रामजन्म भूमि के मुख्य पक्षकार महंत भास्कर दास का निधन

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फैजाबाद – अयोध्या के राम जन्मभूमि प्रकरण में हिन्दू पक्ष से मुख्य पक्षकार और निर्मोही अखाड़े के सरपंच महंत भास्कर दास का फैजाबाद के हर्षण हृदय संस्थान में उपचार के दौरान शनिवार तड़के करीब तीन बजे निधन हो गया। उन्हें बुधवार को सांस लेने में आ रही समस्या के मद्देनजर हर्षण हृदय संस्थान में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि महंत भास्कर दास का अंतिम संस्कार राम नगरी अयोध्या में सरयू तट पर किया जाएगा। जिले के नाका हनुमानगढ़ी परिसर में उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।

अयोध्या में राजन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण के पक्षकार महन्त भास्कर दास का निधन संत समाज के लिए अपूर्णरणीय क्षति है। 16 वर्ष की आयु में महन्त दास घर से निकलकर सन्त की भूमिका में आ गये।

भास्करदास का जन्म सन् 1929 के 20 मार्च को भागवत पाठक के घर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ था। घर में साधु सन्तों के आवागमन से इनकी रुचि सन्त समाज में हो गयी थी। सन् 1945 में लगभग 16 वर्ष अवस्था में महन्त भास्करदास अयोध्या आ गये और अयोध्या की चौदहकोसी परिक्रमा मार्ग के निकट स्थित फैजाबाद शहर के नाका हनुामनगढ़ी में बाबा मं. बलदेव दास के शिष्य के रूप में दीक्षा लेकर वहीं रहने लगे। वहीं पर महंत भास्करदास मन्दिर की सेवा में वर्षों लगे रहे।

महन्त भास्करदास को अयोध्या में रामजन्मभूमि विवादित परिसर में सन् 1946 में राम चबूतरे पर पूजा-अर्चना के रूप में पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया। महन्त भास्कर दास 1982 तक रामजन्मभूमि के राम चबूतरे पर पुजारी बने रहे। योग्यता के आधार पर सन् 1986 में हनुमानगढ़ी नाका का महन्त बनाया गया। सन् 1993 तक वह निर्मोही अखाड़े के उप-सरपंच रहे। रामस्वरूप दास महन्त के निधन के बाद सन् 1993 में उन्हें निर्मोही अखाड़े का सरपंच बनाया गया। इस अवधि से उस उपाधि को अभी तक निभाते हुए साकेतवासी हो गये।

राम चबूतरे के पुजारी के रूप में रहे महन्त भास्कर दास ने रामजन्मभूमि पर अपने दावे को लेेकर न्यायालय में वाद दाखिल कर मामले में शामिल हुए थे। पांच दशक की कानूनी प्रक्रिया के बाद सन् 2010 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने फैसला सुनाकर मुस्लिम और हिन्दू दोनों पक्षों को भू-खण्ड बांटने का आदेश दिया था। महन्त दास ने इसके विरोध में पूरे भू-खण्ड पर अपना अधिकार लेने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर अधिवक्ता के माध्यम से पैरवी कर रहे थे। महन्त भास्करदास की विरासत और सर्वोच्च न्यायालय में जन्मभूमि के भू-खण्ड की पैरवी उनके शिष्य पुजारी रामदास अब करेंगे। 89 वर्ष की आयु तक महन्त भास्कर दास मन्दिर के भूखण्ड को प्राप्त करने की गतिविधियों से जुड़े रहे। शनिवार की भोर पुख नक्षत्र में उन्होंने अन्तिम सांस ली। उनके निधन पर अयोध्या के सन्तों और रामजन्म भूमि मन्दिर मुकदमे के पक्षकारों में गहरा शोक व्याप्त है। महन्त भास्करदास को आज सन्त समाज के बीच अयोध्या के सरयू नदी के चौधरी चरण सिंह घाट पर जल समाधि दी गयी।