Sunday 28 February 2021
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बंगाल प्रवेश के लिए ममता के विरोधी अब्बास सिद्दीक़ी की शरण में ओवैसी

ओवैसी-सिद्दीक़ी बैठक की ख़बर से बंगाल के मुसलमान नेताओं और टीएमसी का विचलित होना दिख रहा है पर ऊपर से सब कह रहे हैं कि कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता

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पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई के महीनों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) भी दाव आजमाने की तैयारी कर रही है। बंगाल में ओवैसी की एंट्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किल बन सकती है। ओवैसी ने 3 जनवरी को बंगाल के एक लोकप्रिय युवा मुसलमान नेता के शरण में जा पहुंचे।

कल बंगाल पहुंचे ओवैसी ने हाल के महीनों में सत्तारूढ़ पार्टी के सबसे मुखर आलोचक के रूप में उभरने वाले अब्बासुद्दीन सिद्दीक़ी से हुगली में मुलाक़ात की। दो घंटे की बैठक के बाद ओवैसी ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी सिद्दीक़ी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। वही यह तय करेंगे कि AIMIM कैसे चुनाव लड़ेगी।  

सिद्दीक़ी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने कहा कि अपने अगले क़दम की जल्द घोषणा करेंगे। बैठक की ख़बर से मुसलमान नेताओं और टीएमसी मंत्रियों के बीच प्रतिक्रिया शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी का एकमात्र उद्देश्य मुसलमान वोटों को विभाजित करना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद करना है। भाजपा ने 294 विधानसभा सीटों वाली विधानसभा चुनाव में ‘अबकी बार 200 के पार‘ का मंत्र कार्यकर्ताओं को दिया है।

अब्बास सिद्दीक़ी ने हाल के महीनों में टीएमसी पर अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी करने का आरोप लगया है। साथ ही यह भी कहा कि ममता ने मुसलमानों को सिर्फ़ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है।

सिद्दीक़ी परिवार के अन्य सदस्यों में से विशेष रूप से बुजुर्गों में सबसे प्रमुख और अतीत में सीपीआई (एम) और टीएमसी को मदद करने वाले टोह सिद्दीक़ी ने ओवैसी की यात्रा पर चुप्पी बनाए रखी। अब्बास सिद्दीक़ी के बड़े चचेरे भाई में से एक ने कहा, “फुरफुरा शरीफ़ के लोग इस तरह से राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकते।” 

फुरफुरा शरीफ़ पीर अबू बक्र सिद्दीक़ी के मक़बरे के आसपास बना है। यहाँ 1375 में निर्मित एक मस्जिद भी है। फुरफुरा शरीफ़ उर्स त्योहार और पीर को समर्पित वार्षिक मेले के दौरान देश भर से लाखों लोगों को आकर्षित करता है।

ओवैसी ने बैठक के बाद मीडिया को बताया, “AIMIM अब्बास सिद्दीक़ी के पीछे खड़ा होगा। हम उनके साथ काम करेंगे और उन्हें मज़बूत करेंगे। मैंने सिद्दीक़ी को सभी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ने का फ़ैसला किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि बिहार में हमने जो हासिल किया है, उसके मुक़ाबले हमारा प्रदर्शन यहां भी तुलनात्मक होगा। केवल अल्पसंख्यक वोट हमारा लक्ष्य नहीं है। हम आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए भी लड़ना चाहते हैं। अगर कोई भाजपा को रोक सकता है तो वह सिद्दीक़ी है।”

बंगाल की मुसलमान आबादी 2011 की जनगणना के दौरान 27.01% थी और अब बढ़कर लगभग 30% होने का अनुमान है। मुसलमान आबादी मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद (66.28%), मालदा (51.27%), उत्तर दिनाजपुर (49.92%), दक्षिण 24 परगना (35.57%), और बीरभूम (37.06%) जिलों में केंद्रित है।

दार्जिलिंग, पुरुलिया और बांकुरा में मुसलमानों की आबादी 10% से भी कम है। भाजपा ने पिछले साल अधिकांश लोकसभा सीटें यहीं से जीती थीं।

AIMIM की अधिकांश नई शाखाएं मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर में स्थित हैं, जबकि सिद्दीक़ी के अनुयायी पूरे दक्षिण बंगाल में फैले हुए हैं।

भाजपा और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के आई-पैक के सर्वेक्षणों के मुताबिक़ मुसलमान वोटों में स्विंग 100 से अधिक सीटों पर चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है। 2019 में लोकसभा की 42 सीटों में से 18 पर भाजपा की जीत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2021 की चुनावी तैयारियों के लिए प्रशांत किशोर से करार किया।

टीएमसी सरकार में मंत्री और बंगाल के सबसे प्रमुख मुसलमान संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेता सिद्दीक़ुल्ला चौधरी ने कहा कि ओवैसी का इस राज्य की राजनीति में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, “AIMIM का संबंध बंगाल से नहीं है। ये मुसलमान में विभाजन पैदा करने की रणनीति है, लेकिन यह काम नहीं करेगा। इसके अलावा वामपंथी शासन के दौरान राजनीतिक झड़पों में हजारों मुसलमान मारे जाने पर अब्बास सिद्दीक़ी कहां थे? मुझे यक़ीन है कि सिद्दीक़ी परिवार के अन्य सदस्य अब्बास का समर्थन नहीं करेंगे।”

शहरी विकास मंत्री फ़िरहाद हाकिम ने कहा, “न तो सिद्दीक़ी और न ही AIMIM बंगाल पर शासन कर सकते हैं। वे केवल भाजपा की मदद कर सकते हैं। हमने यह उत्तर प्रदेश और बिहार में होता देखा है। ”

एक रैली के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, “ओवैसी किसी भी पार्टी में जा सकते हैं या कहीं भी चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा चिंतित नहीं है, तृणमूल चिंतित है क्योंकि वह मुसलमान वोट बैंक को अपनी संपत्ति मानता है। अगर टीएमसी ने वास्तव में मुसलमानों के कल्याण के लिए काम किया है तो इसे चिंतित क्यों होना चाहिए? “

वहीं ओवैसी ने भाजपा से सांठगांठ के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनका या उनकी पार्टी का भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “AIMIM ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा और फिर भी भाजपा ने 18 सीटें जीतीं। यह कैसे हुआ? ममता बनर्जी अपनी पार्टी का प्रबंधन भी नहीं कर सकती हैं। उनके विधायक और सांसद हर दिन भाजपा में शामिल हो रहे हैं। हमारा उद्देश्य भाजपा को रोकना है।”

मुसलमान-बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेरहमपुर सीट से तीन बार के कांग्रेस विधायक मनोज चक्रवर्ती ने कहा, “ओवैसी भाजपा के एजेंट हैं। उनका एकमात्र काम मुसलमान वोटों का विभाजन करना है।”

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