सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों की हालत पिछले कुछ समय से लगातार दयनीय होती जा रही है। हालत यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पब्लिक सेक्टर के कई बैंकों को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन लिस्ट (पीसीए) में डालना पड़ा है। प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन लिस्ट में डाले जाने का मतलब इन बैंकों की हालत सुधारने के लिए उन पर कई तरह की बंदिशें लगाना है। ऐसी बंदिशों में बैंकों के गैरजरूरी खर्च पर रोक लगाने से लेकर लागत घटाने के उपायों का अनुपालन करना तक शामिल है। इन बैंकों की हालत सुधारने के लिए आरबीआई ने इनकी लेंडिंग पर कुछ बंदिशें लगा दी हैं। इसके अलावा उन्हें कॉस्ट घटाने और कई स्तरों पर गैरजरूरी खर्चा को रोकने का आदेश दिया है। लेकिन परेशानी ये है कि गैरजरूरी खर्च रोकने के नाम पर इन बैंकों ने सबसे पहले अपने एटीएम को ही बंद करना शुरू कर दिया है।

पीसीए लिस्ट में डाले गए मुसीबतजदा पब्लिक सेक्टर बैंकों ने धड़ाधड़ अपने एटीएम को बंद करने का तरीका अपनाया है। इन बैंकों का मानना है कि एटीएम के संचालन से लगातार उनकी लागत बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि पीसीए लिस्ट में शामिल बैंक अपने एटीएम का शटर गिराने में लग गये हैं। खर्च कम करने और लागत घटाने की कोशिश में जो बैंक अपने एटीएम बंद कर रहे हैं, उनमें इंडियन ओवरसीज बैंक, केनरा बैंक, यूको बैंक, देना बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कॉरपोरेशन बैंक जैसे प्रतिष्ठित बैंक शामिल हैं। एटीएम को बंद करने से इन बैंकों के प्रतिस्पर्द्धी बैंकों को ज्यादा कैश विड्रॉवल पॉइंट्स मुहैया करा कर अपना मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद मिल रही है। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के जिन 11 बैंकों को पीसीए लिस्ट में डाला गया है, उनमें आठ बैंकों ने अपने एटीएम की संख्या में काफी कमी की है। एटीएम की संख्या में सबसे ज्यादा कटौती इंडियन ओवरसीज बैंक ने की है। इसके एटीएम की संख्या अप्रैल 2017 में 3,500 थी, जो अब घटकर इस साल अप्रैल में 3,000 रह गई है। इंडियन ओवरसीज बैंक में अपने कुल 15 फीसदी एटीएम का संचालन बंद कर दिया है, जबकि यूको बैंक और केनरा बैंक ने लगभग 7.5 एटीएम का संचालन करना बंद कर दिया है।

पीसीए लिस्ट में शामिल बैंकों ने पिछले साल कुल 1035 एटीएम पॉइंट्स बंद किए थे। मजे की बात तो यह है कि सरकारी बैंकों के इतने एटीएम बंद होने के बावजूद कैश विड्रॉवल पिछले साल के मुकाबले 22 फीसदी ज्यादा हुआ। इसी तरह देश भर में सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों के एटीएम की कुल संख्या में भी पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी हुई। हालांकि यह बढ़ोतरी महज 107 एटीएम की ही रही। फिलहाल पूरे देश में 2,07,920 एटीएम पॉइंट्स काम कर रहे हैं, जबकि पिछले साल इनकी संख्या 2,07,813 पॉइंट्स की थी। इस आंकड़े से साफ है कि पीसीए लिस्ट में शामिल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जहां अपनी लागत घटाने के लिए अपने एटीएम पॉइंट्स को बंद कर रहे हैं, वहीं प्राइवेट सेक्टर के बैंक अपने नये एटीएम खोल रहे हैं। इसे इस तरह भी देखा जा सकता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के जिन बैंकों ने अपने एटीएम बंद किए, उनकी भरपाई दूसरे बैंकों ने अपने एटीएम खोलकर पूरी कर दी। इसी तरह कैश विड्रॉवल में 22 फीसदी की बढ़ोतरी होने की वजह ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के तेज होने को माना जा रहा है। इसे एक अच्छा संकेत जरूर माना जा सकता है, लेकिन कुछ खास बैंकों के एटीएम की संख्या में कमी होना बैंकिंग व्यवसाय के लिहाज से अच्छा नहीं माना जा सकता। दरअसल, एक एटीएम की लागत लगभग ढाई लाख रुपये होती है, जबकि उसका ऑपरेशनल कॉस्ट साढ़े चार से पांच लाख रुपये तक होता है। एटीएम कैश लिमिट के नियमों के मुताबिक अगर ये लिमिट बीस लाख रुपये की है तो बिना किसी रिटर्न के ही बैंकों पर लागत का इतना बोझ अपने हर एटीएम के संचालन की वजह से बढ़ जाता है। इसके अलावा कैश मैनेजमेंट और अपने तथा दूसरों के नेटवर्क पर बैंक के उपभोक्ताओं को फ्री ट्रांजैक्शन ऑफर करना भी बैंकों के लिए भारी साबित होता है। इसीलिए अपना लागत कम करने के चक्कर में बैंक सबसे पहले उन इलाकों के एटीएम को ही बंद करना बेहतर समझते हैं, जहां कैश ट्रांजैक्शन कम होता है। बैंकों ने तो अपने कई एटीएम का संचालन बंद करके अपनी लागत कम करने का उपाय कर दिया है, लेकिन इससे इन बैंकों के उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ सकती है।

फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा होने के बावजूद अभी भी ज्यादातर उपभोक्ता कैश की निकासी के लिए अपने बैंक के एटीएम का ही उपयोग करना चाहते हैं। बैंकिंग सेक्टर ने सीमित फ्री ट्रांजेक्शन के बाद चार्जेबल ट्रांजेक्शन का प्लान लागू करके उन ग्राहकों की सिरदर्दी ज्यादा बढ़ा दी है, जो महीने में कई बार एटीएम का उपयोग करते हैं। बैंकों की लागत को घटाया जाना जरूरी है, लेकिन इस क्रम में इस बात पर भी ध्यान देना जरूरी है कि किसी भी स्थिति में बैंक के उपभोक्ताओं की परेशानी न बढ़ जाये। आरबीआई को इस दिशा में ध्यान अवश्य ही देना चाहिए ताकि सबसे भरोसेमंद समझे जाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के उपभोक्ताओं को एटीएम की परेशानी से बचने के लिए निजी क्षेत्र के बैंकों के फंदे में न फंसना पड़े।

Leave a Reply