24.7 C
New Delhi
Tuesday 31 March 2020

17 वर्षों में 15 मिनट का भी नहीं लिया अवकाश—नरेन्द्र मोदी

यह जरूर है कि दिन-रात काम करने के लिए शरीर ही नहीं बल्कि दिल-दिमाग को भी चुस्त-दुरुस्त रखना पड़ता है

Editorials

In India

सिंगापुर— प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दिन रात काम करने की प्रेरणा उन्हें देश के आम आदमी से मिलती है| पिछले 17 सालों के दौरान उन्होंने 15 मिनट का भी अवकाश नहीं लिया। श्री मोदी ने यहां नानयांग प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय में छात्रों और अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का आम आदमी अपने परिवार को पालने के लिए जिस तरह की जीतोड़ मेहनत करता है, उससे मुझे प्रेरणा मिलती है। इस कार्यक्रम के संचालक ने मोदी से सवाल पूछा था कि वह बिना थके भरपूर ऊर्जा के साथ कैसे काम कर पाते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि उन्हें सीमा की रखवाली करने वाले जवानों, परिवार पालने के लिए मेहनत करने वाली महिलाओं और मशक्कत करने वाले मजदूरों को देखकर लगता है कि ‘मुझे अवकाश लेने का अधिकार नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सीमा पर जवान बर्फबारी के बीच देश की रक्षा करते हैं। कभी रेगिस्तान में और कभी गहरे समुद्र में रखवाली का काम करते हैं। इसी तरह कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों के भविष्य के लिए मेहनत करती रहती हैं। मजदूर जीविकोपार्जन के लिए खटता रहता है। यह सब देखकर उन्हें भी लगता है कि अपना पूरा समय समाज और देश की सेवा में समर्पित करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2001 से आज तक उन्होंने कभी छुट्टी नहीं ली। यह जरूर है कि दिन-रात काम करने के लिए शरीर ही नहीं बल्कि दिल-दिमाग को भी चुस्त-दुरुस्त रखना पड़ता है। इस ओर वह पूरा ध्यान देते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सिंगापुर दौरे के दौरान नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पहुंचे जहां उन्होंने ‘ट्रांसफॉर्मिंग एशिया थ्रू इनोवेशन’ विषय पर छात्रों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा,“हमें 21वीं सदी एशिया की बनानी है। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व मानता है कि 21 वीं सदी एशिया की है। हमें चुनौती को अवसर के रूप में देखना चाहिए।”

उन्होंने अपने हाल की चीन यात्रा का जिक्र करते हुए कहा,“मैंने चीन के राष्ट्रपति को एक दस्तावेज सौंपा जो 2000 साल के आर्थिक विकास यात्रा पर अमेरिकी विश्वविद्यालय का शोध है जिसमें एक तथ्य है कि पिछले 2000 साल में से 1600 साल दुनिया की विकास दर में 50 फीसदी हिस्सेदारी भारत और चीन की थी। इसमें सिर्फ 300 साल ही पश्चिम का प्रभाव था।”

मोदी ने कहा कि उन्होंने सिंगापुर के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए कुछ करार किए हैं। ये करार भारत की नवोन्मेषी और उद्यमशीलता के पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन और विदेश में भारत के नवोन्मेषण को प्रोत्साहन देने से संबंधित हैं। समझौतों के तहत दूषित जल प्रबंधन और रिसाइक्लिंग के लिए भारतीय कौशल संस्थानों की स्थापना की जाएगी, सिंगापुर और आसियान में मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन दिया जाएगा। साथ ही इनके तहत अंतरिक्ष क्षेत्र में वाणिज्यिक सहयोग तथा सिंगापुर के अंतरिक्ष उद्योग के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

- Advertisement -

Articles

Sewa In COVID Times: Living ‘Service Before Self’ Credo

Sewa International volunteers were first off the starting block, setting up non-medical helplines for the four regional areas — West Coast, East Coast, Midwest, and Southwest — for a coordinated national response, where people can call in for assistance

India And US: Same COVID, Different Prescriptions

The different social structures, experiences in the leaders of the two countries, variation in the degree of political capital, etc make India and the US react differently to the global COVID pandemic

कोरोनावायरस काले विपरीतबुद्धिः का शर्तिया इलाज

कोरोनावायरस के भयावह व विकराल काल में जासूस विजय बनकर बाहर जाकर यह देखने की जरूरत बिलकुल नहीं है कि प्रशासन अपना काम ठीक कर रहा है या नहीं

Sewa In COVID Times: Living ‘Service Before Self’ Credo

Sewa International volunteers were first off the starting block, setting up non-medical helplines for the four regional areas — West Coast, East Coast, Midwest, and Southwest — for a coordinated national response, where people can call in for assistance

India And US: Same COVID, Different Prescriptions

The different social structures, experiences in the leaders of the two countries, variation in the degree of political capital, etc make India and the US react differently to the global COVID pandemic

कोरोनावायरस काले विपरीतबुद्धिः का शर्तिया इलाज

कोरोनावायरस के भयावह व विकराल काल में जासूस विजय बनकर बाहर जाकर यह देखने की जरूरत बिलकुल नहीं है कि प्रशासन अपना काम ठीक कर रहा है या नहीं

For fearless journalism

%d bloggers like this: