Wednesday 22 September 2021
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कल्याण सिंह का जीवनावसान — सिर्फ़ न्यूज़ की निवापांजलि

राम जन्मभूमि आन्दोलन के अग्रणी योद्धा एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जुलाई की 20 तारीख़ से लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर थे

5 जनवरी 1932 को इस धरती पर आए कल्याण सिंह आज हमारे बीच नहीं रहे। भारतीय राजनीतिज्ञ कल्याण सिंह राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके थे। इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे, लेकिन जिस बात के लिए उन्हें सर्वाधिक याद किया जाता है, वह है श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में उनकी सक्रिय प्रतिभागिता।

राष्ट्रवादी राजनेता के रूप में पहचान बनाने वाले कल्याण सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री तेजपाल लोधी और माता का नाम श्रीमती सीता देवी था।

कल्याण सिंह ने 2 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और कई बार अतरौली के विधानसभा सदश्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं, और साथ ही साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में लोक सभा सांसद और राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

पहली बार कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वर्ष 1991 में बने और दूसरी बार यह वर्ष 1997 में मुख्यमंत्री बने थे। ये प्रदेश के प्रमुख राजनैतिक चेहरों में एक इसलिए माने जाते थे क्योंकि इनके पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना घटी थी।

यह वो दौर था जब भाजपा की जनमानस में स्वीकार्यता कम थी। हालांकि कांग्रेस की लोकप्रियता घट रही थी, कई क्षेत्रीय पार्टियाँ अलग-अलग राज्यों में उसकी जगह ले रही थीं। ऐसे में चार दशक से तुष्टिकरण की राजनीति का साक्ष्य भारतीय समाज कोई ऐसा विकल्प ढूंढ रहा था जो कांग्रेस जितनी ही राष्ट्रव्यापी पार्टी हो। इसलिए अयोध्या वाले उत्तर प्रदेश के साथ-साथ जहाँ-जहाँ राम जन्मभूमि आन्दोलन ने तूल पकड़ा, वहाँ-वहाँ भाजपा ने अपना परचम लहराया। पार्टी या तो सत्ता में ही आ गई या प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जब विश्व हिन्दू परिषद् के आन्दोलन की बागडोर संभाली तो अग्रणी भूमिका उनके ऐसे स्वयंसेवकों ने निभाई जो भाजपा के नेता भी थे। इनमें प्रमुख नाम या चेहरे थे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, इत्यादि जब कि साध्वी ऋतंभरा जैसे ग़ैर-राजनैतिक चेहरे भी आन्दोलन की अगुवाई कर रहे थे।

Obituary: Kalyan Singh (कल्याण सिंह का जीवनावसान — सिर्फ़ न्यूज़ की निवापांजलि)

वैसे कल्याण सिंह के उत्थान के पीछे एक प्रकार का आरक्षण भी था। भाजपा सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की social engineering कोशिश कर रही थी और कल्याण सिंह लोध राजपूत होने के कारण quota के भी हक़दार थे। गौर करने वाली बात यह है कि वह ज़माना कमंडल के साथ-साथ मंडल का भी था।

जून 1991 में कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, पर बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए 6 दिसम्बर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। बाबरी विध्वंस के मुआमले में भाजपा नेताओं का यह रवैया कई विचारकों को हैरान करता है। एक तरफ़ तो उनके activism का यही परिणाम होना था, दूसरी तरफ़ 6 दिसम्बर 1992 को ये सारे के सारे नेता कह रहे थे कि वे शर्मिंदा हैं!

खैर, कल्याण सिंह 1993 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अतरौली और कासगंज से विधायक निर्वाचित हुए। चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरा लेकिन मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी ने गठबन्धन सरकार बनाई। विधान सभा में कल्याण सिंह विपक्ष के नेता बने थे।

कल्याण सिंह सितम्बर 1997 से नवम्बर 1999 तक पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

21 अक्टूबर 1997 को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। कल्याण सिंह पहले से ही कांग्रेस विधायक नरेश अग्रवाल के सम्पर्क में थे और उन्होंने तुरन्त नई पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन किया और 21 विधायकों का समर्थन दिलाया। इसके लिए उन्होंने नरेश अग्रवाल को ऊर्जा विभाग का कार्यभार सौंपा। इस तरह कल्याण सिंह भाजपा के उस turning point के प्रमुख खिलाड़ी रहे जब पार्टी ने ठान लिया कि केवल आदर्शवाद के सहारे वे कभी सत्ता के भागीदार नहीं हो सकते।

इस दौर में बताया जाता है कि कल्याण सिंह के निजी जीवन की कुछ घटनाओं ने उनके करियर को दाँव पर लगा दिया। पर भारतीय पत्रकारिता में अस्मिता की अहमियत को बरक़रार रखते हुए हम किसी प्राइवेट matter का ज़िक्र नहीं करेंगे।

दिसम्बर 1999 में कल्याण सिंह ने पार्टी छोड़ दी और जनवरी 2004 में पुनः भाजपा से जुड़े। 2004 के आम चुनावों में उन्होंने बुलंदशहर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा। 2009 में उन्होंने पुनः भाजपा को छोड़ दिया और एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सांसद चुने गये।

सिंह ने 4 सितम्बर 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली। उन्हें जनवरी 2015 में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया।

कल्याण सिंह इस महीने की जुलाई की 20 तारीख़ से बीमार चल रहे थे और लखनऊ के SGPGI अस्पताल में लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर थे। पिछले दो दिनों से उनका हाल पूछने भाजपा और संघ के नेताओं का ताँता लगा हुआ था। ‘परिवार’ के एक अनमोल सदस्य के चले जाने से यहाँ अवसाद का माहौल है।

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আপাতত দায়িত্ব সামলাবেন শিক্ষাভবনের অধ্যক্ষ।

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