अपनी गुफा में मोदी को घंटों समाधिस्थ देखकर बाबा प्रकट हुये। उन्होंने पूछा, बताओ नरेन्द्र ! अब यहां क्यूं आए हो ? क्या अब भी तुम पूर्णकाम न हुये? मैंने तुम्हें अखंड, निर्विघ्न पांच साल दिये थे। तुमने क्या किया?

मोदी ने अपनी आंखें खोली और बाबा को सम्मुख देखकर विह्वल हो उठे। फिर नतशीश होकर बोले, भगवन ! आपने कैसी दुनिया बनाई है ? यहां मुझे आपने पांच साल दिए ज़रूर, लेकिन मैं कुछ कर न सका। जब मैं नवाज के घर गया तो लोगों ने कहा मोदी कायर है, यह तो पाखंडी निकला, पाकपरस्त निकला। पुलवामा अटैक हुआ तो देश की जनता ने मेरे माथे पर कलंक लगा दिया, मुझे लापरवाह बताया, फिर मैंने सर्जिकल स्ट्राइक करवाया तो लोगों ने कहा, यह मोदी तो झूठा है। सबूत क्यूं नहीं दिखाता?

प्रभो! ऐसे ही जब मैं राम मंदिर की बात करता तो आपकी संतानें कहने लगतीं, यह तो देश को अराजकता, विद्वेष और सांप्रदायिकता की आग में जला डालेगा। जब मैंने मंदिर न बनवाने का वचन दिया तो सबके सब मुझे रामद्रोही सिद्ध कर दिए!

आप हीं बताइए नाथ! मैं क्या करूं? कैसे करूं? जब सामाजिक न्याय की रक्षा करने मैं निकला तो सवर्णों ने कहा, ये तो वोट के लिए सवर्णों की बलि ले लेगा। जब सुप्रीम कोर्ट को मैंने पटखनी देकर एट्रोसिटी बहाल किया तो दलितों ने कहा, तुम दलितों से प्रेम करते हो तो अपना सीना चीरकर दिखाओ!

हे महामृत्युञ्जय ! क्या आपको नहीं लगता मैंने बहुत काम किया ? या तो मुझे पांच साल और दीजिए अन्यथा अपने पास बुला लीजिए…ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है.?

नरेन्द्र मोदी की भावुक बातों से भगवन भी कुछ विचलित हुये..उनकी तीसरी आंख से दो बूंद अश्रु धरती पर गिरे और पारिजात बन गये।

नरेन्द्र मोदी का तर्क सुनकर भगवान ने कहा, ठीक है..ठीक है, तुम्हारी बातें निर्मूल नहीं हैं। लेकिन तुम पर महाभियोग भी बनता है। तुम्हारा दोष यह है नरेन्द्र ! कि तूने कवियों को विदूषक बनाया, सरस सलिल और मनोहर कहानियां पढ़ने वालों को अर्थशास्त्री बनाया। इसका दुष्परिणाम देश को भुगतना पड़ रहा है। फलतः आज सीरियस लोग हाशिये पर हैं, जो हैं उनमें अधिकांश अपने मूल उद्देश्यों से भटक गये हैं। और नालायकों को कला-संस्कृति के क्षेत्रों में केन्द्रीयता मिल गयी है। बताओ नरेन्द्र बताओ ! गंभीर लोगों को मुख्यधारा में पुनः कैसे योजित किया जायेगा?

नरेन्द्र को भीति-भाव में डूबता देखकर पुनः महाकाल ने धीरज देते हुये कहा, लेकिन तूने कुछ अच्छे काम भी किए हैं। मसलन, कुंभ में लोहियावादियों को डुबकी लगवाया, देश के नास्तिकों में भी भक्ति का संचार किया, बिल्ली के रास्ता काटने पर जो जनता ट्रैफिक जाम लगा देती है, अपशकुन समझती है, उसे तूने राडार एक्सपर्ट बनाया। तुमने एक बड़ी आबादी के ऊपर अहैतुक उपकार किया है। क्या बात है नरेन्द्र ! जो विपथगामी हो चुके थे, उनका तो तूने परिमार्जन ही कर दिया। वाह! वाह! साधु! साधु!

जा, तुझे पुनः अखंड पांच साल देता हूं !! यह कहकर पशुपतिनाथ अंतर्ध्यान हो गये।

भगवान को अदृश्य देखकर मोदी ने कहा भूत! प्रभो भूत!
फिर आकाशवाणी हुई कैसा भूत? मोदी ने कहा, नेहरू का भूत भगवन नेहरू का भूत!

फिर नरेन्द्र ने सुना…मुझसे बड़ा कोई भूत नहीं है नरेन्द्र ! मैं साक्षात भूतनाथ हूं। जाओ इन बर्फीली वादियों से उतरते समय धतूरे की गांठ बांध लेना। नेहरू से डरने की कोई ज़रूरत नहीं…ह्विस्की का तोड़ धतूरा है… सिर्फ धतूरा!

शिव जी का अभय पाकर नरेन्द्र मोदी ने जैकारा लगाया हर हर महादेव!

फिर गुफा से बाहर निकल कर उन्होंने देखा धवल बर्फ पर सूरज की रोशनी से भी तीक्ष्ण प्रकाश फोटोग्राफरों का फ्लैश कर रहा था। लोगों ने उन्हें बताया, आप गुफा में क्या गये…पूरी धरती पर हाहाकार मच गया था। अब आपको देखकर लोगों को संबल मिल रहा है। आपके चाहने वालों ने अनंत साइबर स्पेस को भी गिलास बना दिया था। भक्तों से ज्यादा विभक्तों ने आपके लिए छाती पीटी, बाल नोचे। आप धन्य हैं…और आपने पुनः सबको धन्य कर दिया। आपको बारंबार धन्यवाद!

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