Wednesday 3 March 2021
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सीतारमण मुझे मंत्रालय से बाहर करना चाहती थीं — पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग

गर्ग ने कहा कि निर्मला सीतारमण के साथ उनके संबंध सही नहीं थे क्योंकि वित्तमंत्री मंत्रालय में 'मेरे बारे में कुछ पूर्वकल्पित धारणा रखती थीं'

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मोदी-2.0 सरकार के पिछले बजट के तीन सप्ताह के भीतर वित्त मंत्रालय से बाहर कर दिए गए पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने आज आरोप लगाया कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने उनका तबादला करवा दिया था। वित्त मंत्रालय से स्थानांतरित होने के बाद जल्द ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लेने वाले गर्ग को आर्थिक मामलों के विभाग से बिजली मंत्रालय भेजा गया था. उन्होंने कहा कि सीतारमण के पूर्ववर्ती अरुण जेटली के विपरीत अभी की वित्तमंत्री ‘एक बहुत ही अलग व्यक्तित्व और ज्ञानसंपन्न’ थी।

वित्त मंत्रालय और सीतारमण दोनों के कार्यालयों ने गर्ग के ब्लॉग पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. ब्लॉग में उन्होंने कहा था कि वे सामान्य रूप से सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होंगे, लेकिन वीआरएस के कारण उनका प्लान ख़राब हो गया।

गर्ग ने कहा कि सीतारमण के साथ उनके ‘अच्छे और कारगर पेशागत रिश्ते’ नहीं थे क्योंकि वर्तमान वित्तमंत्री उनके बारे में ‘कुछ पूर्वकल्पित धारणाएँ’ बना कर आई थीं। ‘वह मुझ पर विश्वास नहीं करती थीं। वह मेरे साथ काम करने में बिलकुल सहज नहीं थीं।’ उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक की अतिरिक्त राशि सरकार को लाभांश के रूप में दिया जाना चाहिए या नहीं और ग़ैर-बैंकिंग वितीय संस्थानों (NBFC) की समस्याओं से निपटने के विषय पर उनके और मंत्री के बीच कुछ ही महीनों में मतान्तर उभर कर सामने आ गए थे।

‘रिज़र्व बैंक के आर्थिक पूंजी ढांचे, NBFC की समस्याओं से निपटने के लिए एक पैकेज व उनके समाधान, आंशिक ऋण गारंटी योजना, IIFCL जैसे NBFCs के पूंजीकरण और अन्य वित्तीय संस्थाओं और प्रमुख मुद्दों पर भी गंभीर अंतर दोनों के बीच जल्द ही सामने आए। ‘बहुत जल्द, न केवल हमारे व्यक्तिगत संबंधों में खटास आ गई बल्कि आधिकारिक कामकाजी संबंध भी काफ़ी अनुत्पादक हो गए,’ उन्होंने लिखा।

पूर्व सचिव की मानें तो सीतारमण 5 जुलाई के बजट से पहले ही जून 2019 में गर्ग को बाहर करना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उनका अनुरोध सरकार द्वारा तुरंत स्वीकार क्यों नहीं किया गया।

गर्ग को 24 जुलाई 2019 को ऊर्जा मंत्रालय के सचिव के रूप में स्थानांतरित किया गया था और उन्होंने आदेश प्राप्त करने के आधे घंटे के भीतर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था।

31 अक्टूबर 2019 को अनिवार्य नोटिस की अवधि के बाद सरकार से बाहर होने वाले गर्ग ने लिखा, ‘श्रीमती सीतारमण ने वित्तमंत्री के रूप में पदभार संभालने के एक महीने के भीतर जून 2019 में वित्त मंत्रालय से मेरे स्थानांतरण पर ज़ोर दिया।’

सीतारमण के पूर्ववर्ती जेटली की अर्थव्यवस्था के गहन ज्ञान और समझ की प्रशंसा करते हुए गर्ग ने कहा कि ‘श्रीमती निर्मला सीतारमण एक बहुत ही अलग व्यक्तित्व, अलग प्रकार के ज्ञान की धनि, अलग कौशल से पूर्ण हैं और आर्थिक नीति के मुद्दों के लिए अलग दृष्टिकोण रखती हैं तथा अधिकारियों के प्रति भी उनका व्यव्हार अलग है।’

सीतारमण मुझे मंत्रालय से बाहर करना चाहती थीं — पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग
‘वे बहुत बड़े और व्यापक व्यक्तित्व थे’

‘यह बहुत जल्दी स्पष्ट हो गया कि उनके साथ काम करना अत्यधिक कठिन होने वाला था और यह भारत की 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के निर्माण के उद्देश्य के लिए आवश्यक सुधार करने के लिए अनुकूल परिस्थिति नहीं थी।’ पूर्व वित्त सचिव ने आरोप लगाया कि ‘न जाने क्यों सीतारमण मेरे बारे में पूर्वाग्रह से ग्रसित थीं’।

गर्ग ने लिखा कि ‘बहुत जल्द न केवल हमारे व्यक्तिगत संबंधों में खटास आ गई बल्कि आधिकारिक कामकाजी संबंध भी काफ़ी निष्कल हो गए।’

गर्ग ने लिखा उन्होंने बजट पेश होने से बहुत पहले जून 2019 में अपना मन बना लिया था कि वे सरकार से बाहर व्यापक आर्थिक सुधार एजेंडा पर काम करने के लिए स्वतंत्र होने हेतु स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेंगे। ‘मैंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से संबंधित नियमों के माध्यम से जून के चौथे सप्ताह में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए एक महीने के नोटिस का मसौदा तैयार किया और 31 अक्टूबर 2019 को त्यागपत्र देने का निर्णय लिया।’

गर्ग ने यह भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में तत्कालीन अतिरिक्त प्रधान सचिव पीके मिश्रा के साथ सीतारमण के साथ उनके संबंधों के बारे में कुछ अवसरों पर चर्चा की थी। ‘हम दोनों सहमत थे कि मेरे लिए सर्वोत्तम उपाय यही होगा कि नए वित्तमंत्री के लिए ‘सुचारू रूप से कार्य करने’ का रास्ता सुगम करूँ। मिश्रा ने मुझे सरकार या सरकार से बाहर नियामक संस्थाओं या कहीं और नौकरी देने का प्रस्ताव दिया’ हालांकि पूर्व वित्त सचिव ने मिश्रा को सूचित किया कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का मन बना लिया है।

‘मैंने 24 जुलाई को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अर्ज़ी दी थी, जिस दिन मुझे 31 अक्टूबर 2019 को विद्युत मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया था, जिस दिन मैंने मूल रूप से इरादा किया था,’ उन्होंने कहा, हालांकि गर्ग ने 26 जुलाई 2019 को दावा किया था कि उच्च प्रोफ़ाइल वित्त मंत्रालय से उनके स्थानांतरण और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के निर्णय के बीच कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 18 जुलाई को प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ सेवानिवृत्ति मामले पर पहले ही चर्चा की थी।

राजस्थान कैडर के 1983 बैच के आईएएस अधिकारी गर्ग 2014 में केंद्र में आए थे और उन्हें विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया था, जहां वह 2017 तक रहे जब उन्हें जून 2017 में DEA सचिव नियुक्त किया गया। मार्च 2019 में उन्हें वित्त सचिव के रूप में पदोन्नत किया गया।

गर्ग ने कहा कि अरुण जेटली में ‘सार्वजनिक नीति के मुद्दे पर भारी मात्रा में जानकारी और सरकारी फाइलों के माध्यम को खंगाल कर उसका सार निकालने की प्रतिभा थी और उनके पास सर्वसम्मति बनाने की क्षमता भी थी।’

गर्ग के अनुसार विभागों को चलाने और सचिवों द्वारा नीतियों को लागू करवाने के अलावा जेटली ने व्यापक नीतिगत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि ‘सचिवों से आने वाले प्रमुख नीतिगत सुझावों के लिए जेटली ने वास्तव में अफ़सरों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने सचिवों को प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ मीडिया और जनता के लिए नीतिगत प्रस्ताव पेश किए। वे बहुत बड़े और व्यापक व्यक्तित्व थे’।

‘सीतारमण के अनुसार भारतीय आर्थिक नीति 2030 के दशक की शुरुआत में $ 10 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के निर्माण के अपने आवश्यक व निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विचलित हो रही थीं!’ गर्ग ने कहा कि यह भी आईएएस छोड़ने के कारणों में से एक था।

गर्ग ने कहा, ‘सुधार एजेंडा और अंतरिम बजट 2019-20 में व्यक्त किए गए $ 10 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निवेश की योजना साइड-ट्रैक हो गई और वास्तव में उसे भुला दिया गया।’

इसके बाद गर्ग के मुताबिक़ ‘सरकार लोकलुभावन योजनाओं की तरफ़ झुकती चली गई’।

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