लता मंगेशकर ने नरेंद्र मोदी की ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की’ को आवाज़ दी

कई वर्षों तक पार्श्वगायन से दूर रही किंवदंती गायिका लता मंगेशकर ने एक बार फिर भारत में देशभक्ति की लहर दौड़ा दी है

0
423

मुंबई | ख़ुद पर थोपी हुई वर्षों की सेवानिवृत्ति के बाद पार्श्वगायिका लता मंगेशकर ने एक गीत रिलीज़ किया है, जिसके बोल देश ने भाजपा के तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के मुख से 2014 के चुनावी युद्ध के समय पहली बार सुने थे — “सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।”

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में एक चुनावी रैली में इस प्रतिज्ञा को दोहराया। इन शब्दों ने इस तरह प्रेरित किया कि उन्होंने संगीतकार मयूरेश पाई को इसे धुन में पिरोने को कहा।

वीडियो का एक लिंक मंगेशकर ने पोस्ट किया, प्रधानमंत्री ने जिसे ट्विटर पर साझा किया।

गाना जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और यह इस समय ट्विटर और यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है।

लता मंगेशकर के सहयोगी

गाने के गीतकार हैं विज्ञापन जगत की मशहूर हस्ती प्रसून जोशी।

मंगेशकर को कोरस में सुगंधा तमसे, केया दत्ता, पूर्णिमा मोदक, वंदना कुलकर्णी, शिशिर सप्पल, विवेक नाइक, मंदार सबनीस और कबीर पांडे ने सहायता की है।

गौरव वासवानी ने इसके लिए संगीत की व्यवस्था की और वीडियो को प्रोग्राम किया। पृष्ठभूमि में संजय दास ने गिटार बजाया है। आनंद डाबरे ने शॉट्स रिकॉर्ड किए, जिसे एलएम स्टूडियो में भावेश लिया और नीरज यादव ने संसाधित किया। गीत के संकलन का श्रेय श्वेता विवेक पारुलकर को जाता है।

लता के गायन में देशभक्ति का इतिहास

मंगेशकर आज भी चीन के साथ हुए 1962 के युद्ध के बाद बने गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को याद करती हैं और बताती हैं कि कैसे इस गाने को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आँखें भर आईं थीं। गाना कवि प्रदीप ने लिखा था और गाने की धुन रामचंद्र चितलकर ने बनाई थी।

1990 के दशक में जब एक बार फिर बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय रचित ‘वन्देमातरम’ पर विवाद खड़ा हुआ तब लता मंगेशकर ने एआर रहमान की धुन पर इसका एक वर्जन बनाया। इससे पहले 1952 में बनी फ़िल्म आनंद मठ में हेमंत कुमार (मुखर्जी) की तर्ज़ पर इस गाने को फिल्माया गया था जो मंगेशकर ने ही गाया था। फ़िल्म संन्यासी विद्रोह की कथा पर आधारित थी। चट्टोपाध्याय द्वारा 1882 में रचित उपन्यास का नाम भी आनंद मठ था।

इसके अलावा हालांकि बॉलीवुड में देशभक्ति के अधिकतर गीत पुरुष गायकों के लिए बनते हैं, मंगेशकर ने अनगिनत ऐसे गीत गाये जो रुपहले परदे पर किसी बच्चे पर फिल्माया गया। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज़ की मधुरता इतनी थी कि श्रोता सहज ही यह मान लेता था कि आवाज़ किसी बच्चे की ही होगी।