Friday 1 July 2022
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वेश्यावृत्ति को केवल व्यवसाय बताकर न्यायपालिका ने देश में लाई आर्थिक क्रांति

वेश्यावृत्ति को व्यापार की मान्यता मिलने से सेक्स वर्कर अपनी आय घोषित करेंगी और टैक्स रिटर्न फ़ाइल करेंगी, किराया, भोजन, दारू आदि अनेक खर्च पर छूट मांगेंगी…

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Rakesh Kumar
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Rakesh Kumar is a columnist and insurance consultant with work experience of 37 years

आज सुबह की सैर के दौरान कोई अधिकारी मित्र मिल गए, सैर समाप्त कर हम दोनों पार्क के बाहर चाय की दुकान पर बैठ गए। वे आज अत्यंत प्रसन्न थे। पूछने से पहले ही बताने लगे, “अरे, आपको पता है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने आज दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया! मुझे तो कुछ ज्ञान न था क्योंकि मैं अख़बार सैर करने के बाद ही पढ़ता हूँ। मैं अज्ञानी कुछ बोलूँ इससे पहले ही वे आगे कहने लगे, “सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि वेश्यावृत्ति अपराध न होकर एक व्यापार है।”

मैने कहा कि इसमें क्या बड़ी बात है? भारतीय संस्कृति तो इसे कब से इसे देह व्यापार ही कहती है। वे उखड़ते हुए बोले, “आप नहीं समझ रहे हैं। न्यायालय का कहना है कि इसे व्यापार मानते हुए पुलिसकर्मी अब सेक्स कार्यकर्ता को परेशान न करें उनसे दुर्व्यवहार न करें। ”

दुःख से मैने पूछा, “यानि सेक्स वर्कर के अलावा बाक़ी सबसे पुलिसिया दुर्व्यवहार जारी रहेगा?”

मित्र ने मेरी बात अनसुनी ही कर दी। मैं मूर्ख फिर पूछ बैठा,” इसमें आपका क्या लाभ? आप तो उधर जाते नहीं थे, फिर क्यों बेगानी शादी में दीवाने हुए जा रहे हैं। ”

इस बार वे कुछ अधिक नाराजी से बोले, “आप इतने भोंदू होंगे यह न सोचा था। अरे भाई, जब वेश्यावृत्ति व्यवसाय घोषित हुई है तो अब यह आयकर जाँच की सीमा में आ गया है। आज तक तो सिर्फ़ पुलिसकर्मी ही हफ़्ता खाते थे, काला धन कमाते थे। अब आय व्यय की जाँच का मौक़ा लगेगा। सोचिए कितना बड़ा राजस्व का स्त्रोत खुल जाएगा!”

मेरे दिमाग़ ने अब तेज़ी से दौड़ना शुरू किया। सच में ही यह तो कमाल ही हो गया! अब सेक्स वर्कर अपनी आय घोषित करेंगी और टैक्स रिटर्न फ़ाइल करेंगी। मकान का किराया, भोजन, चाय-नाश्ता, दारू और न लिखे जाने योग्य अनेक खर्च पर छूट मांगेंगी। आयकर अधिकारी सवाल करेंगे कि यह घर तो रहने के लिए काम में लाया गया है। इसे व्यापारिक ख़र्च नहीं माना जा सकता। सेक्स वर्कर न्यायालय जा कर अपील करेंगी। वकील करेंगी। वकीलों की चांदी होगी। कोर्ट घर का इन्स्पेक्शन करेगा। जब समय नहीं होगा तो न्याय मित्र नियुक्त होगा जो न्यायालय की मदद करेगा। तब न्यायालय को पता चलेगा कि घर का व्यावसायिक प्रयोग कितने प्रतिशत हुआ है। चतुर सेक्स वर्कर घर और व्यवसाय को अलग रखेंगी — यानी एक और मकान ख़रीदेंगी और न भी ख़रीदें तो भी उनका कोई आनंदित उल्लसित ग्राहक ख़ुद ही दे देगा। ओह, गृह निर्माण उद्योग के लिए अद्भुत अवसर! देश में कितने नए घर बनेंगे, वातानूकुलन संयंत्र से लेकर अनेक अन्य सुविधाएँ ख़रीदी जाएंगी। उत्पादन बढ़ेगा। सेवक-सेविका रोज़गार पाएँगे। आह उत्सव के इस माहौल में बेचारी ग़रीबी और बेरोज़गारी कहाँ रहेगी? ‘ग़रीबी हटाओ’ तो सब कहते थे, पर आज करके दिखाने का समय आया है।

सेवा के बारे में सोचते ही सेवा कर विभाग याद आ गया। आशा है वह वेश्यावृत्ति की सेवा को मेडिकल की पढ़ाई के साथ साथ ही 18% कर की श्रेणी में रखेगा। सच्चा समाजवाद आएगा, गर्भपात करवाने वाली सेक्स वर्कर और गर्भ गिराने वाले चिकित्सक दोनो ही समान सेवा कर देंगे। इस सेवा कर से हुई आय से सबका विकास साथ साथ हो पाएगा।

जब वेश्यावृत्ति व्यवसाय बन ही गई है तो व्यावसायिक प्रशिक्षण देने वाले आई०आई०एम० और अन्य प्रबंध संस्थान भी क्यों पीछे रहेंगे? शीघ्र ही लॉंच होंगी स्नातकोत्तर डिग्री। वह भी ‘देह व्यापार’ में विशेष योग्यता के साथ। यह व्यवसाय नित्य नई प्रगति करे इसके लिए रिसर्च होगी। प्रोजेक्ट फ़ंडिंग मिलेगी । फंड देने वाले भी ख़ुश, लेने वाले भी ख़ुश!

कोटा और महानगरों के प्रवेश परीक्षा प्रशिक्षण देने वाले केंद्र भी नए कोर्स चालू करने में आगे आएंगे, सफल प्रत्याशी के चित्र मुख्य पृष्ठ पर होंगे। शीर्षक होंगे, “धन की कमी न होने पर भी समाज की सेवा हेतु किया टॉप!”

मैं इन विचारों में होते विकास की कल्पना में इतना डूब गया कि मित्र चाय के पैसे देकर चाय के ठेले से जा ही रहे थे कि चाय वाले ने टोका। हमसे पूछने के लिए उसका सवाल था, “इस क़ानून के आ जाने से अब तो बड़े घर की बेटियाँ भी यह धंधा कर पाएंगी क्योंकि अब यह क़ानूनी हो गया है?”

‘धंधा’ शब्द सुनते ही मित्र अधिकारी बिगड़ कर बोले, “यह सवाल तुम्हारे दिमाग़ में कैसे आया?” चाय वाले ने डरते हुए कहा, “जी, पहले तो मजबूर ग़रीब बेटियाँ, पत्नी, प्रेमिका आदि ज़बरदस्ती लालची माँ, बाप, पति, प्रेमी द्वारा धोके और छल से इसमें धकेली जाती थीं। अब जब यह सम्मानित हो गया है तो बड़े घर की बेटियाँ भी क्यों पीछे रहेंगी।

मित्र तो उत्तर देने से पहले ही भाग खड़े हुए किंतु मेरा मन कह रहा था, “पगले, वे तो न्यायाधीश बनने, पदोन्नति पाने के लिए, राजनैतिक लाभ उठाने के लिए यह सब पहले ही कर लेती है। उनके शोषक यदि पकड़े जाते हैं तो दोनों की आपसी सहमति का कवच काम आता है, वरना पेज 3 फ़िल्म का कथानक बन जाता है। क़ानून की चक्की में अक्सर ग़रीब और मजबूर ही पीसा जाता है।

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