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Wednesday 1 December 2021

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PMCH में ऑक्सिजन घोटाला? हाई कोर्ट — ‘भगवान भी माफ़ नहीं करेंगे’

कोर्ट मित्र ने इस बात की जानकारी दी है कि PMCH में 21 अप्रैल से दो मई के बीच 150 सिलिंडर की ज़रूरत थी जबकि वहाँ 348 ऑक्सिजन सिलिंडर की खपत हुई

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कोरोनावायरस महामारी के इस दौर में भी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुछ और ‘खेल’ चल रहा है। PMCH में जितने ऑक्सिजन की खपत हो रही है, उससे कई गुणा अधिक खपत का हिसाब दिया जा रहा है। पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी जाँच कमेटी ने इसे पकड़ा है।

पटना हाई कोर्ट में PMCH में ऑक्सिजन खपत की रिपोर्ट पेश की गई। कोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट मित्र (amicus curiae) अधिवक्ता मृगांक मौली ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है कि PMCH में 21 अप्रैल से दो मई के बीच 150 सिलिंडर की ज़रूरत थी जबकि वहाँ 348 ऑक्सिजन सिलिंडर की खपत हुई। कोर्ट मित्र ने हाईकोर्ट से सिफ़ारिश की है कि PMCH में ऑक्सिजन ऑडिटिंग एक स्वतंत्र निकाय से कराने की ज़रूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हाईकोर्ट के आदेश का सही अनुपालन नहीं हो पाएगा।

हाइलाइट्स:

  • बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में गड़बड़ी का मामला
  • PMCH में ऑक्सिजन की ज़रूरत से कई गुना अधिक खपत
  • लापरवाही के कारण ऑक्सिजन की कालाबाजारी का शक गहराया
  • पटना HC में पेश PMCH में ऑक्सिजन खपत रिपोर्ट से बात बाहर आई

रिपोर्ट में PMCH के डॉक्टरों से आंकड़े इकट्ठे कर कोर्ट मित्र ने कुछ सनसनीखेज बातें बताई हैं। एक दिन के चार्ट के अनुसार वहां कोविड मरीज़ों की संख्या 127 थी। उनमें नॉर्मल रेस्पिरेटरी वाले 125 मरीज़ (रोज़ाना 1 सिलिंडर) और 2 मरीज़ गम्भीर रेस्पिरेटरी (रोज़ाना 3-4 सिलिंडर वाले) थे। यानि 24 घंटे में उन 127 मरीज़ों को ज्यादा से ज्यादा 150 सिलिंडर की ही ज़रूरत थी लेकिन चार्ट के अनुसार उनपर 348 सिलिंडर की खपत की गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि किस मरीज़ पर कितने ऑक्सिजन सिलिंडर की खपत की गई, इसका कोई रिकॉर्ड जांच दल के सामने पेश नहीं किया गया।

न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने इस मामले में कोर्ट का सहयोग करने के लिए कोर्ट मित्र को दायित्व सौंपा था। इससे पहले कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में साफ कहा है कि एनएमसीएच में कोविड के मरीज़ों की संख्या ज्यादा है लेकिन कोविड मरीज़ों के लिए ऑक्सिजन की आपूर्ति और खपत PMCH में ज्यादा कैसे है?

PMCH में ऑक्सिजन सिलिंडर की कालाबाज़ारी का शक

ऑक्सिजन सिलिंडर की कालाबाजारी की आशंका जताते हुए कोर्ट ने डॉ उमेश भदानी की तीन सदस्यीय एक्पर्ट कमेटी और इस मामले में नियुक्त हुए कोर्ट मित्र मृगांक मौली से आग्रह किया था कि वे PMCH का दौरा कर कोर्ट को सही जानकारी दें। कोर्ट मित्र ने विशेषज्ञ कमेटी के साथ PMCH का दौरा 1 मई को किया। वहाँ तीन बातें स्पष्ट हुईं। PMCH में मुख्यत: डी टाइप ऑक्सिजन सिलिंडर का इस्तेमाल होता है, जिसमें प्रति सिलिंडर 7 हजार क्यूबिक लीटर (7 एमटी) गैस रहती है।

अस्पताल के विभिन्न वार्ड में कोविड सहित अन्य ऑक्सिजन की ज़रूरतमंद मरीज़ों में 99% नॉर्मल रेस्पिरेशन वाले मरीज़ थे जिन्हें खून में नॉर्मल ऑक्सिजन की सेचुरेशन स्तर पाने के लिए 5 लीटर/मिनट की दर से रोज़ाना लगभग एक सिलिंडर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। वो भी तब जबकि लगातार ऑक्सिजन सिलिंडर से ही सांस लेते रहें। एक फीसदी मरीज़ ही कोविड के गंभीर मरीज ऐसे मिले, जिन्हें अपने खून में नार्मल ऑक्सिजन लाने के लिए 15 लीटर/मिनट ऑक्सीजन की दर से रोज़ाना 3 सिलिंडर की ज़रूरत होती है।

PMCH के क्रिटिकल वार्ड में 30 अप्रैल को नार्मल रेस्पिरेशन वाले (5 लीटर प्रति मिनट) मात्र 13 मरीज़ों को जहां ऑक्सिजन सिलिंडर लगा हुआ था और उनसे बीच-बीच में ऑक्सिजन मास्क हटा भी लिया जाता था। इसलिए अमूमन उन पर एक दिन में जहां 13 सिलिंडर खर्च होने चाहिए थे, वहां 120 सिलिंडरों की खपत दिखाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात डॉक्टरों की शिकायत थी कि अधिकांश सिलिंडरों में स्टैंडर्ड प्रेशर (150 केजी/स्क्वायर सेंटीमीटर) से कम (120-130 यूनिट) ही पाया गया था।

प्रसूति रोग वार्ड में मात्र तीन मरीज़ों को ही ऑक्सिजन दिया गया था और उन तीनों की खपत एक दिन में 32 ऑक्सिजन सिलिंडर दिखाया गया था। ईएनटी विभाग में 23 मरीज़ों पर 63 ऑक्सिजन सिलिंडर की खपत दिखाया गया। टाटा वार्ड में 48 मरीज़ों के लिए जहां अधिकतम 50 सिलिंडरों की ज़रूरत थी, वहां एक दिन में 143 सिलिंडर खर्च हो गए।

ऑक्सिजन आपूर्ति करने वाले ठेकेदार कम्पनियों की कोई सुचारु व्यवस्था नहीं है। अस्पताल प्रशासन उन ठेकेदारों के मुंशी पर ऑक्सिजन सिलिंडर के लिए निर्भर रहता है। यहां तक कि प्रेशर स्विच एब्सॉर्बशन प्रणाली से गैस उत्पादन के लिए ऑक्सिजन प्लांट को बंद पाया गया। 2 मई तक उस प्लांट से ऑक्सिजन उत्पादन शुरू नहीं हुआ था।

सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट आज नहीं खड़ा होगा तो भगवान भी माफ़ नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी को सही मान आगे कोर्ट बढ़ते चला गया लेकिन हकीकत कुछ और ही निकला।

राज्य सरकार ने गत वर्ष 26 नवंबर को कोर्ट को बताया था कि कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए सारी व्यवस्था कर ली गई है। लेकिन आज पता चल रहा है कि सरकारी तैयारी क्या है? कोर्ट ने कहा कि ऑक्सिजन आपूर्ति में दिक्कत क्यों हो रही है?

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