पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों पर बोले सौरभ — मोदी, ख़ान तय करें

'पाकिस्तान के साथ खेलने के लिए हमें अनुमति लेनी होगी; अंतर्राष्ट्रीय दौरे सरकारों की अनुमति से होते हैं; हमारे पास इस सवाल का जवाब नहीं है'

बीसीसीआई प्रमुख और भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय श्रृंखला के मुद्दे को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध दोनों पक्षों के प्रधानमंत्रियों से अनुमोदन के अधीन हैं। कोलकाता में आज एक मीडिया वार्ता के दौरान गांगुली से भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करने के बारे में जब पूछा गया तो पूर्व क्रिकेटर ने जवाब दिया, “आपको मोदी जी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से यह सवाल पूछना होगा।”

“बेशक हमें अनुमति लेनी होगी क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय दौरे सरकारों की अनुमति से होते हैं। इसलिए हमारे पास इस सवाल का जवाब नहीं है,” गांगुली ने कहा।

सात साल हो गए हैं जब आख़री बार भारत और पाकिस्तान ने द्विपक्षीय श्रृंखला में भाग लिया था। भारत की मेज़बानी में 2012 में सीमित ओवरों की श्रृंखला के अंतर्गत पाकिस्तान के साथ दो T20 और तीन वनडे खेले गए थे।

फिर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए BCCI ने ICC से पाकिस्तान का नाम न लेते हुए अर्ज़ किया था कि वह आतंकवाद को शह, समर्थन और आर्थिक मदद देने वाले देश के साथ अन्य क्रिकेट खेलने वाले देशों के संबंध तोड़ दे।

भारत के सबसे प्रभावशाली कप्तान और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रमुख बीसीसीआई अध्यक्ष बनने की दौड़ में सोमवार को एकमात्र दावेदार के रूप में उभरे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अवतरण के समय से ही सौरभ सुर्ख़ियों में बने रहे हैं — चाहे वह शुरुआत में 12वें खिलाड़ी बनाए जाने के कारण झल्लाहट के लिए हो, भारत के प्रथम आक्रामक कप्तान के रूप में हो, ग्रेग चैपेल से मनमुटाव की वजह से हो या संन्यास के बाद भी अपनी बेबाकी के सबब हो। पर BCCI प्रमुख बनते ही पत्रकारों के प्रश्न का कूटनीतिक जवाब देकर उन्होंने सिद्ध कर दिया कि इस नए रोल को भी वह बख़ूबी निभा सकते हैं। यहाँ सीधी बात से अक्सर बात बिगड़ जाती है; अतः गांगुली ने पाकिस्तान के साथ खेलने के विषय में अपनी निजी पसंद या नापसंद पर ज़ुबान नहीं खोली बल्कि भारत और पाकिस्तान की सरकारों पर निर्णय छोड़ दिया।

23 अक्टूबर को बीसीसीआई के अगले अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने वाले 47 वर्षीय गांगुली ने 2004 में पाकिस्तान के ऐतिहासिक दौरे पर भारत का नेतृत्व किया था, फिर 1999 में करगिल युद्ध के बाद पहली द्विपक्षीय श्रृंखला और 1989 के बाद भारत की पहली पाकिस्तान यात्रा की अगुवाई की थी।

अपनी नियुक्ति के बाद गांगुली ने यह भी कहा कि वे महेंद्र सिंह धोनी के भविष्य के बारे में उनकी योजनाओं के बारे में राष्ट्रीय चयन समिति से बात करेंगे और तभी इस मामले पर कोई राय देंगे।

भारत विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप तालिका के शीर्ष स्थान पर है लेकिन विराट कोहली के पक्ष ने कोई वैश्विक टूर्नामेंट नहीं जीता है। भारतीय क्रिकेट टीम पर बात करते हुए गांगुली ने कहा, “यह बहुत अच्छी टीम है। मुझे बस इतना कहना है कि उन्हें बड़े टूर्नामेंट जीतने की ज़रूरत है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि उन्हें हर बार जीतने की ज़रूरत है। यह मुमकिन नहीं है। लेकिन हम एक भी जीत के बिना सात बड़े टूर्नामेंट से गुज़र चुके हैं।

गांगुली ने कहा, “टीम इंडिया इससे बहुत बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। यही एकमात्र क्षेत्र है जहाँ उन्हें मानसिक रूप से खुद को तैयार करने की आवश्यकता होती है। प्रतिभा की कमी नहीं है, अन्यथा वे सेमीफाइनल तक विश्व कप में इतना अच्छा नहीं खेल सकते थे। तो यह एक मुद्दा है जिसे विराट को संबोधित करने की आवश्यकता है जो कि बोर्डरूम कि बैठक से हासिल नहीं होने वाला।”

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