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Saturday 11 July 2020

सोशल मीडिया के महारथी हैं पीएम मोदी, विश्व में फैले हैं करोड़ों फालोवर्स

दिल्ली में भाजपा मुख्यालय के अलावा , राज्यों के पार्टी कार्यालयों में भी आईटी टीम रात-दिन काम करने लगी हैं। उनके आदेशानुसार पार्टी के सभी सांसदों व विधायकों, पार्षदों से लेकर पार्टी के ऊपर से नीचे तक के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तक को अपना फेसबुक, वाट्सएप एकाउंट व ग्रुप बनाना पड़ा है

नई दिल्ली—प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तबसे ही उनके राजनीतिक लड़ाई का एक बहुत ही कारगर हथियार सोशल मीडिया रहा है। गुजरात के एक आईटी विशेषज्ञ का कहना है कि जब मोदी जी मुख्यमंत्री थे तभी उन्होंने अहमदाबाद से सटे सानंद में एक भवन में लगभग 350 से अधिक लड़कों की टीम इसके लिए लगा रखी थी। अब तो वह देश के प्रधानमंत्री हैं । दिल्ली में भाजपा मुख्यालय के अलावा , राज्यों के पार्टी कार्यालयों में भी आईटी टीम रात-दिन काम करने लगी हैं। उनके आदेशानुसार पार्टी के सभी सांसदों व विधायकों, पार्षदों से लेकर पार्टी के ऊपर से नीचे तक के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तक को अपना फेसबुक, वाट्सएप एकाउंट व ग्रुप बनाना पड़ा है। रोज गुड मार्निंग से लेकर गुडनाइट तक कहना पड़ रहा है। निर्देशानुसार ‘लाइक्स’ बढ़ाना पड़ रहा है।

उ.प्र. विधानसभा चुनाव के बाद अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए भी प्रत्याशियों के चयन का एक पैमाना उसके सोशल मीडिया में सक्रियता का भी रखा गया है। मोदी द्वारा सोशल मीडिया को चुनावी व राजनीतिक लड़ाई का एक प्रमुख हथियार बना देने का ही नतीजा है कि इस (सोशल मीडिया ) पर वह (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) विश्व के दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता हो गये हैं। उनको उनके ट्विटर पर 4 करोड़ 21 लाख लोग फॉलो कर रहे हैं। लगभग 4 करोड़ 50 लाख लोग फेसबुक पर फॉलो कर रहे हैं, लगभग डेढ़ करोड़ लोग इंस्टाग्राम पर फॉलो कर रहे हैं। इन तीन के अलावा उनके पास नमो एप और माई गांव की वेबसाइट भी है। उनके अति विश्वासपात्र भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को सोशल मीडिया में लगभग 2 करोड़ लोग फालो कर रहे हैं। इससे इन्हें अपनी सोच, विचार प्रचारित करने में तो मदद मिलती ही है, फीड बैक भी मिलते हैं।

बावजूद इसके सर्वोच्च न्यायालय में एससी-एसटी एक्ट मामले में तथाकथित संशोधन के मुद्दे पर दलित आंदोलन एक झटके में पूरे देश में कैसे फैल गया और बिना किसी नेता की अपील के ही पूरे देश में, बड़े शहरों में, नगरों, कस्बों में , इतनी अधिक संख्या में दलित युवक कैसे सड़कों पर आ गये, यह केन्द्र सरकार के मालिकान से लगायत खुफिया एजेंसियों तक के लिए गहन मनन का विषय बन गया है। कहा जाता है कि यूरोप व अमेरिका में रहने वाले, बड़ी आईटी कम्पनियों में काम करने वाले कुछ दलित युवकों ने कुछ वर्ष पहले अन्दर-अन्दर, बिना किसी शोर-शराबे के अपना दलित नेटवर्क बनाना शुरू किया, जो अब लगभग 300 एनआरआई दलित का मजबूत समूह हो गया है। उनके लिंक भारत में पढ़ रहे मेधावी दलित छात्रों से बन गये हैं। इन छात्रों के आईकान विदेश में रहने वाले वे 300 आईटी अभियंता, प्रबंधक होते जा रहे हैं। उनके ही एक संदेश पर महज 24 से 48 घंटों में देश भर में इतना बड़ा देश व्यापी प्रदर्शन हुआ। सो अब यह कहा जाने लगा है कि क्या मोदी व शाह को उनके फालोवर्स देश के हालात का कुछ फीड बैक नहीं देते ? क्या फालोवर्स वही फीडबैक दे रहे हैं जो उनके नेताओं को पसंद हैं?

हिन्दुस्थान समाचार

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