सार्वजनिक उपक्रमों, बीमा कंपनियों, बैंकों पर होंगे लागू ओबीसी क्रीमी लेयर नियम

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नई दिल्ली – केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े क्रीमी लेयर के दायरे (8 लाख से कम) को अब सार्वजनिक उपक्रमों, बीमा कंपनियों और बैंकों पर भी लागू करने का फैसला किया है। इसके अलावा मंत्रिमंडल ने उन प्रावधानों को मंजूरी दी है जिससे सरकार के निम्न पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को मिलने वाले आरक्षण का लाभ अब इन उपक्रमों में ऐसे ही पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को भी मिले।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त मंत्रालय के इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

वित्तमंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को यहां बताया कि क्रीमी लेयर का दायरा दो आधारों आमदनी और स्तर के आधार पर तय किया गया था। जहां तक आय सीमा का सवाल है केंद्र और राज्य सरकार इसे समय-समय पर बढ़ाते रहे हैं लेकिन यह निर्णय लगभग 24 साल से पीएसयू, बीमा कंपनियों और बैंकों पर लागू ही नहीं हुआ था। आज केंद्रीय मंत्रिमंडल मंत्रियों के समूह की सिफारिश पर इसको स्वीकृति दे दी। इसके दो अंश हैं पहला दायरा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये किये जाना और वहीं दूसरा सरकार के ग्रुप ए और बी केटेगरी के अफसरों को आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाना। यह दोनों अब पीएसयू, बीमा कंपनियों और बैंकों पर भी लागू होंगे।

इससे पीएसयू और अन्‍य संस्‍थाओं में निम्‍न श्रेणियों में काम कर रहे लोगों के बच्‍चों को सरकार में निम्‍न श्रेणियों में काम कर रहे लोगों के बच्‍चों के समान ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। इससे ऐसे संस्‍थानों में वरिष्‍ठ पदों पर काम कर रहे लोगों के बच्‍चों को इस लाभ से रोक लग सकेगी जिन्‍हें ओबीसी के लिए आरक्षित सरकारी पदों को दरकिनार कर आय मापदंडों की गलत व्‍याख्‍या के चलते तथा पदों की समतुल्‍यता के अभाव में गैर-क्रीमीलेयर मान लिया जाता था और वास्‍तविक गैर-क्रीमीलेयर उम्‍मीदवार इस आरक्षण सुविधा से वंचित रह जाते थे।

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने देश भर में सामाजिक दृष्‍टि से अगड़े व्‍यक्‍तियों/वर्गों (क्रीमीलेयर) को ओबीसी आरक्षण की परिधि से बाहर करने के लिए क्रीमीलेयर प्रतिबंधित व्‍यवस्‍था के लिए वर्तमान 6 लाख रुपए वार्षिक आय के मापदंड को बढ़ाने की भी मंजूरी प्रदान करती है। नई आय का मापदंड 8 लाख रुपए वार्षिक होगा। क्रीमीलेयर से बाहर किए जाने के लिए आय की सीमा में वृद्धि उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक में बढ़ोतरी को देखते हुए की गई है और इससे ओबीसी को सरकारी सेवाओं में प्रदान किए गए लाभों तथा केन्‍द्रीय शैक्षिक संस्‍थाओं में दाखिले के लिए ज्‍यादा-से-ज्‍यादा लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा।

वित्तमंत्री के अनुसार सरकार के प्रयासों में इन उपायों से ओबीसी के सदस्‍यों को बृहदत्‍तर सामाजिक न्‍याय और समावेशन सुनिश्‍चित हो सकेगा। सरकार राष्‍ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए संसद में पहले ही एक विधेयक पेश कर चुकी है। सरकार ने, संविधान के अनुच्‍छेद 340 के अन्‍तर्गत ओबीसी की उप-श्रेणियों के निर्माण के लिए एक आयेाग की स्‍थापना की है जिससे ओबीसी समुदायों के बीच और अधिक पिछड़े लोगों की शिक्षण संस्‍थाओं एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभों तक पहुंच बन सके। एक साथ लिए गए इन सभी निर्णयों से यह उम्‍मीद है कि शिक्षण संस्‍थाओं और नौकरियों में ओबीसी का बृहत्‍तर प्रतिनिधित्‍व सुनिश्‍चित हो सकेगा वहीं इस श्रेणी के भीतर ज्‍यादा वंचित लोगों को समाज की मुख्‍य धारा में उनके अवसर से वंचित नहीं होना पड़ेगा।

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