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Wednesday 22 January 2020

कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘हार’ के बाद बौखलाए पाकिस्तानी

क्या कश्मीर के विषय पर दुनिया का साथ न मिलने पर बौखलाया पाकिस्तान अब उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जॉन्ग-उन के उन्माद की हद तक जाने को तैयार है?

नई दिल्ली | इन दिनों पाकिस्तानी न्यूज़ चैनलों पर कश्मीर के विषय में अपनी संजीदा राय रखने के बजाय पैनेलिस्ट अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। वजह है 17 अगस्त की वो बंद कमरे वाली बैठक जो पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने से और चीन के दबाव में आ कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आयोजित की। बैठक के बाद कोई औपचारिक घोषणा नहीं होनी थी, यह बता दिया गया था। पाकिस्तानी इसलिए बौखला गए हैं कि बैठक में हुई बातचीत का कोई लेखा जोखा भी मौजूद नहीं है!

यह बताते हुए कि सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों में से चार और 10 अस्थायी सदस्यों में से नौ भारत के पक्ष में और पाकिस्तान के विरुद्ध खड़े हुए दिखे, पाकिस्तानी कूटनीतिज्ञ आग़ा ज़फ़र हिलाली ने जीएनएन चैनल पर एक चर्चा के दौरान कहा कि भारत की आलोचना या धारा 370 को वापस बहाल करने का आग्रह तो दूर की बात है, सुरक्षा परिषद ने भारत को जम्मू-कश्मीर से कर्फ़्यू हटाने तक को नहीं कहा!

हिलाली ने इस बात की ख़ैर मनाई कि भारत ने लद्दाख पर भी फ़ैसला लिया वर्ना चीन भी पाकिस्तान का साथ नहीं देता!

इसके बाद पैनल पर मौजूद इमरान याक़ूब ख़ान ने जो कहा उसे प्रलाप का ही दर्जा दिया जा सकता है। यह बात किसी मामूली न्यूज़ ऐन्कर ने कही होती तो इसे चांद मुहम्मद जैसे बेहूदा पत्रकार का अटपटा व्हवहार (जिससे बजरंगी भाईजान फ़िल्म का एक सीन प्रेरित है) समझकर नज़र अन्दाज़ किया जा सकता था। पर यहाँ एक अनुभवी सुरक्षा मामलों के जानकार ने कहा कि काश पाकिस्तान जनूबी (उत्तर) कोरिया की तरह बर्ताव करता तो दुनिया के शक्तिशाली देश झक मार कर कश्मीर के मुद्दे पर उसका साथ देते!

स्थिति को संभालने की कोशिश में ऐन्कर समीना पाशा ने पूछा कि क्या पाकिस्तान को “ग़ैर-ज़िम्मेदारी का मुज़ाहिरा” करना चाहिए? फिर भी उनके सुरक्षा विशेषज्ञ पूरी तरह नहीं संभले। बल्कि अपने वज़ीर-ए-आज़म इमरान ख़ान को किम जॉन्ग-उन होने से किसी तरह बचा लिया। उन्होंने कहा कि “अपने हक़ के लिए न लड़ने से ज़्यादा ग़ैर-ज़िम्मेदाराना क्या हो सकता है?”

बाक़ी चर्चा में वही बातें दोहराई गईं जिसकी घुट्टी हर पाकिस्तानी को बचपन से पिलायी जाती है कि कैसे भारत ने कश्मीर पर क़ब्ज़ा किया और कश्मीरी अवाम भारत में कितनी त्रस्त है!

यहाँ महत्त्वपूर्ण बात सिर्फ़ यह थी कि पूर्व राजदूत हिलाली ने माना कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में मात खाई है और यह विनम्रता के साथ इमरान ख़ान को अपने देश की जनता के सामने मान लेना चाहिए जैसे जमाल अब्दल नासिर ने इज़राइल से हारने के बाद अपनी अवाम के समक्ष मान लिया था।

यह केवल एक चैनल की बात नहीं है। पाकिस्तान के तमाम टीवी चैनलों पर इस वक़्त मातम का माहौल है। हर चर्चा में हाय-तौबा मची हुई है। इमरान ख़ान पर खिसिया कर कई पाकिस्तानी पत्रकार और नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्तुतिगान कर रहे हैं यह कहते हुए कि देखो, पाकिस्तान को भी एक ऐसा रहनुमा (नेता) चाहिए!

भारत की मीडिया से संबंधित एक विषय भी सामने आ रहा है। अधिक से अधिक पाकिस्तानी चैनल NDTV के कश्मीर पर किए गए कार्यक्रमों का हवाला देते हुए यह दावा कर रहे हैं कि भारत के पत्रकार भी इस मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़े हैं!

Surajit Dasgupta
Surajit Dasgupta
The founder of सिर्फ़ News has been a science correspondent in The Statesman, senior editor in The Pioneer, special correspondent in Money Life and columnist in various newspapers and magazines, writing in English as well as Hindi. He was the national affairs editor of Swarajya, 2014-16. He worked with Hindusthan Samachar in 2017. He was the first chief editor of Sirf News and is now back at the helm after a stint as the desk head of MyNation of the Asianet group. He is a mathematician by training with interests in academic pursuits of science, linguistics and history. He advocates individual liberty and a free market in a manner that is politically feasible. His hobbies include Hindi film music and classical poetry in Bengali, English, French, Hindi and Urdu.

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