बांग्ला संबोधन, गुरुदेव की स्तुति से विश्वभारती समारोह में दिल जीते मोदी

विश्वभारती विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री ने न केवल बांगला में लोगों को संबोधित किया बल्कि पश्चिम बंगाल की जनता के बीच ऐतिहासिक चरित्रों में सर्वाधिक प्रिय रविन्द्रनाथ ठाकुर के गुणों का भी ख़ूब बखान किया

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शांतिनिकेतन — “आजकेर एइ शुभो सकाले आपनार देशे सकल के आमार सश्रद्ध प्रणाम” (आज के इस शुभ दिवस पर आपके देश के सभी को मेरा सश्रद्ध प्रणाम)। यह कोई बंगाली नहीं बोल रहा; यह आज सुबह विश्वभारती विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की पहली पंक्ति है।

शांतिर नीड़, कविगुरुर स्मृति-बिजरित शान्तिनिकेतने एसे आज आमि अत्यंत आनंद ओ शांति अनुभव करछि,” (शान्ति के नीड़, कविगुरु की स्मृति से ओतप्रोत शान्तिनिकेतन आकर आज मैं अत्यंत आनंद और शान्ति का अनुभव कर रहा हूँ) प्रधानमंत्री ने कहा। इसके साथ ही समारोह में आए हुए युवाओं के बीच से “मोदी, मोदी” के नारे गूंजने लगे।

मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री होने के नाते उन्हें कई विश्वविद्यालयों के समारोहों में जाने का अवसर प्राप्त हुआ है, पर यहाँ वे बतौर अतिथि नहीं बल्कि बतौर आचार्य यानी चांसलर की भूमिका में उपस्थित हुए हैं। अतः यहाँ उनकी भूमिका अधिक बड़ी है।

भाषण की शुरुआत में ही उन्होंने बतौर आचार्य सभी से माफ़ी मांगी कि इलाके में पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है, जो कि विश्वविद्यालय तक पहुँचते हुए उन्हें रास्ते में कुछ बच्चों ने इशारों से बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यहाँ की भूमि परक़दम रखते ही उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कि किसी मंदिर से आती मंत्रोच्चार की ध्वनि से टन-मन में ऊर्जा का संचार हो जाता है। “इसी भूमि पर यहां के कण-कण पर गुरुदेव के कदम पड़े होंगें। यहां कहीं आस-पास बैठकर उन्‍होंने शब्‍दों को कागज पर उतारा होगा। कभी कोई धुन, कोई संगीत गुनगुनाया होगा। कभी महात्‍मा गांधी से लंबी चर्चा की होगी। कभी किसी छात्र को जीवन का, भारत का, राष्‍ट्र के स्‍वाभिमान का मतलब समझाया होगा,” मोदी ने कहा।

“वैदिक और पौराणिक काल में जिसे हमारे ऋषियों-मुनियों ने सींचा। आधुनिक भारत में उसे गुरुदेव रवीन्‍द्रनाथ टैगोर जैसे मुनिषयों ने आगे बढ़ाया… वेदों, उपनिषदों की भावना जितनी हजारों साल से पहले से सार्थक थी उतनी ही सौ साल पहले जब गुरुदेव शांति निकेतन में पधारे। आज 21वीं सदी की चुनौतियों से जुझते विश्‍व के लिए भी ये उतनी ही प्रासंगिक है,” ऐसे शब्दों से प्रधानमंत्री मोदी ने उस भूमि पर लोगों का मन चुरा लिया जहाँ रविंद्रनाथ ठाकुर इतिहास के सर्वाधिक प्रिय पात्र हैं।

अपने राज्य गुजरात से कविगुरु के नाते का हवाला देते हुए मोदी ने कहा, “दुनिया के अनेक विश्‍वविद्यालयों में टैगोर आज भी अध्‍ययन का विषय है। उनके नाम पर chairs हैं अगर मैं कहूं कि गुरुदेव पहले भी ग्‍लोबल सि‍टिजन थे और आज भी है। तो गलत नहीं होगा। वैसे आज इस अवसर पर उनका गुजरात से जो नाता रहा उसका वर्णन करने के मोह से मैं खुद को रोक नहीं पा रहा। गुरुदेव का गुजरात से भी एक विशेष नाता रहा है। उनके बड़े भाई सत्‍येंद्रनाथ टैगोर जो सिविल सेवा join करने वाले पहले भारतीय थे। काफी समय वे अहमदाबाद में भी रहे। संभवत: वो तब अहमदाबाद के कमीशनर हुआ करते थे। और मैंने कहीं पढ़ा था। कि पढ़ाई के लिए इंगलैंड जाने से पहले सत्‍येंद्रनाथ जी अपने छोटे भाई को छ: महीने तक अंग्रेजी साहित्‍य के अध्‍ययन वहीं अहमदाबाद में कराया था। गुरुदेव की आयु तब सिर्फ 17 साल की थी। इसी दौरान गुरुदेव ने अपने लोकप्रिय नोवल खुदितोपाशान के महत्‍वपूर्ण हिस्‍से और कुछ कविताएं भी अहमदाबाद में रहते हुए लिखी थी। यानि एक तरह से देखें तो गुरुदेव के वैश्विक पटल पर जीत स्‍थापित होने में एक छोटी सी भूमिका हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने की रही है, उसमें गुजरात भी एक है।”

इससे पहले दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज यहां पहुंचे। इसमें हिस्सा लेने के लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी यहां आईं। मोदी एवं हसीना आज सुबह विश्वविद्यालय पहुंचे।

प्रधानमंत्री हेलीकाप्टर से सुबह करीब 10 बजे बर्द्धमान पश्चिम जिले के पानागढ़ पहुंचे और जल्द दीक्षांत समारोह स्थल की ओर रवाना हो गये।

प्रधानमंत्री के वहां पहुंचने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फूलों के गुलदस्ते से उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिये हेलीपड पर राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी और भाजपा की पश्चिम बंगाल ईकाई के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

समारोह स्थल के मंच पर अपना स्थान ग्रहण करने से पहले मोदी एवं हसीना दोनों ने विश्वविद्यालय की आगंतुक पंजी में हस्ताक्षर किया।

एक अधिकारी ने बताया कि इससे पहले दिन में विश्वविद्यालय में कुछ अप्रिय घटनाएं हुईं। पानी की कमी के मुद्दे पर युवाओं को समारोह स्थल के बाहर प्रदर्शन करते देखा गया।

युवाओं ने आरोप लगाया कि कुछ छात्र बीमार पड़ गये क्योंकि विश्वविद्यालय में पानी एवं अन्य सुविधाओं के लिये पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि प्रदर्शनकारी बाहरी लोग थे और इनका विश्वविद्यालय से कोई लेना – देना नहीं है।

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘ कुछ प्रदर्शनकारियों की पहचान कर ली गयी है और उन्हें कार्यक्रम स्थल छोड़कर जाने के लिये कहा गया है। समस्या का समाधान कर लिया गया है। ’