हिमंत बिस्व सरमा ममता बनर्जी

धुबरी | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के हिमंत बिस्व सरमा पर शुक्रवार को तीखा हमला करते हुए दावा किया कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि असम सरकार के मंत्री ने शारदा चिट फंड घोटाले में शामिल शारदा के मालिक से रु० 3 करोड़ लिए हैं।

धुबरी में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) और नागरिकता (संशोधन) विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा असम के लोगों को “मूर्ख” बनाने के लिए “दो लॉलीपॉप” हैं।

उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल ने एनआरसी से “40 लाख लोगों को बाहर किए जाने” के बाद असम के सभी नौ लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

चिट फण्ड घोटाले में शामिल लोगों पर कार्रवाई का श्रेय लेते हुए ममता ने दावा किया कि शारदा के मालिक ने हिमंत सरमा को रु० 3 करोड़ रुपये नकद दिए और कहा कि उनके पास सभी दस्तावेजी सबूत हैं।

ममता के ‘सबूत’

एक दस्तावेज लहराते हुए उसने पूछा, “क्या मोदी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की है? क्या आपने उसे गिरफ्तार किया है?”

बाद में ममता ने तृणमूल के धुबरी से उम्मीदवार नुरुल इस्लाम चौधरी को कागज सौंपते हुए कहा, “हमारा उम्मीदवार ये काग़ज़ात आपको दिखायेंगे ताकि आप इस दस्तावेज़ के बलबूते अदालत के दरवाज़े खटखटा सकें।”

सरमा सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में वित्त मंत्री हैं और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के क़रीबी माने जाते हैं।

एनआरसी पर मोदी सरकार पर हमला करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि 40 लाख लोगों के नाम सूची से ग़ायब हैं और उन्होंने कहा कि तृणमूल हमेशा लोगों का साथ देती है, उनका मज़हब कोई भी हो।

एनआरसी की घोषणा के कुछ दिनों बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने स्थिति के आँकलन के लिए असम में पार्टी नेताओं की एक टीम को भेजा था, लेकिन सदस्यों को हवाई अड्डे से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी।

भाजपा पर धार्मिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल ने एनआरसी से बाहर किए गए लोगों का समर्थन नहीं किया, लेकिन वह हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। यह कहते हुए कि उनकी पार्टी सच्चे अर्थों में एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है क्योंकि यह कभी भी धर्म, जाति या वर्ग की राजनीति नहीं करती है, उन्होंने कहा कि वे “प्रधानमंत्री मोदी बाबू” से डरती नहीं हैं।

असम में बंगाली हिंदुओं और बंगाली मुसलमानों को विभाजित करने का आरोप भाजपा पर लगाते हुए उन्होंने मतदाताओं से एकजुट होने और पार्टी को सत्ता से बाहर करने का आग्रह किया।

बनर्जी ने कहा, “न केवल मुस्लिम, बल्कि 22 लाख हिंदुओं और गोरखाओं, बिहारियों, तमिलों और केरल और राजस्थान के लोगों को भी एनआरसी के बाहर रखा गया है। हम उनके नाम शामिल करने के लिए लड़ रहे हैं।”

एनआरसी पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि 25 मार्च 1971 से पहले देश में प्रवेश करने वाला हर व्यक्ति वोटिंग अधिकार के साथ देश का नागरिक है, लेकिन इस अधिनियम के साथ, लोग अपने ही देश में विदेशी हो जाएंगे और मूल अधिकारों से वंचित हो जाएंगे जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और पूजा स्थलों पर जाना।

प्रधानमंत्री पर विश्वासघात करने और देश के लोगों को बेवकूफ बनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पाँच साल पहले उन्होंने खुद को “चायवाला” बताया था, लेकिन अब वे लोगों का पैसा निकालने और अमीरों को सौंपने के लिए “चौकीदार” बन गए हैं।

हिमंत का जवाब

“यह अफ़सोस की बात है कि ममता बनर्जी, जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूं, बिना तथ्यों पर विचार किए मुझ पर आरोप लगा रही हैं। सीबीआई ने मुझे गवाह के रूप में बुलाया था। मैं भाजपा में शामिल होने से पहले जाँच में शामिल हो गया। वास्तव में मैं उन दिनों कांग्रेस में था।” यह जवाब हिमंत बिस्व सरमा ने हर बार दिया जब-जब ममता बनर्जी ने उनपर शारदा चिट फण्ड काण्ड से सम्बंधित आरोप लगाए।

जाँच में एजेंसियों के हाथ सरमा के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं लगा।

सरमा ने फरवरी को शारदा मामले में बदनाम बंगाल के मुख्यमंत्री बनर्जी के लगाए गए इल्ज़ाम के जवाब में गुवाहाटी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, “कम से कम तीन महीने तक मुझसे पूछताछ की गई। यहां तक कि सीबीआई ने अदालत को बताया कि मैं सिर्फ एक गवाह था। इसलिए ममता दीदी ने मुझे और मेरी पार्टी को शारदा के घोटाले में घसीटने की कोशिश की।”

सरमा ने स्पष्ट किया कि बंगाल की राजनीति से उनका कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए उन्हें यह समझ में नहीं आता कि तृणमूल प्रमुख द्वारा उन पर हमला क्यों किया जा रहा है। “मैं उनके पुलिस कमिश्नर (राजीव कुमार) की तरह भाग्यशाली नहीं,” सरमा ने फरवरी की जनसभा में कहा था।