Tuesday 24 May 2022
- Advertisement -

तालिबान राज में रेप से बचाने के लिए बेटी को सुटकेस में बंद रखती है माँ

लड़कियों के प्रति व्यवहार पिता और फिर पति की अधिकृत वस्तु जैसी होती है; तालिबान ऊपर से उनकी आवाजाही की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा देता है

Join Sirf News on

and/or

इस्लामी राष्ट्र अफ़ग़ानिस्तान में छोटी सी ग़लतीपर महिला को भयानक सज़ा दी जाती है। इसके अलावा यहाँ महिलाओं को यौन दासी (sex slave) बनाकर रखा जाता है। अफ़ग़ानिस्तान की महिला नेत्री शुक्रिया ने इस देश में महिलाओं की दयनीय स्थिति के बारे में दुनिया को बताया। उन्होंने कहा कि जैसे ही यहाँ महिला घर के बाहर क़दम रखती है, उसकी मुश्किलें शुरू हो जाती हैं। यहाँ तालिबान की नज़र हर एक महिला के ऊपर रहती है।

न सिर्फ़ महिला बल्कि बच्चियाँ भी यहाँ सुरक्षित सेफ नहीं हैं। उनका भी अपहरण कर उन्हें यौन दासी बना लिया जाता है। यहाँ स्त्री हो कर जन्म लेना यानी नर्क भोगना।

शुक्रिया ने कहा कि तालिबान राज में महिलाओं के प्रति किसी तरह का कानून नहीं है। अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं को क्रूर सज़ा देने वाले कई क़ानून हैं। ख़ुद शुक्रिया पर 2014 में आक्रमण हुआ था जिसमें उनकी जान जाते-जाते बची।

उन्होंने बताया कि कैसे काबुल में एक महिला की आँखें छोटी सी ग़लती पर नोच ली गई थी। इसके अलावा बच्चियों को यौन दासी बनाने की कई घटनाएँ सामने आई हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान घर-घर जाकर बच्चियों का अपहरण करते हैं। इसके बाद उन्हें सेक्स स्लेव बनाकर गर्भवती कर छोड़ दिया जाता है। ऐसे में अब माएँ अपनी बच्चियों को सूटकेस में बंद कर छिपा देती हैं ताकि तालिबान की नज़र उनकी बेटी पर न पड़े।

ऐसा नहीं है कि तालिबान मर्दों पर अत्याचार नहीं करते। हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान में रहने वाले एक मर्द को सिर्फ़ इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया था क्योंकि वह सरकारी नौकरी करता था।

तालिबान ही नहीं, इस्लामी सरकारी तंत्र भी दोषी

अफ़ग़ानिस्तान में अधिकांश महिलाएँ किसी न किसी रूप में दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं। 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में 90% महिलाओं ने घरेलू हिंसा किसी न किसी रूप में झेला है। महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा समुदाय द्वारा व्यापक रूप से सहन की जाती है और अफ़ग़ानिस्तान में व्यापक रूप से प्रचलित है। अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा मौखिक दुर्व्यवहार और मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार से लेकर शारीरिक शोषण और ग़ैरक़ानूनी हत्या तक होती है।

बचपन से ही लड़कियों के प्रति व्यवहार अधिकृत वस्तु जैसी होती है; लड़की पहले पिता और शादी के बाद पति की प्रॉपर्टी होती है। तालिबान काल में बचपन से ही आवाजाही की स्वतंत्रता पर भी प्रतिबंध लग जाता है। उन्हें अपना पति चुनने का अधिकार नहीं है। महिलाएँ और लड़कियाँ शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता से वंचित हैं। उनके पास अपने परिवार में शादी से पहले और शादी के बाद के संबंधों में अपनी आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता की मांग करने का कोई हक़ नहीं है। अधिकांश विवाहित अफ़ग़ान महिलाओं को स्थायी दुर्व्यवहार की कठोर वास्तविकता का सामना करना पड़ता है। जब-जब किसी लड़की ने नारकीय स्थिति से स्वयं को निकालने की कोशिश की, उसे हर बार सामाजिक कलंक, बहिष्कार, घर छोड़ने के लिए अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और किसी रिश्तेदार द्वारा ‘ऑनर किलिंग’ का सामना करना पड़ा।

तालिबान राज में मध्ययुगीय पितृसत्तात्मक इस्लामी नियमों से प्रभावित रीति-रिवाज और परंपराएं प्रबल होती हैं और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा आम बात है।

आबादी में निरक्षरता दर का उच्च स्तर समस्या को और बढ़ा देता है। अफ़ग़ानिस्तान में कई महिलाओं का मानना​है कि उनके पतियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार करना स्वीकार्य है। यहाँ के समाज में व्याप्त इस सामान्य स्वीकृति को उलटना महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा का उन्मूलन (EVAW) क़ानून का उद्देश्य था।

सन 2009 में EVAW क़ानून में हस्ताक्षरित किया गया था। EVAW क़ानून की रचना काबुल में कई संगठनों के साथ-साथ प्रमुख महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की सोच से हुई। UNIFEM, अधिकार और लोकतंत्र, अफगान महिला नेटवर्क, संसद में महिला आयोग और महिला मुआमलों के अफ़ग़ान मंत्रालय ने मिलकर क़ानून का प्रारूप तैयार किया था।

मार्च 2015 में क़ुरान के अपमान के झूठे आरोप पर काबुल में कट्टरपंथी मुसलमानों की गुस्साई भीड़ ने 27 वर्षीय अफ़ग़ान महिला फ़रखुंडा मलिकज़ादा को सार्वजनिक रूप से पीटा और मार डाला। इस बेरहम लिंचिंग की ख़बर सोशल मीडिया में ख़ूब चली और विश्व भर में घटना की निंदा हुई। बाद में पता चला कि फ़र मलिकज़ादा ने क़ुरान नहीं जलाया था, किसी ने झूठी अफ़वाह फैलाई थी।

सन 2018 में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया था कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा सरकारी अधिकारी और ग़ैर-सरकारी लोग दोनों करते हैं।

अप्रैल 2020 में HRW ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में विकलांग महिलाओं को सरकारी सहायता, स्वास्थ्य देखभाल और स्कूलों तक पहुँचने के दौरान सभी प्रकार के भेदभाव और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक में महिलाओं और लड़कियों का सामना करने वाली रोज़मर्रा की बाधाओं का भी विवरण दिया गया है।

14 अगस्त 2020 को अफ़ग़ानिस्तान की शांति वार्ता दल की सदस्य फ़ौज़िया कूफ़ी परवान के उत्तरी प्रांत की यात्रा से लौटते समय राजधानी काबुल के पास एक हत्या के प्रयास में घायल हो गई। फ़ौज़िया कूफ़ी उस 21 सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं जिस पर तालिबान के साथ आगामी शांति वार्ता में अफ़ग़ान सरकार का प्रतिनिधित्व करने का ‘आरोप’ है।

एक 33 वर्षीय अफ़ग़ान महिला पर काम से घर जाते समय तीन लोगों ने हमला कर दिया। उसे गोली मार दी गई और उसकी आंखों में चाकू से वार किया गया। महिला तो बच गई लेकिन उसकी आंखों की रोशनी चली गई। तालिबान ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि हमला उसके पिता के आदेश पर किया गया था क्योंकि उसने बाहर काम करने की हिम्मत दिखाई थी।

Afghans Tell of Executions, Forced 'Marriages' in Taliban-Held Areas - WSJ

Contribute to our cause

Contribute to the nation's cause

Sirf News needs to recruit journalists in large numbers to increase the volume of its reports and articles to at least 100 a day, which will make us mainstream, which is necessary to challenge the anti-India discourse by established media houses. Besides there are monthly liabilities like the subscription fees of news agencies, the cost of a dedicated server, office maintenance, marketing expenses, etc. Donation is our only source of income. Please serve the cause of the nation by donating generously.

Join Sirf News on

and/or

Similar Articles

Comments

Scan to donate

Swadharma QR Code
Advertisment
Sirf News Facebook Page QR Code
Facebook page of Sirf News: Scan to like and follow

Most Popular

[prisna-google-website-translator]
%d bloggers like this: