प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में विकास और बचपन की चिंता की है। उनका मानना है कि रोमांच की कोख से विकास का जन्म होता है, जबकि खेल ही है, जो बचपन को बनाए रखता है। अगर खेल खो गए तो बचपन खो जाएगा। रोमांच न हो तो विकास का जन्म नहीं होगा।

नरेंद्र मोदी शब्दों के महारथी हैं। उन्होंने उद्घाटन तो ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का किया, लेकिन इसी बहाने कैराना के लोकसभा उपचुनाव में रोमांच भी पैदा कर गए। दिल्ली-सहारनपुर एक्सप्रेस वे के निर्माण की घोषणा कर उन्होंने नूरपुर उपचुनाव को भी अपने लाभ के केंद्र में रखा। इसे भी किसी रोमांच से कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

पीढ़ियों के अंतर को कम करने के लिए परंपरागत खेल को भी उन्होंने जरूरी माना। जिंदगी ही खेल है जिसे आदमी पूरी जिंदगी खेलता है। राजनीति उसी खेल का हिस्सा है, जिसे नरेंद्र मोदी भी खेल रहे हैं और उनके विरोधी भी।

कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथग्रहण में दिखी विपक्षी एकता से परेशान नरेंद्र मोदी ने अब विपक्ष को जीत का एक भी मौका न देने का निर्णय लिया। बागपत में उनकी रैली को इसी रूप में देखा जा सकता है। हालांकि विपक्ष ने समवेत रूप से इस रैली की आलोचना की और इसे कैराना और नूरपुर में हो रहे उपचुनाव को प्रभावित करने की कोशिश बताया है। चुनाव के वक्त दो एक्सप्रेस वे का उद्घाटन ऐन वक्त पर मतदाताओं की सोच प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका भाजपा को उतना लाभ भी नहीं होने जा रहा जितना कि समझा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन को बड़ी उपलब्धि बताया है। यह भी दावा किया है कि 910 दिन के सापेक्ष 500 दिन में ही इस लक्ष्य को पूरा कर लिया है लेकिन देर-सबेर उनका यह बयान विपक्ष को आलोचना की संजीवनी भी दे सकता है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन सबके लिए सर्वोच्च न्यायालय को धन्यवाद देते हुए कहा है कि अगर सर्वोच्च न्यायालय तल्ख आदेश न देता तो प्रधानमंत्री इस एक्सप्रेस वे का उद्घाटन ही न करते। राहुल गांधी कब इसका श्रेय नरेंद्र मोदी को लेने देते। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि यूपीए सरकार की योजनाओं का उद्घाटन करके ही मोदी सरकार विकास का श्रेय ले रही है।

प्रधानमंत्री के बागपत में किए गए रोड शो पर भी विपक्ष ने चिंता जाहिर की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की घोषणा और द ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने रोड शो भी किया। दिल्ली सहारनपुर एक्सप्रेस वे बनाने और उसे हरिद्वार व देहरादून से जोड़ने की घोषणा कर सरकार ने विकास की बिना पर एक बार फिर जनता को लुभाने की कोशिश की है।

सड़क विकास का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसभा करें और विपक्ष पर हमला न करें, ऐसा हरगिज मुमकिन नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार जनपथ से नहीं, जनमत से चलती है। उन्होंने विपक्ष को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि उसे देश का विकास और स्वच्छता मिशन भी मजाक लगता है। गरीब महिला के लिए बनाया गया शौचालय मजाक लगता है। गरीबों के लिए, दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों के लिए जो भी कार्य किया जाता है, कांग्रेस और सहयोगी दल या तो उसमें रोड़े अटकाने लगते हैं, या उसका मजाक उड़ाते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक करने वाली देश की सेना के साहस को भी ये नकार देते हैं। उसका भी प्रमाण मांगते हैं।

पिछड़ी जातियों के सब-कैटेगराइजेशन के लिए आयोग बनाने की बात कहकर प्रधानमंत्री ने अति पिछड़ों के घाव पर फिर मरहम लगाया है। अति पिछड़ों को सरकार और शिक्षण संस्थाओं में तय सीमा में आरक्षण का और ज्यादा फायदा पहुंचाने की बात कहकर उन्होंने अति पिछड़ों को प्रभावित करने का प्रयास किया है। कांग्रेस पर उन्होंने निरंतर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है।

मोदी ने किसानों को आगाह किया कि खेत ठेके पर या बंटाई पर देने वालों पर जीएसटी लगाने की अफवाह पर वे ध्यान न दें।

पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से दिल्ली दिल्ली की जाम और प्रदूषण की समस्या हल होगी। ईपीई देश का पहला स्मार्ट और सौर ऊर्जा से लैस एक्सप्रेस वे है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर 11 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। 14 लेन की यह भारत की पहली सड़क है। ईस्टर्न एक्सप्रेसवे आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस है। इस मार्ग के जरिये सरकार ने यह बताने और जताने की कोशिश की है कि विकास अमीर-गरीब, ऊंच-नीच किसी में भेदभाव नहीं करता। वह सबके लिए होता है।

केंद्र सरकार ने 3 लाख करोड़ रुपए 28 हजार किलोमीटर हाईवे बनाने पर खर्च किया है। ईपीई 135 किलोमीटर लंबा है। यह हरियाणा के सोनीपत और पलवल को जोड़ रहा है। इसकी लागत 11 हजार करोड़ आई है। इस पर 8 सोलर प्लांट बनाए गए हैं, जिनमें 4 हजार किलोवाट बिजली पैदा होगी। 100% लाइट इसी से जलेंगी। एक्सप्रेस वे पर 36 स्मारकों की प्रतिकृति लगाई गई हैं। कोशिश की गई है कि सड़क पर चलते वक्त हर राज्य की झलक दिखे। इस पर 40 फव्वारे भी बनाए गए हैं।

ईपीई शुरू होने के बाद अगर हिमाचल प्रदेश या राजस्थान से हरियाणा जाना चाहता है तो उसे दिल्ली में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। इस रोड के शुरू होने से दिल्ली में रोजाना 50 हजार वाहनों का दबाव कम होगा। प्रदूषण का स्तर 27% तक घटेगा। दिल्ली सरकार को सम-विषम का फार्मूला नहीं आजमाना होगा। दिल्ली को ट्रैफिक समस्या से निजात दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिल्ली के बाहर रिंग रोड बनाने का आदेश दिया था।

जानकार इस लोकार्पण समारोह और रैली को कैराना और नूरपुर उपचुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। अगर कैराना में आरएलडी और समाजवादी पार्टी समर्थित उम्मीदवार जीतती है तो यह माना जा सकता है कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जो जास्लिम समीकरण टूटा था वह फिर जुड़ गया है क्योंकि कैराना में जाट मतदाता निर्णायक माने जाते हैं। ऐसे में मोदी की बागपत में रैली विपक्ष को नुकसान पहुंचा सकती है। यह तो माना ही जा सकता है।