फेफड़े और हमारा स्वास्थ्य

2008 में पूरे विश्व में अकेले फेफड़ों की बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या 92 लाख थी। भारत में, सभी बीमारियों से होने वाली मौतों में 11 फीसदी लोग फेफड़ों की बीमारियों से मरते है

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फेफड़े हमारे प्रमुख अंगो में से एक अंग है। इनका प्रमुख काम रक्त का शुद्धीकरण करना होता है। फेफड़े सांस और रक्त के बीच गैसों का आदान-प्रदान करते हैं। फेफड़ों द्वारा वातावरण से आक्सीजन लेकर, रक्त परिसंचरण में प्रवाहित किया जाता है और रक्त से कार्बन-डाइऑक्साइड को निकाल कर वातावरण में छोड़ा जाता है।

2008 में पूरे विश्व में अकेले फेफड़ों की बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या 92 लाख थी। भारत में, सभी बीमारियों से होने वाली मौतों में 11 फीसदी लोग फेफड़ों की बीमारियों से मरते है। अस्पतालों में होने वाली सभी भर्तियों में लगभग 10 फीसदी मरीज अकेले फेफड़ों की बीमारियों के कारण भर्ती होते हैं।

फेफड़ों से संबंधित बीमारियां

  1. क्षय रोग (टीबी)
    टीबी एक संक्रमक रोग है। यह माईको-बैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु से होता है। जब पीड़ित व्यक्ति खांसता, छींकता या थूकता है, तो उस थूक में मौजूद जीवाणु हवा में मिल जाते है और आस-पास मौजूद लोगों के बीच संक्रमण फैलाते हैं।

टीबी एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। वर्ष 2014 में सम्पूर्ण विश्व में एक करोड़ टीबी के नये मरीज पाये गये जिनमे से कुल 14 लाख लोगों की मौतें हुयी। डब्लूएचओ रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत में दुनिया के एक चौथाई (28 लाख) मामले पाये गये। टीबी से मरने वाला हर पांचवा व्यक्ति भारतीय होता है। भारत में हर 5 मिनट में टीबी से दो मौत होती है। लगभग चार लाख तेईस हजार लोग प्रतिवर्ष टीबी की बीमारी से मरते है। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही टीबी के लगभग 7.5 लाख मरीज हैं, जिनमे से 2.5 लाख सरकारी और लगभग 2.5 लाख लोग प्राइवेट सेक्टर के अस्पतालों में उपचार ले रहे है। चिन्ता का विषय यह है कि प्रदेश में शेष बचे 2.5 लाख मरीजों के बारे में स्वास्थ्य विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है।

  1. सीओपीडी
    सीओपीडी वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली फेफड़े की एक प्रमुख बीमारी है। इसके प्रमुख कारणों में धूम्रपान, वायु प्रदुषण व किसी भी प्रकार का धुआं है। सीओपीडी के भारत मे लगभग 3 करोड़ रोगी है।

  2. दमा (अस्थमा)
    दमा भी स्वांस रोगों में एक प्रमुख रोग है। जिसके प्रमुख कारणों में अनुवांशिकी, वायु प्रदूषण, खान-पान, तनाव आदि हो सकते है। इस बीमारी में मरीज की श्वास नलियों में सूजन आ जाती है और मरीज को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। पूरे विश्व में लगभग 30 करोड़ लोग तथा भारत में लगभग 3 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित है। अगर हम भारत की बात करें तो हर साल लगभग 1 लाख लोगों की मौत दमा की वजह से हो जाती है।

  3. निमोनिया तथा अन्य संक्रमण
    निमोनिया संक्रमण से होने वाली बीमारी है, जिसके प्रमुख कारणों में, जीवाणु, विषाणु, फंगस तथा अन्य पैरासाइट हो सकते हैं। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में मरीज को तेज बुखार, ठण्ड के साथ कंपकंपी, सांस लेने में दिक्कत, बदन दर्द, खांसी आना आदि शामिल है। फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मौत निमोनिया तथा अन्य संक्रमित बीमारियों से होती है।

2015 में डब्लूएचओ के अनुसार फेफडे से सम्बंधित संक्रमण के कुल 37,485,713 मरीज विश्व में पाये गये, जिसमें करीब 2893 मरीजों की मौत उपर्युक्त कारणों से हुई।

  1. फेफडे़ का कैंसर
    फेफड़े के कैंसर में इसकी कोशिकाएं अनियंत्रित गति से बढने लगती हैं। इस बीमारी के प्रमुख कारणों में, धूम्रपान, पर्यावरणीय प्रदुषण, दैनिक और औद्योगिक जीवन शैली है। फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख लक्षण खांसी आना, खांसी में खून आना, वजन घटना, भूख न लगना, सांस लेने में कठिनाई होना और आवाज में बदलाव आ जाना है।

  2. स्लीप एपनिया
    स्लीप एपनिया के लक्षणों में जोर के खर्राटे आना, रात में अचानक नींद से उठ जाना, दिन में सजगता की कमी, चिडचिडापन, सांस की समस्या, बार -बार नींद आना आदि है। इसके प्रमुख कारणों में भोजन का अधिक होना, धूम्रपान, बड़े आकार की गर्दन का होना है।

  3. फेफड़े की दुर्लभ बीमारियां
    दुर्लभ बीमारियों में फेफडों में सिकुड़न की बीमारी है। इसको इन्टरस्टीसियल लंग डीसीज कहते हैं। इसका प्रमुख कारण, पर्यावरण, औद्योगिक जीवन शैली, पशु-पक्षियों का एक्स्पोजर आदि होते हैं। वैश्विक स्तर पर इस बीमारी के लगभग 50 लाख मरीज हैं, जबकि भारत में इस बीमारी से पीड़ित लगभग 10 लाख मरीज मौजूद हैं।

बीमारियों के कारण
फेफड़े से संबन्धित बीमारियों के प्रमुख कारणों में वायु प्रदुषण, धूम्रपान की आदत, चूल्हे पर खाना बनाना (बायोमास फ्यूल), स्वाचलित यंत्र (आटोमोबाइल), इंड्रस्ट्रियल कार्य, संक्रमण, खान-पान में लापरवाही आदि है।

बचाव के उपाय

वायु प्रदूषण पर रोकथामः- वायु प्रदूषण को हम पौधा रोपड़ करके, ऑटो मोबाइल का कम से कम प्रयोग करके, फैक्ट्रियो को आवसीय परिसर से दूर स्थापित करके तथा निर्माण कार्यों मे कमी लाकर कम कर सकते है।

धूम्रपान पर रोकः भारत में लगभग 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते है। धूम्रपान करने वालों को इसके दुष्परिणामों के प्रति सचेत किया जाना चाहिए। साथ ही सरकार को भी इस बाबत सख्त प्रतिबंधात्मक उपाय करना चाहिए।

लकड़ी के चूल्हे पर रोक : लकड़ी के चूल्हों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए, चूल्हों के स्थान पर एलपीजी (प्राकृतिक गैस) के उपयोग को बढ़ाया देना चाहिए। गांव में चूल्हों के धुएं से होने वाली बीमारियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा उज्ज्वला योजना शुरू की गयी है, जो इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

संक्रमण से बचाव
संक्रमित व्यक्ति को मास्क लगाना, खुले स्थान पर रखना (आइसोलेशन), टीबी के संक्रमण से बचने के योजनाबद्ध तरीके से काम करना जरूरी है। इस दिशा में भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा टीबी नोटीफिकेशन एंड एक्टिव केस फाइंडिंग- जैसी योजनायें प्रारम्भ करना तथा इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा 500 रुपये प्रतिमाह हर टीबी के मरीज को पोषण भत्ता देने की घोषणा एक सराहनीय पहल है, इसके द्वारा निश्चित रूप से टीबी के संक्रमण में कमी लायी जा सकेगी।

टीकाकरण
अन्य संक्रमित बीमारियों को रोकने के लिए वैक्सीनेशन (टीकाकरण) की भी मदद ली जा सकती है।इसके साथ साथ बीमारियों की रोकथाम के काम में प्राणायाम और योग क्रिया की भी मदद ली जा सकती है। प्राणायाम इस दिशा में काफी प्रभावी सिद्ध हुआ है।

 (डा. सूर्यकान्त-लेखक किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के हेड हैं)

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