पूर्वराशिं परित्यज्य उत्तरां याति भास्करः। स राशिः सङ्क्रमाख्या स्यान्मासत्र्वायनहायने।।

पूर्व राशि का त्याग करके सूर्य जब दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहते हैं।

14 अप्रैल 2018 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर सूर्यनारायण मेष राशि में प्रवेश करेंगे। अतः मेष संक्रान्ति का पर्व मनाया जाएगा। इसको मेषार्क भी कहते हैं। मेष और तुला संक्रांति को विषुवती कहते हैं तथा इसमें दिये हुए दान का अनन्तगुना फल मिलता है। मेष संक्रांति ज्योतिष में एक बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती है और दैवज्ञ इसकी सहायता से बहुत सटीक भविष्यवाणी करते हैं।

अथ भास्वदजप्रवेशलग्नं जगल्लग्नं तस्माच्छुभाशुभज्ञानम्

सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के समय जो लग्न होती है उसे जगत लग्न कहते हैं। उस जगल्लग्न से संसार के शुभाशुभ फल बताया जा सकता है। जगत लग्न की चर्चा हम लेख के अंत में करेंगे।

महापुण्यकाल मुहूर्त = सुबह 08:03 से 08:51 तक

पुण्यकाल मुहूर्त = सुबह 06:00 से 12:27 तक

स्कन्दपुराण नागरखंड के अनुसार स्त्रानदानजपश्राद्धहोमादिषु महाफला अर्थात संक्रांति के दिन स्नान, दान, तप, श्राद्ध, होम आदि का महाफल मिलता है।

अर्यने कोटिपुण्यं च लक्षं विष्णुपदीफलम्। षडशीतिसहस्त्रं च षडशीत्यां स्मृतं बुधैः ॥
शतमिन्दुक्षये दानं सहस्त्रं तु दिनक्षये। विषुवे शतसाहस्त्रं व्यतीपाते त्वनन्तकम् ॥
(वशिष्ठ)

महर्षि वशिष्ठ के अनुसार षडशीति (कन्या, २ मिथुन, मीन और धन) तथा विषुवती (तुला और मेष) संक्रान्ति में दिये हुए दान का अनन्तगुना, अयन में दिये हुए का करोड़ गुना, विष्णुपदी में दिये हुए का लाख गुना, षडशीति में हजार गुना, इन्दुक्षय (चन्द्रग्रहण) में सौगुना, दिनक्षय ( सूर्यग्रहण ) में हजार गुना और व्यतीपात में दिये हुए दानादि का अनन्त गुना फल होता है।

संक्रान्तौ यानि दत्तानि हव्यकव्यानि दातृभि:। तानि नित्यं ददात्यर्क: पुनर्जन्मनि जन्मनि।।

अर्थात संक्रांति आदि के अवसरों में हव्य, कव्यादि जो कुछ भी दिया जाता है, सूर्य नारायण उसे जन्म-जन्मांतर प्रदान करते रहते हैं।

रविसङ्क्रमणे पुण्ये न स्नायाद्यस्तु मानव:। सप्तजन्मन्यसौ रोगी निर्धनोपजायते ॥ (दीपिका)

रविसंक्रमणे प्राप्ते न स्त्रायाद् यस्तु मानवः। चिरकालिकरोगी स्यान्निर्धनश्चैव जातये ॥ (धर्मसिन्धु)

शास्त्रों में वर्णन है कि सूर्य के संक्रमण काल में जो मनुष्य स्नान नही करता वह सात जन्मों तक रोगी, निर्धन तथा दु:ख भोगता रहता है।

जैसा मैंने ऊपर बताया 14 अप्रैल 2018 को सुबह 08 बजकर 27 मिनट पर सूर्यनारायण मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन शनिवार है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार

अयनं स्याद्रविजे वारे मेषस्य तु यदा भवेत्।
राजा शनैश्चरस्तत्र पशुपीडा रुगाधिका।
पीडा त्वनेकधा चास्ति वर्शेशवप्यखिलेषु चेती।।

अर्थात जब शनिवार के दिन मेष की संक्रांति व शनि राजा होता है तो पशुपीडा , रोग और बाहुल्य और उस वर्ष में अनेक कष्ट होते हैं।

इस वर्ष जगत लग्न वृष राशि है। लग्नेश शुक्र, चतुर्थेश सूर्य के साथ द्वादश भाव में विराजमान हैं जो की राज्यभंग की स्थिति तो दिखाते हैं परन्तु उन पर देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि है। लग्नेश पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि नहीं है। अतः देवगृरु की कृपा से कुछ अरिष्ट में कमी आएगी। लग्न के केंद्र भाव खाली हैं। मंगल शनि युति अष्टम भाव में है जिसपर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि नहीं है। गुरु-चंद्र का षडाष्टक योग बन रहा है। अतः मानव, पशु पक्षी आदि सभी विचलित रहेंगे, धन धान्य की कमी होगी, वर्षा फसल के लिए अच्छी नहीं होगी।

जगत लग्न के आधार पर शुभाशुभ

ज्योतिषशास्त्र मनुष्यों के लग्न से जगत लग्न के आधार पर प्रतिवर्ष होने वाले शुभाशुभ बताता है जिसके आधार पर प्रत्येक लग्न के जातक को निम्न फल प्राप्त होगा

वृष लग्न – देह सुख

मेष लग्न – धन लाभ

मीन लग्न – परिवार की वृद्धि

मिथुन लग्न – दुःख, दरिद्रता की प्राप्ति

कर्क लग्न – धन संग्रह, सुख, लाभ

सिंह लग्न – धन, सुख और स्थान प्राप्ति

कन्या लग्न – धन और धर्म की प्राप्ति

तुला लग्न – रोग, मृत्यु भय

वृश्चिक लग्न – स्त्री सुख

धनु लग्न – शत्रु पराजय

मकर लग्न – पुत्र प्राप्ति

कुम्भ लग्न – मित्र सुख

अशुभ प्रभाव दूर करने के लिए संक्रांति के दिन अपना तुलादान करें।

अगर आपको अपनी जन्मकुण्डली के आधार पर विशेष उपाय जानना है तो अपना नाम, जन्मतिथि, जन्म समय, जन्म स्थान के साथ कमेंट करें। कुछ समय के अंतराल से उत्तर अवश्य दूँगा।