Friday 23 October 2020

चीन से रिश्वत ले रहे ओली, स्विस अकाउंट में 41.34 करोड़ रुपए

नई दिल्ली: चीन कमजाेर अर्थव्यवस्था वाले देशों के भ्रष्ट नेताओं काे अपने चंगुल में फंसा कर उन पर अपना नियंत्रण करना चाहता है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों में चीन अपनी विस्तारवादी नीति के मंसूबे दिखा चुका है।

ग्लोबल वॉच एनालिसिस की हालिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि उसने नेपाल में भी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के जरिए घुसपैठ की है। इसके लिए बाकायदा ओली को रिश्वत भी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ओली की संपत्ति पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है और उन्होंने दूसरे देशों में भी काफी संपत्तियां खरीद रखीं हैं, जिसके बदले में उन्होंने चीन के कई बिजनेस प्लान को नेपाल में लागू कराया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री ओली का स्विट्जरलैंड के जेनेवा स्थित मिराबॉड बैंक में भी अकाउंट है। इस खाते में करीब 41.34 करोड़ रुपए जमा हैं। उन्होंने यह रकम लॉन्ग टर्म डिपॉजिट और शेयर्स के तौर पर इन्वेस्ट की हुई है। इससे ओली और पत्नी राधिका शाक्य को सालाना करीब 1.87 करोड़ रुपए का मुनाफा भी मिल रहा है।

नेपाल और चीन के रिश्ते मजबूत होने का कारन उनकी पार्टी भी है। नेपाल में इस वक़्त नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी है तो वहीं चीन में भी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है। चीन नेपाल में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। कुछ वक़्त पहले यह भी खबर आई थी की नेपाल की प्राइमरी स्कूलों में चीनी भाषा पढाई जाएगी

चीन छोटे छोटे देशों में इंफ्रास्ट्रक्टर बनाने के नाम पर बड़े बड़े निवेश करता है। पाकिस्तान में चाइना पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर और श्रीलंका में कई पोर्ट डेवेलोप करने जैसे बड़े निवेश चीन की तरफ से किये गए है।

ओली ने 2015-16 में अपने पहले कार्यकाल में कंबोडिया के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में निवेश किया था। उस समय नेपाल में चीन के राजदूत वु चुन्टाई ने उनकी मदद की थी। ये सौदा ओली के करीबी बिजनेसमैन अंग शेरिंग शेरपा ने तय करवाया था। सौदे में कंबोडिया के प्रधानमंत्री हूं सेन और चीन के राजनयिक बो जियांगेओ ने भी मदद की थी।

दिसंबर 2018 में डिजिटल एक्शन रूम बनाने का करार चीनी कंपनी हुवावे को दिया। मई 2019 में नेपाल टेलीकम्युनिकेशन ने हांगकांग की चीनी कंपनी के साथ रेडियो एक्सेस नेटवर्क तैयार करने का करार किया। इसी साल चीन की कंपनी जेटीई के साथ 4 जी नेटवर्क लगाने का सौदा भी हुआ। यह दोनों प्रोजेक्ट 1106 करोड़ रुपए की लागत से पूरे किए जाने थे, हालांकि इनके ठेके देने के तरीके पर भी सवाल उठे थे।

मई 2019 में जब नियमों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से चीनी कंपनियों को करोड़ों के ठेके दे दिए गए। ओली की इन्हीं करतूतों के चलते गत जून में छात्र सड़कों पर उतर आए थे। वे कोरोनावायरस से निपटने के तौर-तरीकों से गुस्से में थे। छात्रों का आरोप था कि चीन से जो पीपीई किट, टेस्ट किट आदि खरीदे गए, वे घटिया ही नहीं, महंगे भी हैं। इस मामले में नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री के अलावा ओली के कई करीबी सलाहकारों के खिलाफ रिश्वतखोरी की जांच चल रही है। भ्रष्टाचार के ऐसे आरोपों से नेपाल में ओली और उनके चीनी सहयोगियों के लिए विकट स्थिति पैदा होती जा रही है।

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