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Wednesday 3 June 2020

नरसिंह जयंती ― तिथि, समय, पूजा विधि, लाभ

नरसिंह जयंती का मुख्य उद्देश्य अधर्म को दूर करना और धार्मिकता के मार्ग का अनुसरण करना है, जो सही कर्मों और अहिंसा की ओर मार्ग का संकेत देता है

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नरसिंह जयंती श्री हरि के चौथे अवतार भगवान नरसिंह के आविर्भाव को मनाने का वार्षिक त्योहार है। भगवान शुक्ल पक्ष के 14 वें दिन सूर्यास्त के समय प्रकट हुए थे। यह दिन भगवान विष्णु के भक्तों के बीच अत्यधिक शुभ माना जाता है ― विशेष कर कर्नाटक से आंध्र प्रदेश होते हुए उड़ीसा तक।

माना जाता है कि हिरण्यकशिपु के वध के उपरांत क्रोध के मारे भगवान इसी क्षेत्र में विचरण कर रहे थे जब उन्हें शांत करने के लिए भगवान शिव ने शरभ अवतार लिया और भगवान विष्णु गंधभेरुण्ड अवतार में परिवर्तित हुए व युद्ध के उपरांत दोनों शांत हुए तथा स्वधाम लौट गए।

शास्त्रों के अनुसार भगवान नरसिंह सूर्यास्त के समय प्रकट हुए थे, अतः पूजा दिवस के उसी खण्ड में की जाती है। नरसिंह जयंती का मुख्य उद्देश्य अधर्म को दूर करना और धार्मिकता के मार्ग का अनुसरण करना है, जो सही कर्मों और अहिंसा की ओर मार्ग का संकेत देता है।

मुहूर्त

वैशाख शुक्ल चतुर्दशी 5 मई को रात 11.21 बजे से शुरू होगी और 6 मई को शाम 7.44 बजे समाप्त होगी।

पूजा विधान

दोपहर में इस जयंती के दौरान सकल्प लें और सूर्यास्त से पहले पूजा करें।
मूर्ति को घर के पूर्व भाग में रखें ताकि उनका मुख पश्चिम की ओर हो।
पूजा के लिए फल, फूल, चंदन, कपूर, रोली, धूप, कुमकुम, केसर, पंचमेवा, नारियल, अक्षत, गंगाजल, काले तिल और पीताम्बर रखें।
मूर्ति को पीले वस्त्र से ढँक दें।
चंदन, कपूर, रोली और धुप रखें।
भगवान नरसिंह की कथा पढ़ें।
प्रतिज्ञा देवी पूजा, मंत्र जाप और यज्ञ करें।
पूजा के बाद दरिद्रों को तिल, कपड़ा आदि दान करें।
अगली सुबह जागरण होना चाहिए और एक दर्शन पूजन करना चाहिए।
किसी को अनाज और अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। जयंती के अगले दिन व्रत तोड़ना चाहिए।

नरसिंह मंत्र

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

ॐ नृम नृम नृम नरसिंहाय नमः॥

इस अनुष्टुप् का प्रथम पद ‘उग्रम्’ मंत्र का प्रथम स्थान है, यह जानने वाला अमृतत्व को प्राप्त कर लेता है। मंत्र में ‘वीरम्’ का द्वितीय स्थान है।’महाविष्णुम्’ पद का तृतीय स्थान है। ‘ज्वलंतम्’ का चतुर्थ स्थान है। ‘सर्वतोमुखम्’ का पंचम स्थान है। ‘नृसिंहम्’ का षष्ठ स्थान है। ‘भीषणम्’ का सप्तम स्थान है। ‘ भद्रम्’ का अष्टम स्थान है। ‘मृत्युमृत्युम्’ का नवम स्थान है।‘नमामि’ का दशम स्थान है।‘अहम्’ को एकादश स्थान है, ऐसा जानना चाहिए। इस प्रकार जानने वाला अमृतत्व को प्राप्त कर लेता है।

पूजा के लाभ
न्यायिक विषयों में सफलता
बीमारियों और बीमारियों से सुरक्षा
धन और इरादों की पूर्ति
ऋण, वित्तीय कठिनाइयों, रिश्ते के मुद्दों पर नियंत्रण

माना जाता है कि भगवान नरसिंह की पूजा और भगवान नरसिंह के इस दिन उपवास करने से सभी दुख और दर्द दूर हो जाते हैं। जिस तरह उन्होंने हमेशा अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की, उसी तरह भगवान नरसिंह किसी और को पीड़ित नहीं होने देते। वहीं श्री नरसिंह के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या दूर होती है।

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