजना बना रहा है। आने वाले समय में देश भर में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

इसके बाद एसी कंपनियों के साथ बातचीत कर 24 डिग्री तापमान तय करने पर अमल होगा। सरकार के एक अनुमान के मुताबिक अभी पूरे देश में केवल छह फीसदी घरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल होता है। आने वाले समय में गांव से लेकर शहर हर जगह एसी का उपयोग बढ़ेगा। ऐसे में अनुमान है कि वर्ष 2030 तक सिर्फ एसी के लिए ही 20,000 मेगावाट से अधिक बिजली की जरूरत पड़ सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर घर को 2022 तक चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध करायी जाए। ऐसे में जिस गति से बिजली की मांग दिनों-दिन बढ़ रही है, उसके अनुसार बिजली उत्पादन के साथ-साथ बिजली बचाने के तरीकों पर भी अमल करना होगा।

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.